इलाहाबाद: फूलपुर विधानसभा में फिर से हावी होगी कुर्मी बाहुल्य राजनीति!
फूलपुर में कुल 3,77,867 मतदाता हैं। सबसे ज्यादा 60 हजार मतदाता यादव हैं। जबकि दूसरे नंबर पर 50 हजार पटेल मतदाता हैं। फूलपुर की लड़ाई में तीनों बड़े दल ही हावी हैं।
इलाहाबाद। देश को पहला प्रधानमंत्री देने वाला क्षेत्र फूलपुर कुर्मी बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है और इस बिरादरी का रुख ही यहां हार जीत का समीकरण तय करता रहा है। हालांकि लोकसभा क्षेत्र के मुकाबले फूलपुर विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक समीकरण को अलग तरह से देखता है। वहीं इस चुनाव में भी पटेल मतदाता की संख्या दूसरे स्थान पर आती है। जिसे राजनीतिक दल लुभाने का पूरा प्रयास करते हैं।

क्या कहते हैं यहां के जातिगत आंकड़े?
फूलपुर में कुल 3,77,867 मतदाता हैं। सबसे ज्यादा 60 हजार मतदाता यादव हैं। जबकि दूसरे नंबर पर 50 हजार पटेल मतदाता हैं। वहीं तीसरे नंबर पर 40 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं। इस इलाके में 15 हजार के लगभग वैश्य मतदाता हैं तो 12 हजार ठाकुर और 20 से 25 हजार के बीच में मुस्लिम मतदाता हैं। लगभग 15 हजार बिंद बिरादरी है तो 15 हजार के लगभग पाल हैं। दलित मतदाताओं की संख्या भी यहां लगभग 20 हजार है। कायस्थ और अन्य जातियों के लगभग पांच हजार मतदाता हैं।

यहां की लड़ाई है बड़ी
फूलपुर की लड़ाई में तीनों बड़े दल ही हावी हैं। बसपा और सपा के लिए इस बार भाजपा यहां सिरदर्द साबित होगी। इस वक्त भाजपा उम्मीदवार ही यहां सबसे मजबूत प्रत्याशी बनकर उभरे हैं। सपा ने विधायक रहे सईद का टिकट काट मंसूर आलम को मैदान में उतारा है। बसपा ने मुस्लिम समीकरण के लिए मसरूर शेख को प्रत्याशी बनाया है लेकिन यहां सबसे तगड़ा दांव भाजपा ने चला है। भाजपा ने जातीय गणित को साधने के लिए पूर्व विधायक प्रवीण पटेल को टिकट दिया गया है।

जातीय गणित को साधने के लिए खेला गया है दांव
ऐसे में यहां की चुनावी लड़ाई बेहद अहम बन जाती है। जहां फाफामऊ सीट पर जनता किसी भी विधायक को दुबारा नहीं जिताती तो वहीं ये सीट ऐसी है जिस पर कुर्मी सत्ती के शिखर पर ही रहे हैं। इन चुनावी आंकड़ों से तो यही लगता है कि कुर्मी एक बार फिर सत्ता तक पहुंचने का माद्दा रखते हैं!












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