गंगा एक्सप्रेस वे या BJP के लिए "पॉलिटिकल एक्सप्रेस वे", जानिए इससे जुड़ी 5 अहम बातें

लखनऊ/शाहजहांपुर, 18 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने में जुटे हुए हैं। पिछले महीने ही मोदी ने सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का शुभारंभ कर पूरे पूर्वांचल का सियासी समीकरण साधने की कवायद की थी उसी तरह अब देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेस वे की नींव आज शाहजहांपुर में रखेंगे। दरअसल इस एक्सप्रेस वे के अपने सियासी मायने भी है जिसके तहत ये बीजेपी के लिए पॉलिटिकल एक्सप्रेस वे साबित हो सकता है। गंगा एक्सप्रेस वे के बहाने बीजेपी प्रयागराज से लेकर मेरठ तक का समीकरण एक साथ साधने में जुटी हुई है।

12 जिलों में 55 सीटें अभी बीजेपी के पास

12 जिलों में 55 सीटें अभी बीजेपी के पास

दरअसल यूपी में एक्सप्रेस वे के बहाने सियासी समीकरण साधने की कवायद पहले से भी चलती रही है। अखिलेश ने अपने समय में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे बनाया तो उससे पहले मायावती ने अपनी सरकार के दौरान आगरा से नोएडा तक यमुना एक्सप्रेस बनाकर अपने इलाके को साधने का प्रयास किया था। बहरहाल जिस गंगा एक्सप्रेस वे का मोदी आज शिलान्यास करेंगे वो यूपी के जिन 12 जिलों से होकर गुजरेगा उसमें 76 विधानसभा सीटें आतीं हैं। इनमें से अभी 55 सीटें बीजेपी के पास हैं जबकि 9 पर सपा और 4 सीटें बसपा के पास हैं। 3 कांग्रेस और 5 अन्य के पास हैं।

किसान आंदोलन से हुए नुकसान की भरपाई की कोशिश

किसान आंदोलन से हुए नुकसान की भरपाई की कोशिश

किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी यूपी में भाजपा बैकफुट पर है। तीनों कृषि कानून वापस लेकर केंद्र सरकार ने सियासी समीकरण को साधने की कोशिश जरूर की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसके बाद भी पश्चिमी यूपी की 136 सीटों में से 60 से ज्यादा सीटों पर असर पड़ेगा। योगी के आने के बाद से पूर्वांचल में सड़कों का जाल बिछ रहा है। जिसमें गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, प्रयागराज लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे हैं। भले ही बाकियों का काम पूरा नहीं हुआ है, लेकिन योगी लौटे तो संभावना है कि यह काम पूरा होगा। ऐसे में भाजपा को फायदा मिल सकता है।

प्रयागराज से मेरठ को जोड़ेगा गंगा एक्सप्रेस वे

प्रयागराज से मेरठ को जोड़ेगा गंगा एक्सप्रेस वे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाहजहांपुर में 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे की नींव रखेंगे। वह एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। 36 हजार करोड़ की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी यूपी को पूर्वांचल से जोड़ेगा। मेरठ से 12 जिलों से होता हुआ प्रयागराज में खत्म होगा। इसके जरिए मेरठ से प्रयागराज तक की जो दूरी 8-9 घंटे में पूरी होती है वह साढ़े 6 घंटे में पूरी हो जाएगी। पीएम दोपहर 1 बजे शाजहांपुर पहुंचेंगे। सभा में एक लाख लोगों के आने की संभावना है। मैदान में 60 हजार कुर्सियां रखी गई हैं। इसके अलावा, 40 हजार लोगों के खड़े होने की व्यवस्था की गई है। पीएम की सुरक्षा में साढ़े 3 हजार सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं।

 मायावती व अखिलेश भी कर चुके हैं एक्सप्रेस वे की सियासत

मायावती व अखिलेश भी कर चुके हैं एक्सप्रेस वे की सियासत

ऐसा नहीं है कि केवल बीजेपी ही एक्सप्रेस वे के बहाने सियासी फायदा तलाशने में जुटी हुई है। इससे पहले 2012 से 2017 के बीच पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने लखनऊ से लेकर आगरा एक्सप्रेस वे का निर्माण कराकर अपने इलाके को साधने का प्रयास किया था। हालांकि सपा सरकार का दावा रहता है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का शिलान्यास भी उसने अपनी ही सरकार के दौरान कर दिया था जिसका सियासी लाभ बीजेपी ले गई। इसी तरह अखिलेश से पहले मायावती ने अपने कार्यकाल के आगरा से लेकर नोएडा तक युमना एक्सप्रेस वे बनवाया था। इसके बहाने उन्होंने जाटव बाहुल्य इलाके में अपनी इमेज चमकाने की कोशिश की थी। हालांकि मायावती को इस एक्सप्रेस वे का उद्घाटन करने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ था। अखिलेश यादव ने सरकार बनने के बाद इसका शुभारंभ किया था।

बीजेपी का जायका बिगाड़ने की कोशिश में अखिलेश

बीजेपी का जायका बिगाड़ने की कोशिश में अखिलेश

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्य की मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान शुरू की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार दोपहर करीब 1 बजे उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास करेंगे। जिसको लेकर अखिलेश यादव ने दावा किया है कि मायावती ने गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार आपस में टकराने लगी है। ऐसे कई उदाहरण हैं जहां यह उद्धृत किया जा सकता है कि डबल इंजन टकरा रहे हैं। राज्य को क्या लाभ हुआ? राज्य में निवेश कहां है? राज्य को कितना मिला है केंद्र द्वारा योजनाओं में सहयोग किया गया है?"

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