मोदी की वजह से 120 साल के मतदाता ने पहली बार डाला वोट
बाबा शिवानंद ने बताया की इतने सालों के बाद वो पहली बार वोट डालने आए हैं क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी से उन्हें काफी उम्मीदे हैं। बाबा शिवानंद जी ने अपनी अपेक्षाएं भी गिनाईं...
वाराणसी। यूपी चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में देश के सबसे बुजुर्ग स्वामी शिवानंद जी ने पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया। स्वामी शिवानंद जी ने 120 साल की उम्र होने के बावजूद पहली बार मतदान किया है।

पहली बार दिया वोट, जताई मोदी पर उम्मीद
बाबा ने बताया की देश की राजनीति को देखते हुए मैंने आज तक अपना वोट नहीं डाला था लेकिन बीते लोकसभा चुनाव के बाद जब से देश की बागडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में आई है तब से उम्मीद मेरी उम्मीद जग गई है। बाबा ने कहा कि अब हमारा देश बाकी दुनिया को उन्नति के मामले में पछाड़ देगा। यही नहीं बाबा शिवानंद ने अपने मुद्दे भी बताए जिसकी जरूरत आज देश को सबसे ज्यादा है।

कौन हैं बाबा शिवानंद?
शिवानंद जी का जन्म 8 अगस्त 1896 को बांग्लादेश के श्रीहट्ट जिले में हुआ था। परिवार की माली हालत ऐसी थी की माता-पिता भीख मांगकर जीवनयापन करते थे। इसी गरीबी ने इन्हें इनके माता-पिता से दूर कर दिया और पिता ने इन्हें बाबा गुरुदेव को सौप दिया था। 1903 में बाबा शिवानंद के माता-पिता की मौत का कारण भी गरीबी ही बनी। जिसके बाद इन्होंने 1907 में अपने गुरू से दीक्षा ग्रहण की। 1979 में शिवानंद जी काशी आए और कबीरनगर इलाके के एक आश्रम में तब से रह रहे हैं।

मोदी सरकार से बाबा को क्या है अपेक्षा?
बाबा शिवानंद ने बताया की इतने सालों के बाद वो पहली बार वोट डालने आए हैं क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी से उन्हें काफी उम्मीदे हैं। बाबा शिवानंद जी की अपेक्षाएं-
1. जातिवाद (जाति की दीवारें हटाकर सबको एक समान अधिकार देना चाहिए)
2. रोजगार (भिखारियों से लेकर मजबूरों तक को रोजगार मिलना चाहिए)
3. भ्रष्टाचार (छोटे-छोटे निकाए से भी समाप्त होना चाहिए)
4. यूपी में वो सरकार बने जो धर्म जाति से ऊपर उठकर काम करे, जैसे देश के लिए नोटबंदी का फैसला।
5. यूपी से परिवारवाद की राजनीति खत्म होनी चाहिए।
6. भुखमरी (कोई देश में भूखा न सोए), घर (सभी को घर मिलना चाहिए)

गजब की है बाबा शिवानंद की याददास्त
उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले शिवानंद बाबा ने खुद को भारत का सबसे बुजुर्ग इंसान होने का दावा किया है। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक उनकी उम्र 120 साल है। बाबा ने अपनी उम्र बताने में याददास्त दुरुस्त करते हुए बताया कि उनका जन्म 8 अगस्त 1896 को हुआ था। वो बांग्लादेश के एक गांव में पैदा हुए थे। बाद में वो कोलकाता स्थित एक आश्रम में दीक्षा लेने के बाद वहीं रहने लगे। जिसके बाद वो वाराणसी आए और तब से यहीं रह रहे हैं।












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