सपा में बाहरियों को मिल रही तरजीह से पार्टी के विधायकों में मची खलबली, अब तलाश रहे नया ठिकाना

लखनऊ, 22 जनवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल अपनी तैयारियों मे जुटे हुए हैं। एक तरफ जहां अखिलेश यादव बाहरियों के लिए रेड कार्पेट बिछा रहे हैं उससे कार्यकर्ताओ में तो उत्साह है लेकिन बाहर से आए हुए प्रभावशाली लोगों को जिस तरह से अंदरखाने तरजीह मिल रही है उससे सिटिग विधायकों में खलबली मची हुई है।समाजवादी पार्टी के सूत्रों की माने तो जिनके जिनके टिकट कटने की आशंका है उन्होंने नए ठौर की तलाश शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बाहरियों की आमद से पार्टी के भीतर जो विषम परस्थिति पैदा हो रही है उसमें पार्टी के विधायक सपा की मुसीबत बढ़ा सकते हैं।

अखिलेश यादव

जलालाबाद के विधायक के इस्तीफे के बाद टिकट कटने की आशंका से घिरे कई विधायक गुणा भाग में जुट गए हैं। एक विधायक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा की पांच साल तक पूरी लगन के साथ पार्टी की सेवा की और चुनावी तैयारियो में जुटे रहे लेकिन अब टिकट किसी दूसरे को दिया जा रहा है। इन परिस्थितियों में हम अपना विकल्प तो तलाशना ही पड़ेगा ।

अभी उत्तर प्रदेश ने समजवादी पार्टिवके 47 विधायक हैं। सपा के टिकट पर सदन में पहुंचे हरदोई के नितिन अग्रवाल और सिरसागंज से विधायक हरिओम यादव बीजेपी में जा चुके हैं। सपा के साथ सुहेलदेव पार्टी का गठबंधन है। उनके पास 4 विधायक हैं। राजभर का दावा है कि सिटिंग विधायकों वाली सीटों के अलावा 10 और सीटें चाहिए। इनमे चार सीटें वह हैं खान वह बीजेपी के साथ गठबंधन में लड़ चुके हैं। इसमें बांसडीह से विधायक और नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी, और शाहगंज से शैलेंद्र यादव ललाई विधायक हैं। वह आजमगढ़ और बलिया की एक एक सित पर भी दावा कर रहे हैं।

वहीं महान दल के केशव देव मौर्य और जनवादी पार्टी के संजय चौहान भी अलग अलग सीटों पर दावा कर रहे हैं। वहीं बीजेपी से आए स्वामी प्रसाद मौर्य, डॉक्टर धर्म सिंह सैनी और दारा सिंह चौहान समेत 14 विधायकों ने सपा की सदस्यता ली है। स्वामी प्रसाद खुद के अलावा बेटे और कुछ करीबियों के लिए टिकट मांग रहे हैं। उनके खास नीरज मौर्य को सपा ने जलालाबाद से टिकट भी से दिया है। इसके विरोध में सपा विधायक शरद वीर सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वह कभी भी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।

अंबेडकर नगर में बीएसपी नेतावों सपा में एंट्री सपा नेताओं कोरास नहीं आ रही हैं। विरोध की वजह से ही अलीगढ़ में भी टिकट बदलना पड़ा है। बताया जा रहा है कि सपा की नई रणनीति पर अब सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सपा की रणनीति है की जो जिताऊ उम्मीदवार है उसे हर हाल में मैदान में उतारा जाएगा। चाहे वो पार्टी के मूल कैडर का हो या दूसरे दलों से आया हो। पार्टी की इस बदली रणनीति के बाद हालाकि कोई खुलकर सामने तो नही आ रहा है लेकिन पिछले पांच साल से सड़क पर संघर्ष करने वाले नेता काफी असहज हैं।

शिवपाल के खेमे में भी हलचलसमाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में शामिल प्रगतिशील समाजवादी पार्टी में भी हलचल दिखाई दे रही है। मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदार और पूर्व विधायक प्रमोद गुप्ता बीजेपी का दामन थामने को तैयार हैं। शिवपाल का साफतौर पर कहा है की उन्होंने करीब 25 लोगों की सूची सौंपी है। जिस उम्मीदवार से अखिलेश यादव संतुष्ट होंगे उसे टिकट मिलेगा। इस परिस्थिति में चुनाव लडने की पूरी तैयारी कर चुके नेता अब दूसरा ठिकान तलाश रहे हैं।

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