उत्तर प्रदेश में 30% 'शत्रु संपत्तियों' पर गैर-कानूनी कब्जा, इन आंकड़ों से हुआ खुलासा
उत्तर प्रदेश सरकार शत्रु संपत्तियों पर से गैर-कानूनी कब्जे को हटाने के लिए प्रदेश भर में अभियान शुरू करने के तैयारी में है। इससे पहले एक ऐसा आंकड़ा प्राप्त हुआ है, जिससे पता चलता है कि राज्य में ऐसी 30 प्रतिशत शत्रु संपत्तियां अवैध कब्जे में हैं। यह आंकड़ा काफी उत्साहजनक है, क्योंकि अतिक्रमण हटाओ मुहिम के बाद बड़ी तादाद में ऐसी संपत्तियों पर फिर से सरकारी कब्जा स्थापित हो सकेगा। यही नहीं सरकार को यह भी जानकारी है कि ऐसी अनेकों संपत्तियां दशकों से बहुत ही मामूली किराए पर लगी हुई हैं। सरकार अब उनसे मौजूदा बाजार भाव से किराया वसूलने की तैयारी में है।

यूपी में 30% शत्रु संपत्तिया अवैध कब्जे में -रिपोर्ट
अंग्रेजी अखबार द हिंदू अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार के एक आंकड़े से पता चलता है कि राज्य में 30% शत्रु संपत्तियों पर अवैध कब्जा करके रखा गया है। राज्य सरकार ऐसी संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रदेश भर में अभियान शुरू करने की तैयारी में है। शत्रु संपत्ति उन संपत्तियों को कहा जाता है जो उन लोगों के द्वारा छोड़ी गई हैं भारत छोड़कर देश के दुश्मन मुल्कों में शिफ्ट कर चुके हैं। ऐसे शत्रु देशों में पाकिस्तान सबसे कुख्यात है।(तस्वीर-सांकेतिक)
माफियाओं का भी है ऐसी संपत्तियों पर कब्जा
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार ऐसी 1,467 शत्रु संपत्तियां माफियाओं और दूसरे लोगों के कब्जे में हैं। जबकि करीब 369 उनसे किसी ने दूसरे ने कब्जे में ले रखा है और 424 संपत्तियां पिछली सरकारों के कार्यकाल में मामूली भाड़े पर सरकार से किराए पर लेकर रखे गए हैं। यूपी में मौजूद कुल 5,936 शत्रु संपत्तियों में से करीब 2,250 पर अवैध कब्जा करके रखा गया है।
अवैध कब्जे के मामले में शामली नंबर वन
आंकड़े यह भी बताते हैं कि अधिकतर शत्रु संपत्तियां शामली जिले में अवैध कब्जे में हैं। जिले में कुल 482 शत्रु संपत्तिया हैं, जिनमें से 268 पर अवैध कब्जा करके रखा गया है। पिछले हफ्ते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के गृह विभाग को निर्देश दिया है कि शत्रु संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रदेश भर में अभियान चलाएं और ऐसी संपत्तियों से जुड़ी एक अपडेटेड रिपोर्ट तैयार करें। योगी सरकार इस मसले को कितनी गंभीरता से ले रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि प्रिंसिपल सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी को इस मामले की निगरानी के लिए नियुक्त करने का फैसला किया है।
किराया का भी होगा पुनर्मूल्यांकन
प्रदेश सरकार ने किराए पर दी गई संपत्तियों का भी पुनर्मूल्यांकन करने का फैसला किया है। क्योंकि, संज्ञान में आया है कि ये संपत्तियों दशकों पहले बहुत ही मामूली रकम पर किराए में ली गई थीं और अभी तक वही किराया देते चले आ रहे हैं। अब सरकार मौजूदा बाजार भाव से उन संपत्तियों का आकलन करना चाहती है।












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