यूपी में बाढ़: हर साल उजड़ना है लोगों की नियति, कुछ नहीं करते हाकिम!

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बहराइच। बहिया मा धन धान गंवावा, अंसुवन मा जिंदगानी पावा। हाकिम चुप्पी साधे बइठे, फिर से दु:ख कै दिन है आवा। कृपा करौ भगवान सहारा तुमरै है, जीवन कै सरकार सहारा तुमरै है। कुछ यही हालात है जिले के बाढ़ क्षेत्रों के। महसी तहसील क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका दो दिन से मुसीबत का सबब बनी हुई है लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं ग्रामीण बेहाल हैं। जो ग्रामीण बाढ़ के इलाकों से निकल रहे हैं। उनको नए सिरे से गृहस्थी बसाने के लिए जमीन नहीं मिल रही है। सड़क के किनारे डेरा डाले हुए हैं। खुले आसमान तले गुजर-बसर करना सभी की मजबूरी बन गई है। परेशान ग्रामीणों का कहना है कि हर साल उजड़ना और बसना नियति है। हाकिम कोई इंतजाम कर नहीं रहे हैं। ऐसे में जब तब जिंदगी रहेगी, संघर्ष करेंगे।

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घाघरा नदी का कहर, बाढ़ बनी मुसीबत

घाघरा नदी का कहर, बाढ़ बनी मुसीबत

घाघरा नदी का कहर एक बार फिर बहराइच के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बरप रहा है। दो दिन से खतरे के निशान से ऊपर पहुंची घाघरा नदी की लहरें महसी के इलाके में मुसीबत का सबब बनी हुई हैं। अब तक 20 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इनमें गोलागंज, भागवतपुरवा, कायमपुर, जरमापुर, बरुआ कोड़र और फक्कड़पुरवा गांव की स्थिति काफी बदहाल है। इन गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। यहां पर नाव की व्यवस्था नहीं है। जिन लोगों के पास निजी नावें हैं, वह जैसे-तैसे अपने परिवार को निकाल रहे हैं। गोलागंज निवासी बालकराम जान जोखिम में डालकर अपनी गृहस्थी समेट कर बेलहा-बेहरौली तटबंध के निकट किसानगंज के पास सड़क के किनारे खुले आसमान तले गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि हर साल यही स्थिति बनती है। अधिकारियों को सूचना दी जाती है। लेकिन मदद नहीं मिलती। इस बार भी बिना मदद के परिवार और गृहस्थी को बाहर लाए।

हर साल उजड़ जाती है गृहस्थी

हर साल उजड़ जाती है गृहस्थी

वहीं भागवतपुरवा निवासी शिवकुमार पड़ोसी की नाव से गृहस्थी का सामान किनारे तक लाए। फिर ठेलिया का इंतजाम कर बेलहा-बेहरौली तटबंध पर डेरा डाला है। बोले कि जिला प्रशासन की नाव अब तक नहीं पहुंची है। गांव में 150 से अधिक लोग फंसे हुए हैं। यही हालत अन्य ग्रामीणों का है। जरमापुर निवासी हनुमान, रज्जब, सोनी और निर्मला का कहना है कि एकबार फिर जीवन भिखारियों की तरह हो गया है। अब तक मदद नहीं मिली है। आगे मदद मिलेगी या नहीं, पता नहीं। जैसे-तैसे जिंदगी बचा रहे हैं। जब तक संघर्ष कर पाएंगे, करेंगे।

