PICs: भगवान भोलेनाथ के श्रद्धालु कांवरियों ने पेश की दोस्ती की मिसाल

कई बार लोग मजाक भी उड़ाते फिर जब वो समझते तो हमारी दोस्ती की मिसाल भी देते। जिस दिन मुन्ने ने दुर्घटना में पैर खोए उससे पहले उसे ऐसे दोस्त मिल चुके थे।

वाराणसी। सावन के सोमवार के दिन लाखों भक्त और कांवरिया काशी विश्वनाथ मंदिर में भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए आए हुए थे। इन्हीं भक्तों के बीच जौनपुर खेता सराय गांव के 7 दोस्त श्रवण कुमार की तरह अपने दिव्यांग दोस्त मुन्ना को लेकर आए हैं। मुन्ना का 6 साल पहले ट्रेन हादसे में दोनों पैर कट गया था। मुन्ना ने बताया 12 साल से हम आठों दोस्त एक साथ दर्शन और जलाभिषेक करने आ रहे हैं। मुन्ना का कहना है कि पैर कटने के बाद सोचा नहीं था, कभी बाबा के दरबार पहुंच पाऊंगा। मेरे दोस्त बारी-बारी से मुझे हाथों में उठाकर श्रवण कुमार की तरह चलते हैं और गंगा स्नान से लेकर दर्शन तक कराते हैं।

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अपने दोस्त का साथ देने पर आज भी उड़ाया जाता हैं मजाक

मुन्ना अपने गांव में छोटी परचून की दुकान चलाते हैं। दोस्त संदीप, जय, जगदीश, श्रीराम, नीरज, राजेश और अजय है। संदीप ने बताया मुन्ना हम सब का प्रिय है। पहले मुन्ना ने ही सावन में दर्शन करने का बीड़ा उठाया था। पैर कटने के बाद वो हताश हो गया था। हम दोस्तों ने उसी समय तय किया जब हम जिन्दा रहेंगे दोस्ती की खातिर मुन्ना को साथ लाएंगे। नीरज ने बताया हमारी दोस्ती की चर्चा कई गांवों तक है। मुन्ना जौनपुर से हमारे साथ अपने ट्राई साइकिल से आता है। बनारस में शिविर पर साइकिल खड़ी कर मुन्ना को हम दोस्त हाथों में ले लेते हैं। कई बार लोग मजाक भी उड़ाते फिर जब वो समझते तो हमारी दोस्ती की मिसाल भी देते हैं। दोस्त श्रीराम ने बताया कि ट्रेन से उतरते समय मुन्ना का पैर कटकर अलग हो गया था। नौबत यहां तक थी कि वो जिंदगी को खत्म करना चाहता था। हम बचपन से साथ पले-बढ़े हैं। श्रवण कुमार की भक्ति से हमें प्रेरणा मिली है।

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एक महीने काशी हो जाती केसरिया

दरअसल वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में हर साल लाखों की संख्या में शिव भक्त और कांवरिया बाबा के जलाभिषेक के लिए आते हैं। धर्म के मुताबिक किसी भी यात्रा की पूर्णवती काशी के पूजन करने के बाद ही होती हैं। यही वजह है की बाबा धाम के शिवभक्त सीधे काशी आते हैं और सुबह की पहली किरण के साथ ही गंगा स्नान के बाद सीधे बाब भोलेनाथ के अभिषेक के लिए बोल बम के नारे के साथ अपनी बारी का इंतजार करते हैं। सावन के एक-एक महीने बाबा की ये नगरी पूरी केसरिया रंग में रंग जाती है।

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