यूपी: दस्त से बच्चों की ना हो मौत इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की यह कवायद

कानपुर। भारत के सरकारी अस्पतालों में प्रतिवर्ष दस्त के प्रभाव से ग्रसित होने के चलते आने वाले करीब 32 लाख बच्चों में से 78 हजार बच्चों की मौत हो रही हैं। जिसमें रोटा वायरस के चलते दस्त रोग से ग्रसित होने और उसके चलते मौत की आगोस में सो जाने की संख्या अधिक होती हैं। इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को रोटा वायरस से बचाने का प्रयास शुरू कर दिया हैं।

यूपी: दस्त से बच्चों की ना हो मौत इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की यह कवायद

स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण के माध्यम से 0 से 1 वर्ष तक के बच्चों को रोटा वायरस वैक्सीन की 5-5 बूंदे पिलाने की कवायद शुरू कर दी हैं। इसी के चलते यूपी के जनपद कानपुर देहात के सभी सरकारी अस्पतालों में 0 से 1 वर्ष के बच्चो को रोटा वायरस वैक्सीन पिलाई जाएगी। जिसकी तैयारियां कानपुर देहात के स्वास्थ्य विभाग ने पूरी कर ली हैं।

कानपुर देहात में 0 से 1 वर्ष तक के बच्चों को रोटा वायरस के कारण होने वाले दस्त रोग और इसके प्रभाव से हो रही मौतों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जनपद के समस्त सीएचसी, पीएचसी, उप केन्द्रो सहित जिला अस्पतालों में 0 से 1 वर्ष के बच्चों को रोटा वायरस वैक्सीन पिलाई जाएगी। जिसकी तैयारियां स्वास्थ्य विभाग ने पूरी कर ली हैं। इसी की जानकारी देते हुए कानपुर देहात के मुख्य चिकित्साधिकारी हीरा सिंह ने बताया कि शिशुओं को होने वाले रोगो में दस्त रोग आम रोग की तरह होते हैं। लेकिन अज्ञानतावश कभी-कभी यह जानलेवा भी साबित हो जाते हैं। दस्त रोग अधिकतर रोटा वायरस के कारण होते हैं। जिनकी अन्य दस्त रोग से ग्रसित बच्चाों की संख्या के सापेक्ष 40 प्रतिशत संख्या होती हैं।

दस्त रोग में पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण शरीर में पानी एवं नमक की कमी हाने के कारण शिशुओं की मृत्यु हो जाती हैं। जो भारत के सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिवर्ष दस्त से ग्रसित बच्चे इलाज के लिए आते हैं। जिनमें से लगभग 78 हजार बच्चों की मौत हो जाती हैं। जिनमें से करीब 59 हजार बच्चों की मृत्यु 1 से दो वर्षो के बच्चों की होती हैं। रोटा वायरस की वजह से होने वाले दस्त वर्ष में किसी भी माह मे हो सकता हैं। लेकिन सर्दियों के मौसम में इसका प्रभाव सबसे अधिक होता हैं। भारत ही नहीं रोटवायरस के प्रभाव विश्व में करीब 95 देर्शो में फैला हैं।
जिसके चलते इन देशों ने रोटावायरस वैक्सीन का प्रयोग करना शुरू कर दिया हैं और जन्म से 1 वर्ष के बच्चों को टीकाकरण के माध्यम से रोटा वायरस वैक्सीन की 5-5 बूंदे बच्चों को पिलाने का काम शुरू कर दिया हैं। इसी के चलते भारत में भी इस वैक्सीन की बूंदे जन्म से 1 वर्ष बच्चों को पिलाने का तैयारी शुरू हो गया हैं। यूपी में भी इस वैक्सीन की बूंदे बच्चों को पिलाने की तैयारियां शुरू कर दी।

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