फिर पुराने ढर्रे पर आया पासपोर्ट विभाग, नियमों के फेर में उलझे आवेदक
लखनऊ। तनवी और अनस पासपोर्ट मामला तो आपको याद ही होगा। इस मामले में तनवी ने पासपोर्ट ऑफिसर पर अभद्र व्यवहार और धर्मिक टिप्पणी किए जाने के का आरोप लगाते हुए पीएम से लेकर विदेश मंत्री तक को शिकायत की थी। इस मामले में तूल पकड़ता देख आनन- फानन में पासपोर्ट बनाए जाने के नियम बदल दिए गए थे। 29 जून को विदेश मंत्रालय की तरफ से पुलिस वेरीफिकेशन का नया प्रोफार्मा लागू किया गया था जिसमे कहा गया था कि सिर्फ नागरिकता और आपराधिक इतिहास की जांच पुलिस द्वारा की जाएगी।

लेकिन पासपोर्ट विभाग महज 12 दिन बाद ही फिर से अपने पुराने ढर्रे पर वापस आ गया है। पासपोर्ट जारी करने में पुलिस ने सत्यापन रिपोर्ट को फिर अहम बना दिया है। नए निर्देशों के अनुसार पुलिस जांच के वक्त आवेदक को अपने पते पर मौजूद रहना अनिवार्य होगा। अब जब आवेदक पासपोर्ट बनवाने के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस पहुंचे तो उनसे कहा गया कि पुराने नियमों के अनुसार ही अब आवेदन पत्र स्वीकृत किए जायेंगे, जबकि तनवी मामले में कहा गया था कि सत्यापन के समय सिर्फ आवेदक की नागरिकता और आपराधिक इतिहास की जांच की जाती है। जबकि अब जो लोग पासपोर्ट ऑफिस में आदेवन के लिए पहुंच रहे है तो उन्हें उन्ही नियमों को याद दिलाया जा रहा है । बार-बार नियमों में होने वाले बदलाव लोगों की गले की फांस बन गया है। बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि तनवी और अनस मामले की वजह से ही नियम बदले गए थे औग अगर इन नियमों को बदला गया था तो वापस से फिर पुराने नियम को लागू कर दिए गए। क्या सिर्फ मामले के चलते दस दिन के लिए ही नियमों को बदला गया था। इन सब के बीच में पासपोर्ट आवेदक बार-बार बदल रहे नियमों में उलझ कर रह गए हैं।
हालांकि, जब इस पूरे मामले पर रीजनल पासपोर्ट ऑफिसर पीयूष वर्मा से बात की गई तो उन्होंने ऐसे किसी भी बदलाव होने की बात से इनकार कर दिया। पीयूष वर्मा ने बताया कि जो भी खबरें मीडिया में चल रही वो सब सिर्फ अफवाहें है, कोई बदलाव नही किया गया है। जो प्रोफार्मा 29 जून को लागू किया गया था वही है उसमें कोई बदलाव नही किया गया है।












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