गैंगस्टर से कैसे राजनीति में बढ़ा मुख्तार अंसारी और अफजाल का कद
बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को एमपी/एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट में 10 साल की सज़ा सुनाई है।

माफिया मुख्तार अंसारी और उनके भाई बसपा सांसद अफजाल को गैंगस्टर मामले में गाजीपुर की कोर्ट ने क्रमश: 10 साल 4 साल की सजा सुनाई है। अंसारी ब्रदर्स की कहानी किसी फिल्मी कहानी जैसी ही है।
एक मामलू ठेकेदार से गैंगेस्टर और फिर राजनीति में दशकों तक अपनी ठसक बरकरार रखने वाले मुख्तार आंसारी और अफजाल अंसारी यूपी के गाजीपुर और मऊ में आंतक का पर्याय हैं। सालों से जेल में बंद मुख्तार अंसारी का साम्राज्य करीब सात राज्यों में फैला हुआ है।
पिछले 18 साल से सलाखों के पीछे बंद मुख्तार अंसारी के लिए जेल अब दूसरा घर हो चुका है। मुख्तार जेल में रहकर अपने साम्राज्य को चलाता रहा है। वहीं अफजाल अंसारी जेल से बाहर रहकर इस जुर्म के साम्राज्य को बचाने में मदद करता रहा है।
आंसारी ब्रदर्स के इस साम्राज्य में अफजाल एक वजीर की भूमिका में हैं। जो राजनीतिक सांठगांठ की मदद से अपना ये साम्राज्य बचाए हुए हैं। अफजाल बसपा से लोकसभा सांसद हैं। आंसारी भाईयों का कोयले की ठेकेदारी से गैंगेस्टर और फिर राजनीति का सफर बड़ा ही दिलचस्प है।
गाजीपुर के मोहम्मदाबाद में एक राजनीतिक परिवार में जन्मे मुख्तार अंसारी पर हत्या का पहला मुकदमा 1988 में मंडी परिषद में ठेकेदारी को लेकर दर्ज हुआ।
इसके बाद जेल मुख्तार का नया अड्डा बन गया। जिसकी कई कहानियां आपको सुनने को मिल जाएंगी। अंसारी परिवार के रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि, जेल में रहकर भी वह लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। मुख्तार की सियासी पहुंच के कई उदाहारण देखने को मिल जाएंगे। कभी वह बसपा, तो कभी सपा से चुनाव लड़कर अपने परिवार का सियासी भविष्य सुरक्षित करता रहा। गाजीपुर, मऊ, वाराणसी में उसकी पकड़ आज भी मजबूत है।
मुख्तार अंसारी 1996 में मऊ सदर सीट से पहली बार विधायक बना। जिसके बाद कई बार मुख्तार जेल से अंदर बाहर हुआ। लेकिन मुख्तार के राजनीति में आने से पहले अफजाल की राजनीति में एंट्री हो गई थी। अफजाल अंसारी 1985 में मुहम्मदाबाद से पहली बार भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी से विधायक बना। अफजाल अंसारी ने सियासत का आगाज अपने गृहक्षेत्र मुहम्मदाबाद से किया।
उसके बाद वर्ष 1996 तक लगातार पांच बार विधानसभा में पहुंचते रहे। इसके अलावा वह गाजीपुर संसदीय क्षेत्र से दो बार सांसद भी निर्वाचित हुए। 2002 के विधानसभा चुनाव में अफजाल अंसारी हार गया। 2004 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उन्हें गाजीपुर संसदीय सीट से टिकट दे दिया। जिसमें वह जीत गए।
इसके बाद अफजाल 2009 और 2014 में चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। 2019 में मोदी लहर के बाद भी भाजपा के सांसद मनोज सिन्हा को हराकर एकबार फिर लोकसभा चुनाव पहुंचा। अंसारी बंधुओं सिर्फ यूपी और बिहार तक ही सीमित नहीं हैं। उनका बेनामी कारोबार पंजाब, हरियाणा और राजस्थान समेत कई राज्यों में फैला हुआ है।












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