UP में आधी आबादी को जिसने साधा उसी दल की बनी सरकार, जानिए वजहें
लखनऊ, 12 फरवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है लेकिन इस चुनावी समर में सभी दल महिला वोटरों को साधने में जुटे हैं। राजनीतिक दलों को पता है कि महिला वोटर को साधने में कामयाब रहे तो सत्ता हाथ में आ सकती है। दरअसल पिछले तीन चुनाव के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि जब जब महिलाओं ने जिस दल के पक्ष में अपना जोर दिखाया सरकार उसी की बनी। तो क्या इस बार भी यूपी चुनाव में महिलाएं ही तय करेंगी की सत्ता के सिंघासन पर कौन बैठेगा। आइए जानते हैं कि यूपी में आधी आबादी राजनीतिक दलों के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों हो गई है और वो महिला वोटरों को लुभाने के लिए क्या क्या कर रहे हैं।

सत्ता दिलाने में महिलाओं की भूमिका काफी अहम
उत्तर प्रदेश की सत्ता दिलाने में आधी आबादी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। पिछले तीन विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि महिला मतदातााअें ने जिस दल पर भरोसा जताया है सरकारी भी उसी की बनी है। जिन पार्टियों को महिलाओं के 30% से ज्यादा वोट मिले उनकी सरकार बन गई। इस दौरान यह भी सामने आया कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं वोट देने में भी आगे निकल रही हैं। ऐसे में इस बार के विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं का रूझाान किधर होगा यह देखना काफी दिलचस्प होगा।

सभी पार्टियां महिला वोटर्स को साधने में लगीं
यूपी में चुनाव के दौरान इस बार सभी पार्टियां महिला केंद्रित घोषणाओं को खास तवज्जो दे रहे हैं। इसकी वजह पिछले तीन चुनावों में उनका वोटिंग पैटर्न है। यदि बात 2007 के विधानसभा चुनाव की करें तो इसमें बसपा को जिताने में महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई थी। सीएसडीएस के सर्वेक्षण के मुताबिक, इस दौरान 32% महिलाओं ने बहुजन समाज पार्टी को वोट दिया। इसके चलते बसपा 206 सीटें जीत गई। सत्ता में उसकी पुर्ण बहुमत की सरकार बन गई। इसी तरह 2012 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने समाजवादी पार्टी का साथ दिया। 31% महिलाओं सपा को वोट दिया। जिससे वह 224 सीटें जीतने में सफल रही और यूपी में सरकार बन गई। इसके बाद पिछले चुनाव यानी 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 41% महिलाओं ने वोट दिया जिसकी वजह से सीटों की संख्या बढ़कर 312 तक पहुंच गई और लंबे समय बाद बीजेपी का सत्ता का वनवास खत्म हो गया।

पश्चिम बंगाल और दिल्ली में महिलाओं ने निभाई अहम भूमिका
पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाने में महिलाओं ने काफी अहम भूमिका रही थी। लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वे के मुताबिक, तृणमूल को भाजपा के मुकाबले महिलाओं के 13% ज्यादा वोट मिले और पार्टी ने 215 सीटें जीतकर सरकार बना ली। तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में महिलाओं को टिकट दिया था। ममता ने जहां 2019 के लोकसभा चुनाव में 40.5% महिलाओं को टिकट दिया थ, वहीं 2021 के विधानसभा चुनाव में 16.6% महिलाओं को उम्मीदवार बनाया था। इसी तरह दिल्ली में 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 60% महिलाओं ने वोट दिया था। आप ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की और वह सत्ता में आने में सफल रही।

यूपी में महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को तवज्जो
यूपी में योगी सरकार ने भी महिला वोटर्स को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं बनाईं। पिछले दो वर्षों के दौरान योगी सरकार ने पहले से मौजूद केंद्रीय योजनाओं के अलावा महिलाओं से जुड़ी कई योजनाओं की घोषणा की है। 2021 में यूपी महिला सामर्थ्य योजना शुरू की है। इसके तहत महिला उद्यमियों को बढ़ावा देना है। सरकार ने मिशन शक्ति-निर्भया एक पहल योजना लॉन्च की है। वहीं अन्य योजनाएं उन महिलाओं को सहायता प्रदान करती हैं जिन्होंने अपने पति को कोरोना से खो दिया है। वहीं, महिला सशक्तिकरण के नाम पर केंद्र की योजनाओं में उन्हें तरजीह दी जा रही है। महिलाओं के नाम पर राशन कार्ड बनवाए गए। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवासों की रजिस्ट्री भी महिलाओं के नाम पर करवाई जा रही है। हर घर जल से नल योजना के केंद्र में भी महिलाएं ही हैं।

प्रियंका का महिलाओं पर फोकस
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की पार्टी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी महिला कार्ड पर दांव लगाया है। इसके चलते ही उन्होंने इस बार 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' अभियान की शुरुआत करते हुए घोषणा की थी की थी। विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को दिए जाने की शुरूआत कांग्रेस ने ही की। प्रियंका गांधी इस बार महिला केंद्रित मुद्दों पर अधिक जोर दे रही हैं। कांग्रेस ने महिलाओं के लिए 'शक्ति विधान' घोषणा पत्र जारी किया है। प्रियंका को पता है कि यूपी के महिलाओं के दिल में जगह बन गई तो कांग्रेस को यूपी में दोबारा खड़ा किया जा सकता है।












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