36 सीटों पर JDU की दावेदारी: प्रदेश अध्यक्ष ने कहा-पिछला चुनाव न लड़ना भारी भूल, इस बार नहीं दोहराएंगे गलती
लखनऊ, 07 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) या जद (यू) अकेले चुनाव लड़ेगा या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी यह अभी तय नहीं हुआ है लेकिन संगठन के नेताओं का दावा है कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिली तो इस बार अकेले चुनाव में उतरा जाएगा। जद यू के प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल ने कहा है कि बीजेपी के साथ जाने पर सहमति बनाने का काम केंद्रीय नेतृत्व का है। उम्मीद है कि सम्मानजनक सीटें मिलेंगी। यदि नहीं मिलीं तो हम अकेले चुनाव मैदान में उतरेंगे और करीब 70 से 75 विधानसभा सीटों पर अपनी तैयारी पूरी है जहां से पार्टी चुनाव लड़ेगी क्योंकि पार्टी पहले ही पिछला चुनाव लड़कर इसका खामियाजा भुगत चुकी है।
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पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल ने वन इंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा की पार्टी अपनी तरफ से पूरी तैयारी में लगी है और अभी तक यूपी के 65 जिलों में संगठन का विस्तार हो चुका है। अगले महीने यूपी में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक रखी गई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी यूपी आएंगे। इस बार हम पिछली गलती नहीं दुहराएंगे। पिछला विधानसभा चुनाव न लड़ने का खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ रहा है। प्रस्तुत है अनूप पटेल से बातचीत के प्रमुख अंश....
सवाल: बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर बात कहां तक पहुंची है ?
जवाब: बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर शीर्ष नेतृत्व बातचीत कर रहा है। यह आलाकमान पर है कि क्या फैसला लेता है। लेकिन हमे शीर्ष नेतृत्व की तरफ से कहा गया है कि आप पूरे प्रदेश से मजबूत सीटों का चुनाव करिए और उसकी रिपोर्ट भेजिए। हम अपने काम में लगे हुए हैं और अब तक 70 सीटों की रिपोर्ट हमारे पास आ गई है और आगे भी लिस्ट तैयार करने को कहा गया है। सारी सीटों की लिस्ट सामने आने के बाद उसे भेजा जाएगा जिसमें से सीटें छांटी जाएंगी कि क्या करना है।
सवाल: पिछली बार जब बीजेपी के साथ गठबंधन कर जेडीयू चुनाव लड़ी थी तब में और अब में क्या फर्क आया है ?
जवाब: हमारा बीजेपी के साथ 2007 में बीजेपी के साथ चुनाव लड़ा था। उसके अगले बार यानी 2012 में हम अपने बूते चुनाव लड़े थे लेकिन पिछला चुनाव पार्टी महागठबंधन में शामिल होने की वजह से नहीं लड़ पाई थी और हम उसके लिए शर्मिंदा भी हैं। हमें पिछला चुनाव जरूर लड़ना चाहिए था लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि हम पिछले चुनाव से अलग हो गए। इसका काफी असर पड़ा और पार्टी को भी नुकसान हुआ।

सवाल: पार्टी की दावेदारी कितनी सीटों पर है ?
जवाब: शीर्ष नेतृत्व की बात चल रही है और उम्मीद है कि सम्मानजनक सीटों पर समहति बन जाएगी। हमारी दावेदारी लगभग 36 सीटों पर है लेकिन यह गठबंधन के बाद तय होगा कि हमने कितनी सीटें लड़नी हैं लेकिन हम अपनी तरफ से पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं।
सवाल: क्या पार्टी इस बार भी केवल पूर्वांचल ओर बिहार की सीमा से सटे इलाकों में ही अपनी दावेदारी कर रही है या पूरे यूपी से सीटों को चिन्हित किया गया है ?
जवाब: हमारी तैयारी पूरे यूपी को लेकर है लेकिन चाहे वो मध्य यूपी हो या बुंदेलखंड हो या पूर्वांचल हो लेकिन यह शीर्ष नेतृत्व को तय करना है कि किन किन सीटों पर अपनी दावेदारी करनी है और कहां कहां चुनाव लड़ना है। अभी तक हमारे पास 70 से 75 मजबूत सीटें हैं जहां हम अपनी तैयारी कर रहे हैं और यदि अकेले चुनाव लड़ने की नौबत आई तो हम इतनी सीटों पर मजबूती के साथ लड़ेंगे।
सवाल: लखीमपुर खीरी मामले को लेकर पार्टी का क्या स्टैंड है, क्या आपने वहां जाने की कोशिश की ?
जवाब: हमारा मानना है कि यदि इसमें किसानों से बैठकर बातें की गई होती तो नतीजा बेहतर होता। जहां तक मंत्री और उनके बेटे की गिरफतारी का सवाल है तो यह उनके अंदर का मामला है इसमें वो क्या करते हैं और क्या नहीं करते हैं ये उनका विषय है।

आर सी पी सिंह को बीजेपी से बातचीत के लिए नामित किया गया है
दरअसल उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) ने अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि निषाद पार्टी के साथ सीटों के तालमेल होने और उसके ऐलान के बाद अब जेडीयू ने भी बीजेपी पर दबाव बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी के तहत जेडीयू की यूपी चुनाव को लेकर दिल्ली में हाल ही में एक अहम बैठक सम्पन्न हुई जिसमें जेडीयू कोटे से केंद्रीय मंत्री आर सी पी सिंह को बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत के करने के लिए नामित किया गया है।












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