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'मेरे साथ गलत होना चाहिए,मार देना चाहिए क्योंकि मैं कुलदीप सेंगर की बेटी हूं', Unnao Rape दोषी की बेटी का दर्द

kuldeep singh sengar Daughter Ishita Sengar: उन्नाव रेपकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को कुलदीप सेंगर को जमानत दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुलदीप सेंगर की बेटी डॉ. इशिता सेंगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा किया। इशिता ने यह तक कह दिया कि वो कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी हैं, इसलिए लोग चाहते हैं कि उनके साथ भी रेप जैसी घटना होनी चाहिए, हत्या कर देनी चाहिए। कुलदीप सिंह सेंगर की दूसरी बेटी ऐश्वर्या सेंगर ने कहा है कि 'लड़ेंगे, हारेंगे नहीं'।

इशिता सेंगर ने लिखा कि वह डरा हुआ और बेहद थका हुआ महसूस कर रही हैं। धीरे-धीरे उनका विश्वास कमजोर पड़ता जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है। इशिता ने लिखा कि उन्होंने और उनके परिवार ने पिछले 8 साल धैर्य के साथ इंतजार किया है। उन्हें भरोसा था कि अगर वे हर चीज सही तरीके से करेंगे तो सच अपने आप सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कानून और संविधान पर विश्वास किया, लेकिन अब यह विश्वास टूटता हुआ महसूस हो रहा है।

kuldeep singh sengar Daughter Ishita Sengar

इशिता सेंगर ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि जब बिना पूरी बात सुने किसी पूरे परिवार को दोषी मान लिया जाता है और सच शोर-शराबे में दब जाता है, तब उस दर्द को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोई सच को सुनना न चाहे, इससे सच खत्म नहीं हो जाता। ऐसे में आइए पढ़ें इशिता ने क्या-क्या लिखा है।

इशिता सेंगर बोलीं- 'मैं डरी और थकी, धीरे-धीरे भरोसा खो रही'

पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी डॉ. इशिता सेंगर ने एक ओपेन लेटर लिखते हुए कहा,

''रिपब्लिक ऑफ इंडिया के माननीय अधिकारियों को, मैं यह लेटर एक ऐसी बेटी के तौर पर लिख रही हूं जो थकी हुई, डरी हुई है और धीरे-धीरे भरोसा खो रही है, लेकिन फिर भी उम्मीद बनाई हुई हूं क्योंकि अब और कहीं जाने की जगह नहीं बची है। आठ साल से, मैंने और मेरे परिवार ने इंतजार किया है। चुपचाप, सब्र से, यह मानते हुए कि अगर हमने सब कुछ सही तरीके से किया, तो सच आखिरकार खुद ही बोलेगा। हमने कानून पर भरोसा किया। हमने संविधान पर भरोसा किया। हमने भरोसा किया कि इस देश में न्याय शोर, हैशटैग या लोगों के गुस्से पर निर्भर नहीं करता। आज, मैं इसलिए लिख रही हूं क्योंकि वह भरोसा टूट रहा है।''

इशिता सेंगर बोलीं- 'मेरी बातें सुनी नहीं जातीं क्यों ये MLA की बेटी है'

इशिता सेंगर ने आगे लिखा, ''मेरी बातें सुनी भी नहीं जातीं, इससे पहले ही मेरी पहचान एक लेबल तक सीमित कर दी गई है-"एक BJP MLA की बेटी।" जैसे कि इससे मेरी इंसानियत खत्म हो जाती है। जैसे कि सिर्फ इसी वजह से मैं निष्पक्षता, इज्जत, या बोलने के अधिकार के भी लायक नहीं हूं। जो लोग मुझसे कभी नहीं मिले, कभी एक भी डॉक्यूमेंट नहीं पढ़ा, कभी एक भी कोर्ट रिकॉर्ड नहीं देखा, उन्होंने तय कर लिया है कि मेरी जिंदगी की कोई कीमत नहीं है।''

'मेरे होने की वजह से मेरा रेप होना चाहिए, मुझे मार देना चाहिए या सजा मिलनी चाहिए'

इशिता सेंगर ने अपना दर्द जाहिर करते हुए लिखा,

''इतने सालों में, मुझे सोशल मीडिया पर अनगिनत बार कहा गया है कि सिर्फ मेरे होने की वजह से मेरा रेप होना चाहिए, मुझे मार देना चाहिए या सजा मिलनी चाहिए। यह नफरत कोई छोटी-मोटी चीज नहीं है। यह रोज होती है। यह लगातार होती रहती है। और जब आपको एहसास होता है कि इतने सारे लोग मानते हैं कि आप जीने के लायक भी नहीं हैं, तो यह आपके अंदर कुछ तोड़ देती है। हमने चुप रहना इसलिए नहीं चुना क्योंकि हम ताकतवर थे, बल्कि इसलिए चुना क्योंकि हमें इंस्टीट्यूशन पर भरोसा था। हमने प्रोटेस्ट नहीं किए। हमने टेलीविजन डिबेट में चिल्लाया नहीं। हमने पुतले नहीं जलाए या हैशटैग ट्रेंड नहीं किए। हमने इंतजार किया क्योंकि हमें यकीन था कि सच को तमाशे की जरूरत नहीं होती।''

इशिता ने कहा- 'आठ साल तक हर दिन हमारे साथ बुरा बर्ताव किया गया'

