अधर में बोर्ड परीक्षा, लड़कियों के सेंटर दूर भेजने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी बोर्ड से यह सवाल किया है कि लड़कियों का सेंटर दूर क्यों भेजा गया जबकि नियम है कि ये सेंटर पांंच किलोमीटर के दायरे में हो?
इलाहाबाद। चुनाव के चलते पहले ही पिछड़ चुकी यूपी बोर्ड की परीक्षा फिर से अधर में लटकती दिख रही है। लड़कियों का परीक्षा केंद्र स्कूल से दूर बनाने के यूपी बोर्ड के फैसले पर रोक लगा दी है। साथ ही हाईकोर्ट ने यूपी बोर्ड से यह जवाब भी मांगा है कि आखिर लड़कियों का सेंटर 15-16 किलोमीटर दूर क्यों भेजा गया?

कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा कि जब शासनादेश है कि लड़कियों के सेंटर विद्यालय से 5 किलोमीटर के दायरे में हो अथवा विद्यालय में ही लड़कियों का परीक्षा केंद्र बने तब इस तरह से सेंटर बनाने का क्या अवचित्य है ?
बोर्ड में मची खलबली
यूपी बोर्ड की परीक्षा 16 मार्च से शुरू होनी है। सबकुछ तय हो चुका है। लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद बोर्ड के हाथ पांव फूल गये हैं। कोर्ट को तो जैसे-तैसे बोर्ड जवाब दे देगा लेकिन असली समस्या तो विद्यालय से दूर बनाये गये लड़कियों के सेंटर को फिर से तय करने की है।
खलबली के बीच लड़कियों को उनके ही विद्यालय में वापस सेंटर बनाने पर विचार किया जा रहा है क्योंकि इसके अलावा बोर्ड के पास कोई चारा भी नहीं बचा है।
छात्राओ ने दाखिल की थी याचिका
हाईकोर्ट में पुष्पा देवी और नौ अन्य छात्राओं ने याचिका दाखिल करते हुये यूपी बोर्ड द्वारा परीक्षा केंद्र 16 किलोमीटर दूर बनाये जाने पर रोक की मांग की गई थी। याचिका में 13 अक्टूबर 16 के शासनादेश का हवाला दिया गया था। जिसमें कहा गया है कि लड़कियों का परीक्षा केन्द्र या तो उनके कॉलेज में रखा जाएगा या फिर 5 किलोमीटर की सीमा के भीतर रहेगा।
लेकिन बोर्ड ने शासनादेश का उल्लंघन कर यूपी लड़कियों का सेंटर 15-16 किलोमीटर दूर बना दिया। मामले की सुनवाई करते हुये न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने यूपी बोर्ड से जवाब मांगा है। साथ ही याचीगण समेत लड़कियों का परीक्षा केन्द्र शासनादेश के अनुसार निर्धारित करने का आदेश दिया है।












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