'गोद में लेते ही लगा मेरा बच्चा है', थानेदार की पत्नी ने बताया- ब्रेस्ट फीडिंग से कैसे लावारिस बच्ची को बचाया
ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के एसएचओ विनोद कुमार सिंह ने कहा, ''20 दिसंबर को लवारिस बच्ची हमें केवल कपड़े के टुकड़े में लिपटी मिली। उसकी हालत काफी क्रिटिकल थी। हम उसे पुलिस स्टेशन ले आए।''

ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के एसएचओ विनोद कुमार सिंह की पत्नी ज्योति सिंह इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने अच्छे काम को लेकर चर्चा में हैं। पिछले हफ्ते ग्रेटर नोएडा पुलिस को झाड़ियों में नवजात बच्ची झाड़ियों में पड़ी मिली थी। थानेदाार की पत्नी ज्योति सिंह ने बच्ची को ब्रेस्ट फीडिंग कराकर उसकी जान बचाई है। एसएचओ की पत्नी ज्योति सिंह ने बताया, "बच्ची को शारदा अस्पताल के पास झाड़ी में किसी ने फेंक दिया था। बच्ची को भूख लगी थी जिसके बाद मैंने उसे ब्रेस्ट फीडिंग कराया और अब उसकी हालत पहले से बेहतर है।'' 20 दिसंबर को बच्ची पुलिस को मिला था।

'पैर टूटा था, ठंड में पड़ थी, मैंने गोद में लेकर अपना दूध पिलाया'
नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के एसएचओ की पत्नी ज्योति सिंह ने कहा, "मैंने उसे अपनी गोद में ले लिया और ऐसा लगा जैसे मैं अपने बच्चे को गोद में ले रही हूं।" ज्योति ने कहा कि वह ठंड और भूख के मारे रोई जा रही थी, मैंने उसे अपनी गोद में लिया लेकिन वह चुप नहीं हो रही थी। वह भूखी थी, उसके छोटे से बाएं पैर में फ्रैक्चर हो गया था और एक झाड़ी के अंदर कई घंटों की सर्द रात में भी वह जिंदा थी, ये हमसब के लिए चौंकाने वाला था।''

बच्ची अभी भी ICU में है एडिमट
ज्योति सिंह ने कहा, 'इतने कड़ाके की ठंड में बच्ची के शरीर पर बस एक कपड़ा का टुकड़ा था। कपड़े के एक टुकड़े के सिवा कुछ भी नहीं था बच्ची के शरीर पर। बच्ची अपने आप में एक फाइटर है।' बता दें कि बच्ची फिलहाल ग्रेटर नोएडा में सरकारी आयुर्विज्ञान संस्थान के आईसीयू में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। बच्ची को पहले कैलाश अस्पताल ले जाया गया था। यहां प्राथमिक उपचार के बाद बाल कल्याण समिति के दिशा-निर्देशों के तहत उसे जिम्स में भर्ती कराया गया।
शुरुआत में पता चला था कि बच्ची को पीलिया है और उसके बाएं पैर में फ्रैक्चर हो गया था जब किसी ने शायद उसे झाड़ियों में फेंक दिया था। डॉक्टर ने कहा कि वह पहले से अब ठीक है।

एसएचओ विनोद कुमार सिंह ने क्या कहा?
ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के एसएचओ विनोद कुमार सिंह ने कहा, ''20 दिसंबर को लवारिस बच्ची हमें केवल कपड़े के टुकड़े में लिपटी मिली। उसकी हालत काफी क्रिटिकल थी। हम उसे पुलिस स्टेशन ले आए। पुलिस वालों ने काफी कोशिश की, लेकिन बच्ची की चीख नहीं रूक रही थी। वह भूखी थी। उसे मां की दूध के अलावा और कुछ नहीं चाहिए था। जिसके बाद मैं उसे अपने घर पर ले गया।''

'मेरे पति ने मुझसे पूछा क्या मैं उसे दूध पिला सकती हूं...'
ज्योति ने टीओआई को बताया, ''मेरे पति (SHO) मेरे पास आए और पूछा कि क्या मैं बच्ची दूध पिला सकती हूं। पैर की हड्डी टूट जाने के कारण उसे बहुत दर्द हो रहा था। उस वक्त उन्हें सिर्फ मां के दूध की जरूरत थी। हालांकि मैं डरी हुई थी, लेकिन मैंने उसे अपना दूध पिलाने का फैसला किया। मैंने उसे शांत किया और वह सो गई। अस्पताल ले जाने से पहले वह कुछ घंटों के लिए मेरे साथ थी। मैं उसे फिर से आज देखने वाली हूं। मैंने सुना है कि वह अब एकदम ठीक है।''

कैसी है बच्ची की हालत?
जिम्स की नर्स नेहा कश्यप ने कहा, "डॉक्टर बच्चे की निगरानी कर रहे हैं। उसके शरीर के सारे हिस्से सही से काम कर रहे हैं। उसके बाएं पैर में प्लास्टर किया गया है और उसे कुछ और दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा।" GIMS ICU के बाहर एक महिला कॉन्स्टेबल को तैनात किया गया है।
जीआईएमएस के निदेशक और सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर डॉ राकेश गुप्ता ने कहा, "यह एक चमत्कार है। वह इस कड़ाके की ठंड में भी बची रही। शुक्र है कि वह ठीक से सांस ले रही है।" पुलिस ने परिवार का पता लगाने के लिए एक टीम बनाई है। जिस इलाके से बच्ची को बचाया गया, वहां सीसीटीवी कैमरे है या नहीं।












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