तीन तलाक पर बोले पूर्व डीआईजी, यह इस्लाम का हिस्सा नहीं
न तलाक की बहस में आगरा पीएसी के पूर्व डीआईजी वजीह अहमद खुलकर सामने आ गए हैं। इस मौके पर उन्होंने बोलते हुए कहा कि तीन तलाक इस्लाम का हिस्सा नही है।
बुलंदशहर। तीन तलाक की बहस में आगरा पीएसी के पूर्व डीआईजी वजीह अहमद खुलकर सामने आ गए हैं। बता दें कि वजीह अहमद मुस्लिम महिलाओं को दिए जाने वाले तीन तलाक के खिलाफ हैं और वो पहले भी मुस्लिम पर्सनल लॉ से इस मामले मे अपील कर चुके हैं। अहमद का कहना है कि तीन तलाक पर इस्लामिक तरीके से पूरी तरह रोक लगाई जानी चाहिए, ये साफ तौर से महिलाओं के खिलाफ है।

इस्लाम का हिस्सा नहीं तीन तलाक
पूर्व डीआईजी वजीह अहमद की माने तो वीआरएस लेने के बाद मुसलमानो के बीच फैली खराबियां दूर करेंगे। इसकी शुरूआत तलाकशुदा का फिर से निकाह करने की पहल से की है। उन्होंने इमदादे मजलूमीन के नाम से वेबसाइट बनाई है। इस पर आवेदन करने वाली महिलाओं के लिए अच्छे रिश्ते तलाश कर शादी कराएगें। इस मौके पर उन्होंने बोलते हुए कहा कि तीन तलाक इस्लाम का हिस्सा नही है।

महिलाओं को न्याय दिलाने के छोड़ी पुलिस की नौकरी
बता दे कि वजीह अहमद मुस्लिम महिलाओं को दिए जाने वाले तीन तलाक के खिलाफ हैं और वो पहले भी मुस्लिम पर्सनल लॉ से इस मामले मे अपील कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन से बात करनी चाही तो उनके नीचे काम करने वाले नुमाइंदों ने उनकी बात नहीं होने दी। हालांकि जब बा-मुश्किल उनकी बात चेयरमैन से हुईं तो उन्होंने उन्हें पुलिस की नौकरी छोड़ मैदान में आने की बात कही। वजीह अहमद अपनी पुलिस की नौकरी छोड़ तीन तलाक के खिलाफ मुहीम चला रहे हैं। जबकि वजीह अहमद ने एक ऐसा एनजीओ भी बनाया है जो तलाक शुदा या फिर विधवा महिलाओं की शादी कराएगा।

इससे इस्लाम बदनाम हो रहा है
पूर्व डीआईजी वजीह अहमद संगठन के ही काम से बुलन्दशहर पहुंचे थे। जहाँ उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को जागरूक होने की बात कही। साथ ही उन्होंने तीन तलाक को भी साफ़ तौर से गलत बताया। उन्होंने कहा कि कुरान मे अल्लाह ने तलाक का जो तरीका बताया हैं, उस हिसाब से तलाक हो ही नहीं सकता। उसके लिए कड़ी व्यवस्था दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन तलाक का मुददा बनाकर इस्लाम को बदनाम और मुस्लमानों को प्रताडित किया जा रहा है।












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