इशिता सेंगर बोलीं, ''उस चुप्पी की हमें क्या कीमत चुकानी पड़ी? हमारी इज्जत धीरे-धीरे छीन ली गई। आठ साल तक हर दिन हमारे साथ बुरा बर्ताव किया गया, हमारा मजाक उड़ाया गया और हमें इंसानियत से दूर रखा गया। हम एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस भागते-दौड़ते, चिट्ठियां लिखते हुए, कॉल करते हुए, अपनी बात कहने के लिए गिड़गिड़ाते हुए फाइनेंशियली, इमोशनली और फिजिकली थक चुके थे। ऐसा कोई दरवाजा नहीं था जिसे हमने खटखटाया न हो। ऐसी कोई अथॉरिटी नहीं थी जिसे हमने न लिखा हो। ऐसा कोई मीडिया हाउस नहीं था जिसे हमने न लिखा हो। और फिर भी किसी ने नहीं सुना। इसलिए नहीं कि फैक्ट्स कमजोर थे। इसलिए नहीं कि सबूतों की कमी थी। बल्कि इसलिए कि हमारी सच्चाई असुविधाजनक थी।''

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ताकतवर परिवार वाले तंज पर इशिता सेंगर का जवाब!

इशिता सेंगर आगे लिखती हैं, ''लोग हमें "ताकतवर" कहते हैं। मैं आपसे पूछती हूं कि ऐसी कौन सी ताकत है जो आठ साल तक एक परिवार को बिना आवाज के छोड़ देती है? ऐसी कौन सी ताकत है जिसका मतलब है कि आप रोजाना अपने नाम पर कीचड़ उछालते हुए देखें, जबकि आप चुपचाप बैठे रहें, एक ऐसे सिस्टम पर भरोसा करें जो आपके होने को भी मानने को तैयार नहीं लगता? आज जो चीज मुझे डराती है, वह सिर्फ नाइंसाफी नहीं है, यह डर है। एक ऐसा डर जो जानबूझकर बनाया गया है। एक ऐसा डर जो इतना जोरदार है कि जज, पत्रकार, संस्थाएं और आम नागरिक सभी चुप रहने के लिए दबाव में हैं। एक ऐसा डर जो यह पक्का करने के लिए बनाया गया है कि कोई भी हमारे साथ खड़े होने की हिम्मत न करे, कोई भी हमारी बात सुनने की हिम्मत न करे, और कोई भी यह कहने की हिम्मत न करे, "आइए फैक्ट्स देखें।"

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इशिता सेंगर ने क्या क्यों लिख रही हैं ओपेन लेटर?

इशिता सेंगर आखिर में लिखती हैं,

''यह सब होते देखकर मैं अंदर तक हिल गई हूं। अगर सच को गुस्से और गलत जानकारी से इतनी आसानी से दबाया जा सकता है, तो मेरे जैसा कोई कहां जाएगा? अगर दबाव और लोगों का गुस्सा सबूत और सही प्रोसेस पर हावी होने लगे, तो एक आम नागरिक के पास सच में क्या सुरक्षा है? मैं यह लेटर किसी को धमकाने के लिए नहीं लिख रही हूं। मैं यह लेटर हमदर्दी पाने के लिए नहीं लिख रही हूं। मैं इसलिए लिख रही हूं क्योंकि मैं डरी हुई हूं और क्योंकि मुझे अब भी यकीन है कि कोई, कहीं न कहीं, मेरी बात जरूर सुनेगा। हम कोई मदद नहीं मांग रहे हैं। हम इसलिए सुरक्षा नहीं मांग रहे हैं क्योंकि हम कौन हैं। हम इंसाफ मांग रहे हैं क्योंकि हम इंसान हैं। प्लीज कानून को बिना डरे बोलने दें। प्लीज सबूतों की बिना दबाव के जांच होने दें। प्लीज सच को सच ही रहने दें, भले ही वह नापसंद हो। मैं एक बेटी हूं जो अब भी इस देश में यकीन करती है। प्लीज मुझे उस भरोसे पर पछतावा न करने दें। आदरपूर्वक, एक बेटी जो अब भी इंसाफ का इंतजार कर रही है।''

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Unnao Rape Case Timeline: उन्नाव रेपकांड में कब क्या और कैसे हुआ?

उन्नाव गैंगरेप मामला साल 2017 से शुरू होकर देश की न्याय व्यवस्था और राजनीति पर गहरे सवाल छोड़ गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि 4 जून 2017 को तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वह इंसाफ की गुहार लेकर कई दफ्तरों के चक्कर काटती रही, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। आरोप है कि दबाव बनाने के लिए उसके पिता को पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया, जिसमें सेंगर का भाई अतुल और उसके सहयोगी शामिल थे।

इंसाफ न मिलने से हताश होकर 8 अप्रैल 2018 को पीड़िता लखनऊ पहुंची और मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने उसे बचा लिया, लेकिन अगले ही दिन उसके पिता की पुलिस हिरासत में मौत की खबर सामने आई। इस घटना ने पूरे मामले को देशव्यापी बना दिया। बाद में सेंगर, उसके भाई, एक थाना प्रभारी समेत कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ और 12 अप्रैल 2018 को जांच CBI को सौंप दी गई।

जांच के दौरान पीड़िता के चाचा, जो उसकी मदद कर रहे थे, पुराने मामले में जेल भेज दिए गए, जिससे वह और अकेली पड़ गई। जुलाई 2019 में एक सड़क हादसे में उसकी मौसी और चाची की मौत हो गई, जबकि वह खुद गंभीर रूप से घायल हुई। इस हादसे में भी साजिश के आरोप लगे। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद केस दिल्ली ट्रांसफर हुआ और लगातार सुनवाई के बाद दिसंबर 2019 में कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई।

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