गोमती रिवरफ्रंट घोटाला: यूपी, बंगाल और राजस्थान के 40 ठिकानों पर CBI की छापेमारी
लखनऊ, 5 जुलाई: केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने गोमती रिवरफ्रंट परियोजना की जांच तेज कर दी है। जिस वजह से सोमवार सुबह उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बंगाल के कई शहरों में इसको लेकर छापेमारी की गई। वैसे तो इस परियोजना को समाजवादी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है, लेकिन बीजेपी की सरकार आते ही इसमें घोटाले का शक जताया गया। जिसके बाद सीबीआई ने कई सरकारी अधिकारियों और अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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जानकारी के मुताबिक यूपी, राजस्थान, बंगाल में 40 जगहों पर सीबीआई की टीम ने छापे मारे। जिसमें लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, रायबरेली आदि शामिल हैं। इस मामले में शुक्रवार को ही 190 लोगों पर केस दर्ज किया गया था। सीबीआई ने अभी तक मामले में कोई अधिकारिक बयान नहीं जारी किया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि इस छापेमारी में उसके हाथ कुछ बड़े सबूत लग सकते हैं।
ऐसे समझें पूरा मामला
दरअसल गोमती नदी की गंदगी से लखनऊ वाले परेशान थे। जब समाजवादी पार्टी की सरकार आई, तो उन्होंने इसे मुंबई के मरीन ड्राइव जैसा लुक देने का सोचा। इसी के लिए रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट शुरू किया। आरोपों के मुताबिक सपा सरकार ने उस वक्त 1513 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। जिसमें से 1437 करोड़ रुपये जारी भी हो गए, लेकिन काम सिर्फ 60 प्रतिशत ही हुआ। ऐसे में देखा जाए तो टेंडर लेने वाली कंपनियों ने 95 प्रतिशत राशि तो खर्च कर दी, लेकिन वो प्रोजेक्ट ढंग से पूरा नहीं हुआ।
रिटायर जज कर चुके हैं जांच
2017 में ही योगी सरकार ने एक न्यायिक आयोग गठित कर इसकी जांच के आदेश दिए थे। जिसकी अध्यक्षता रिटायर जज आलोक कुमार सिंह ने की। जांच में पाया गया कि पूरे प्रोजेक्ट में करीब 800 टेंडर निकाले गए थे। जिसमें कई खामियां थीं। इसी के आधार पर राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की, जिसे केंद्र ने मंजूर कर दिया। इसके बाद से सीबीआई मामले की जांच कर रही है।












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