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जानिए कौन हैं प्रख्यात हिंदी लेखक रांगेय राघव जिनको लेकर योगी ने उठाया ये बड़ा कदम

लखनऊ, 06 अगस्त: उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने आजमगढ़ में चार अगस्त को आगामी महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में प्रसिद्ध हिन्दी लेखक रांगेय राघव के नाम पर एक शोध संस्थान स्थापित करने की घोषणा की थी। योगी के इस कदम के कई मायने निकाले जा रहे हैं। पहली बार किसी सरकार ने प्रख्यात हिन्दी लेखक रांगेय राघव को इस तरह का सम्मान देने का काम किया है। योगी के इस कदम ने सामाजिक-राजनीतिक हलकों में उत्सुकता पैदा कर दी है। हालांकि कुछ राजनीतिक विश्लेषक सरकार के इस कदम को बीजेपी की दक्षिण की राजनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ

हिन्दी के प्रख्यात लेखक रहे हैं रांगेय राघव

दरअसल रांगेय राघव एक बहुप्रतीक्षित हिंदी लेखक हैं जो अपने उपन्यासों, कहानियों, निबंधों और हिंदी में लिखे यात्रा वृत्तांतों के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में से एक 'कब तक पुकार' को एक लोकप्रिय टीवी धारावाहिक में बदल दिया गया था। 1980 के दशक में दूरदर्शन के लिए पंकज कपूर और पल्लवी जोशी ने अपना अभिनय दिया था। दरअसल 1962 में 39 वर्ष की छोटी उम्र में राघव की कैंसर से मृत्यु हो गई थी।

तमिलानाडु में रांगेय की जबरदस्त साख

हालांकि योगी के इस कदम के पीछे दो वजहें मानते हैं। एक तो वह तमिलियन थे। उनका जन्म 17 जनवरी, 1923 को आगरा में हुआ था। उनका मूल नाम तिरुमल्लई नंबकम वीर राघव आचार्य हुआ करता था। दूसरा, उन्होंने 11वीं शताब्दी के संत गुरु गोरखनाथ पर पीएचडी की, जिनके नाम पर गोरखपुर स्थित मठ का नाम रखा गया। योगी इस गोरक्ष पीठ के मुख्य पुजारी हैं। राघव का परिवार आंध्र प्रदेश के तिरुपति के रहने वाले थे। राजनीतिक पर्यवेक्षक बताते हैं कि राघव की तमिल साख द्रमुक के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार के विरोध की पृष्ठभूमि के खिलाफ बहुत प्रासंगिक है।

दक्षिण में रांगेय राघव की साख का इस्तेमाल करना चाहती है बीजेपी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में तमिलनाडु में अंग्रेजी की जगह हिंदी को दूसरी आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किए जाने की वकालत की थी। हालांकि, शाह के बयान का तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने जोरदार विरोध किया था। तब उन्होंने कहा था कि तमिल लोगों को अभी भी दिवंगत पार्टी के संरक्षक एम करुणानिधि द्वारा किए गए हिंदी विरोधी आंदोलन याद है। वह इसे हरगिज पूरा होने नहीं देंगे।

रांगेय राघेव की रचनाएं अविश्वसनीय हैं

लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रोफेसर रविकांत ने कहा, "वह अपने समय के बेहतरीन हिंदी लेखकों में से एक हैं।" उन्होंने कहा कि राघव अपनी तमिल पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर कुछ अविश्वसनीय रचनाओं को हिंदी में लिखने का काम किया है। उन्होंने कहा, "उन्हें हिंदी भाषी क्षेत्र में योग्य सम्मान देकर सीएम योगी ने तमिलनाडु सरकार को हिंदी के विरोध पर एक सूक्ष्म संदेश दिया होगा।"

कई बड़े पुरस्कारों से नवाजे गए थे रांगेय राघव

रांगेय राघव को हिंदुस्तान अकादमी पुरस्कार, डालमिया पुरस्कार, राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार और मरणोपरांत महात्मा गांधी पुरस्कार सहित कई पुरस्कार मिले। राघव की 'नाथ संप्रदाय' के संस्थापक के रूप में माने जाने वाले गुरु गोरखनाथ पर शोध किए जाने को भी काफी रोचक करार दिया है। पूर्वी यूपी क्षेत्र में उनके (गुरु गोरखनाथ) प्रभाव से कोई इनकार नहीं कर सकता। साथ ही सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान को भी व्यापक नजरिए से देखा जाना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गुरु गोरखनाथ पर राघव के शोध का पहलू व्यापक रूप से प्रबल होगा। विभिन्न विषयों को लिया जा सकता है।

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