बाढ़ का जायजा ले रहे थे डीएम व एसपी

बाढ़ का जायजा ले रहे थे डीएम व एसपी

हर बार अधिकारी आते है डायरी में नोट करवाते है और चले जाते है फिर सब भूल जाते है। जहां तक सड़क अभी बची है वहां तक ही आते है। अभी तक राहत सामग्री भी कुछ नहीं मिली है। इस समय हम लोगों को सामग्री की जरूरत है लेकिन कुछ नही। जब यहां अधिकारी आते हैं तो बांध तक ही रह जाते हैं, हम लोगों तक आते ही नहीं हैं। बांध तक ही बड़े अधिकारी आते हैं और वहीं से हमारा नाम काट देते हैं। इस समय यहां मेरा घर बना है, इस समय नहीं जांच करने आ रहे हैं आजकल में कब कट जाए मेरा घर ये नहीं पता। बाद में कहते हैं, मिल जाएगा। ये सारी बाते महसी इलाके के गोलागंज गांव निवासी बाढ़ पीड़ित तब कह रहे थे जब कुछ ही दूरी पर डीएम बंधे पर बाढ़ का जायजा ले रहे थे।

महसी तहसील के कई गांव बाढ़ की चपेट में

महसी तहसील के कई गांव बाढ़ की चपेट में

तराई में वर्षा थम गई है लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर रुक-रुक कर बादल बरस रहे हैं जिसके चलते घाघरा नदी के जलस्तर में उतार चढ़ाव चल रहा है। महसी तहसील क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। गुरुवार को डीएम अजयदीप सिंह व एसपी सुनील सक्सेना बाढ़ क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे। गोलागंज गांव में पीड़ितों से मिल ही रहे थे कि तभी बसंत लाल नाम के ग्रामीण ने तेज आवाज में कहा कि यहां हर साल अधिकारी आते है और घूमकर चले जाते हैं लेकिन कोई समस्या का समाधान नहीं करते है। मीडिया के सामने अपनी बातें रखते रखते बसंत लाल के आंखों में आंसू आ गए। बंसतलाल के दुख-दर्द के बारे में जब बाढ़ का जायजा ले रहे डीएम से मीडिया ने अवगत कराया तो डीएम ने कहा कि इस बार मै हूं और इनकी सहायता जरूर होगी। पिछली बार क्या हुआ उसके बारे में कुछ नही कहूगा जिससे अब बसंतलाल को सहायता की उम्मीद बंध गई।

मार्ग पर चल रहा पानी

मार्ग पर चल रहा पानी

कायमपुर - बेलहा बेहरौली तटबंध सम्पर्क मार्ग पर पानी बह रहा है। यहां पर प्रशासन के दावे हैं कि ग्रामीणों को नावें दिलाई गई हैं लेकिन यहां पर ग्रामीण स्वयं अपने जान को जोखिम में डालते हुए पुल को पार करते हुए नजर आए।

लोगों की आंखों से आंसुओं की बरसात

लोगों की आंखों से आंसुओं की बरसात

महसी क्षेत्र के गोलागंज, प्रधानपुरवा व जर्मापुर गांव का मंजर दिल दहला देनेवाला है। यहां के लोग अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई से बनवाए गए मकानों को खुद अपने ही हाथों से तोड़ रहे हैं। इनके शरीर से पसीना निकलने के बजाए आंखों से आंसुओं की बरसात हो रही है। कभी एक-एक पाई जोड़कर पक्का मकान बनवाया था, जिसे उन्हें अपने ही हाथों उजाड़ना पड़ रहा है। यह कटान पीड़ित अपने बच्चों के अंधकारमय होते भविष्य को देखकर बेहद चिंतित हैं।

बर्बाद हो रहीं खरीफ की फसलें

बर्बाद हो रहीं खरीफ की फसलें

घाघरा के जलस्तर स्थिर होने से निचले इलाकों में पानी भरा हुआ है । खड़ी फसलें जलमग्न हैं । जिससे ग्रामीणों के चेहरे मुरझा गये हैं । गोलागंज, कायमपुर, पिपरी, कोरिनपुरवा, नगेशरपुरवा में बाढ़ का पानी रुक जाने से धान,मक्का ,गन्ना व मेंथा आदि फसलें नष्ट हो रही हैं।

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English summary
Flood victims of Bahraich expressed their grief.
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