Lok sabha Election 2024: बेंगलुरु बैठक में जयंत चौधरी की खरी-खरी, पढ़िए पूरी INSIDE STORY
बेंगलुरु की बैठक में जयंत चौधरी ने बड़ी पार्टियों को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है। सूत्रों की माने तो अपने लिए अनुकूल परिस्थितियां होने पर ही वह गठबंधन में शामिल होने को लेकर अंतिम फैसला करेंगे।
Rashtriya Lok Dal News: देश में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2024)को लेकर सभी पार्टियां अपना अपना जोर लगा रही हैं। इस दौरान छोटी पार्टियां भी बड़ी पार्टियों से डील करने में जुटी हैं ताकि उनका भविष्य भी सुरक्षित रह सके। आरएलडी के सूत्रों की माने तो बेंगलुरु में हुई विपक्ष की बैठक में जयंत ने बड़ी पार्टियों के प्रमुखों से कहा कि गठबंधन में शामिल हो रहे छोटे दलों की मांगों पर विचार करना जरूरी है।

छोटे दलों का सम्मान बना रहना चाहिए
आरएलडी के सूत्रों की माने तो आने बेंगलुरु में हुई दो दिवसीय बैठक में जयंत चौधरी ने अपनी बातों को रखा है। उनका कहना था कि गठबंधन में शामिल बड़ी पार्टियों को छोटे दलों का सम्मान बनाए रखते हुए वो जिन सीटों पर दावा ठोंकेगी उसपर विचार करना जरूरी है। बड़ी पार्टियों को यह ध्यान रखना होगा कि छोटी पार्टियों का जनाधार किन किन इलाकों में हैं।
सीटों के बंटवारे के समय छोटे दलों की बात सुनी जाए
दो दिवसीय बैठक में जयंत ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि बड़े दल सीटों के बंटवारे के समय इस बात का ध्यान रखें कि छोटे दलों का सम्मान बरकरार रहे। जिन क्षेत्रों में उन छोटे दलों की मजबूत स्थिति है वहां उनकी बात सुनी जानी चाहिए। सूत्रों की माने तो बेंगलुरु की बैठक के बाद अब इस गठबंधन की बैठक मुंबई में होनी है इसके बाद इसकी बैठक चेन्नई में होनी प्रस्तावित है।
चुनाव बाद छोटी पार्टियों को भुला देती हैं बड़ी पार्टियां
सूत्रों के मुताबिक जयंत ने बैठक में इस बात का भी जिक्र किया कि अक्सर ऐसा देखा जाता है कि गठबंधन के दौरान बड़ी पार्टियां छोटी पार्टियों के दावे को इगनोर कर देती हैं और चुनाव के समाप्त होने के बाद बड़ी पार्टियां छोटी पार्टियों का साथ छोड़ देती हैं। इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है।
रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने कहा है कि,
समाजवादी पार्टी के साथ यूपी में हमारा गठबंधन है। हमें उम्मीद है कि वह हमारी पार्टी के दावों को समझेगी कि जहां पार्टी लंबे समय से प्रयास कर रही है और बेहतर स्थिति में है। इन सीटों पर हम काफी लंबे समय से काम कर रहे हैं।
रालोद-सपा के बीच मतभेद की खबरें
दरअसल पिछले कुछ समय में आरएलडी और समाजवादी पार्टी के बीच अंदरखाने मतभेदों की खबर आ रही है। आरएलडी इस बात से नाराज है कि निकाय चुनाव के दौरान सपा ने उसकी मांगों को नजरअंदाज करते हुए कई सीटों पर पर अपने उम्मीदवार उतारे। यहां तक की मेयर की सभी सीटों पर सपा के प्रत्याशी चुनाव लड़े। रालोद को एक भी सीट नहीं दी गई। दुर्भाग्यवश महापौर की सभी सीटें सपा हार गई थी।
इन 12 सीटों पर आरएलडी का दावा
पश्चिमी यूपी आरएलडी का गढ़ है और जिन 12 सीटों पर वह चुनाव लड़ना चाहती है उनमें कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, फतेहपुर सीकरी, मथुरा और बागपत शामिल हैं।
निकाय चुनाव में सीटों को लेकर सपा से हुआ मतभेद
दरअसल सपा और आरएलडी के बीच संबंध हाल ही में तनावपूर्ण हो गए हैं। खासकर शहरी स्थानीय निकाय चुनावों पर असहमति के बाद से ही। रालोद प्रमुख जयंत चौधरी 23 जून को पटना में आयोजित विपक्षी एकता बैठक में शामिल नहीं हुए और उन्होंने अंतिम समय में इसकी घोषणा की।
क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा छिनने से परेशान आरएलडी
आरएलडी ने इस साल अप्रैल में क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा समाप्त हो गया था क्योंकि वह 2022 के विधानसभा चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनावों में कम से कम 6% वोट पाने में विफल रही। ये दोनों चुनाव रालोद ने एसपी के साथ गठबंधन में लड़े।












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