कल्याण सिंह: कबड्डी का शौकीन जो बना राजनीति का धुरंधर खिलाड़ी

लखनऊ, 21 अगस्‍त। भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का शनिवार को निधन हो गया। भाजपा के कद्दावर 89 वर्षीय नेता कल्‍याण सिंह पिछले कई दिनों से लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई अस्पताल में भर्ती थे और पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर थे। शुक्रवार को कल्याण सिंह की हालत गंभीर होने पर उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनका हाल लेने पहुंचे थे। कल्‍याण सिंह का जाना भाजपा के लिए बहुत बड़ी क्षति है। कल्‍याण सिंह के मार्गदर्शन और सानिध्य में कई नेता पनपे हैं। कल्‍याण सिंह ने अपने राजनीति करियर में कई उतार चढ़ाव देखें।

कल्‍याण सिंह ने कहा था- मेरे जीवन का अंत होने हो तो.....

कल्‍याण सिंह ने कहा था- मेरे जीवन का अंत होने हो तो.....

लोगों में बाबूजी के नाम से पहचाने जाने वाले कल्‍याण सिंह ने एक बार कहा था संघ और भारतीय जनता पार्टी के संस्‍कार मेरी रक्‍त की बूंद-बूंद में समाए हुए हैं, और मेरी इच्‍छा है कि मैं जीवन भर मैं भाजपा में रहूं और जब मेरे जीवन का अंत होने को हो तो मेरा शव भी भारतीय जनता पार्टी के झंडे में लिपट कर जाए। ये कहते हुए कल्‍याण सिंह की गला रुंध गया था और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े थे और पूरी सभा तालियों की गूंज रही थी। अब उनके निधन के बाद उनकी इच्‍छानुसार उनको भाजपा के झंडे में अंतिम विदाई सोमवार को राष्‍ट्रीय सम्‍मान के साथ दी जाएगी।

कल्‍याण सिंह को युवावस्था में कबड्डी खेलना बहुत पंसद था

कल्‍याण सिंह को युवावस्था में कबड्डी खेलना बहुत पंसद था

5 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के एक छोटे से गांव माधोली में जन्‍में थे। कल्याण सिंह से अपनी प्रारंभिक शिक्षा अलीगढ़ में ही की और अलीगढ़ महाविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल करने वाले कल्‍याण सिंह हमेशा अपनी सादगी भरे जीवन के लिए जाने गए। कल्याण सिंह को युवावस्था में कबड्डी खेलना बहुत पंसद था।

कल्‍याण सिंह का राजनीतिक करियर

कल्‍याण सिंह का राजनीतिक करियर

कल्याण सिंह लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहे और 1967 में अपनी सियासी पारी की शुरूआत की और पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य के लिए चुने गए और वर्ष 1980 तक विधायक चुने गए। जून 1991 में भाजपा में उत्‍तर प्रदेश में भाजपा की हुई शानदार जीत के बाद उन्‍हें पार्टी ने यूपी की कमान सौंपते हुए उन्‍हें राज्य का मुख्‍यमंत्री बनाया। कल्याण सिंह राष्ट्रीय सेवक संघ के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में सक्रिय रहे 1975 में इमरजेंसी के दौरान वो 21 महीनों तक जेल में बंद रहे। कल्याण सिंह अपना पहला चुनाव हार गए थे, लेकिन उसके बाद 8 बार विधायक भी रहे। दो बार UP के मुख्यमंत्री, एक बार लोकसभा के सांसद और फिर राजस्थान के गवर्नर भी रहे।

राम मंदिर निर्माण के लिए हमेशा याद किए जाएंगे कल्‍याण सिंह

राम मंदिर निर्माण के लिए हमेशा याद किए जाएंगे कल्‍याण सिंह

अयोध्‍या मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहास‍िक फैसले के बाद अगस्त 2020 में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए जब भूमिपूजन कर रहे थे तब हर शख्‍स दिल से कल्‍याण सिंह को याद कर रहा था और कह रहा था कि अयोध्‍या में भगवान राम मंदिर निर्माण का काम कल्‍याण सिंह के बिना संभव नहीं हो पाता। कल्‍याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी।

मंदिर के नाम पर न्‍यौछावर कर दी थी सीएम की कुर्सी

मंदिर के नाम पर न्‍यौछावर कर दी थी सीएम की कुर्सी

कल्‍याण सिंह को हमेशा उनके मुख्‍यमंत्री काल के लिए याद किया जाता रहेगा। जब वो मुख्‍यमंत्री थे तभी अयोध्‍या में ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद विध्‍वंस हुआ और जिसके बाद कल्याण सिंह हमेशा सुर्खियों में रहे। बाबरी विध्वंस के बाद कल्याण सिंह ने इस्तीफा दे दिया था लेकिन 1997 में दोबारा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने और प्रदेश की कमान संभाली। यूपी में मुख्‍यमंत्री की कुर्सी संभालते ही स्कूलों में भारत माता की प्रार्थना और वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया था।

कल्‍याण सिंह ने दिलेरी से अपने सिर ले ली थी ये जिम्‍मेदारी

कल्‍याण सिंह ने दिलेरी से अपने सिर ले ली थी ये जिम्‍मेदारी

गोली कांड में अफसरों को बलि का बकरा बनाने के लिए बजाए कल्‍याण सिंह ने खुद अपने सिर पर ये जिम्‍मेदारी ले ली और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर भी जब वे अयोध्या में 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिरने से नहीं रोक पाए थे, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक दिन की सजा के लिए तिहाड़ जेल में काटी और कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर खुद उन्होंने अफसरों को कहा था कि वे कारसेवकों पर गोली नहीं चलाएं।

अटल बिहारी से नाराज होकर भाजपा जब छोड़ दी थी

अटल बिहारी से नाराज होकर भाजपा जब छोड़ दी थी

भाजपा के वरिष्‍ठ नेता और देश के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी को कल्‍याण सिंह अपना आदर्श मानते थे। लेकिन एक बार उन्‍हीं से नाराज होकर अपनी नई राष्‍ट्रीय क्रान्ति पार्टी बना ली। वहीं अटल बिहारी के मनाने पर बाद में वो मान गए और भाजपा में पुन: शामिल हो गए थे। वर्ष 2009 में फिर भाजपा से अलग होकर समाजवादी पार्टी में चले गए और साल 2013 में फिर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में कल्याण सिंह को हिमाचल प्रदेश का राजस्‍थान का राज्यपाल बनाया गया था।

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