चुनावी शोर के बीच कोई कर रहा मुफ्त की घोषणाएं, कहीं टिकटों की लग रही बोली ?
लखनऊ, 22 जनवरी: उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है। चुनावी चौसर पर हर राजनीतिक दल अब अपना पत्ता धीरे धीरे खोले लगा है। इस रोचक जंग के बीच कुछ दल मुफ्त का एलान करने में जुटे हैं तो सियासी समर में कूदे छोटे छोटे दल अपने खाते में आई सीटों की बोली लगाने में जुटी हुई हैं। रोचक यह है कि सूत्रों पर विश्वास करें तो एक सीट की बोली ढाई करोड़ रुपए तक लग रही है। वहीं दूसरी कुछ सीटों पर तीन चार दावेदार मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं। एक तरह से नीलामी की तर्ज पर बोली लगाई जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ दलों ने तो उम्मीदवारों से टोकन मनी लेकर भी उनको वेटिंग की सूची में डाल रखा है।

रायबरेली को किसने दिलाया था वीआईपी सीट का दर्जा
दरअसल आज के सियासी दौर में वीआईपी सीटों का चलन बढ़ गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कब हुई। 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव हार गईं थीं। बताने वाले बताते हैं कि इंदिरा के पीएम रहते रायबरेली को 24 घंटे बिजली मिलती थी। बाद में इंदिरा को हराने वाले राजनारायण के सामने लोग बिजली शिकायत लेकर पहुंचे तो उन्होंने हाथ खड़ा कर दिया। बाद में यह परिपाटी अखिलेश और मुलायम के समसमय में भी दोहराई जाने लगी।
मुफ्त की घोषणाओं कितना वोट दिलाएंगी
राजनीतिक दलों की ओर से विधानसभा के चुनाव में मुफ्त की घोषणाएं भी की जा रही हैं। कांग्रेस जहां स्कूटी बाटने की बात कह रही है वहीं आप और सपा मुफ्त में बिजली देने का एलान कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पहले थोड़ी बहुत रियायतों और सहूलियतों का एलान किया जाता था लेकिन अब तो मुफ्त में देने की होड़ सी मच गई है। बड़ा सवाल यह है कि को घोषणाएं की जा रहीं हैं क्या उसे सरकार अपने पार्टी फंड से पूरा करेगी। राज्य विद्युत उत्पपदन निगम के पूर्व सीएमडी अभय सारण कपूर कहते हैं कि तात्कालिक तौर पर भले ही इसका फायदा हो लेकिन दूरगामी नतीजे अच्छे होने वाले नहीं हैं। पैसा तो जनता का ही है। इस तरह की घोषणाएं बंद होनी चाहिए।
छोटे दलों की कोटे वाली सीटों की बोली लगनी शुरू
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उत्तर प्रदेश चुनाव का बिगुल बजते ही छोटे छोटे दल सके हो गए हैं। बीजेपी और सपा का छोटे दलों के बीच अभी सीटों का बटवारा भले ही न हुआ हो लेकिन छोटे दलों ने माननीय बनने की चाहत रखने वाले संभावित लोगों से मोलभाव जरूर शुरू कर दिया है। जातीय स्मीकारणों के लिहाज से जीत की अधिक संभावना वाली कुछ सीटों पर तीन चार दावेदार मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं। एक तर्ज से नीलामी की तर्ज पर बोली लागी जा रही है। कुछ दलों ने तो उम्मीदवारों से टोकन मनी लेकर भी उनको वेटिंग की सूची में डाल रखा है।












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