कितना सच है यूपी में बढ़ते महिला अत्याचार का दावा! आप भी जानें
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था बड़ा मुद्दा है। ऐसे में तमाम नेता और पार्टियों के स्टार प्रचारक अलग-अलग बयान दे रहे हैं। जानिए क्या है हकीकत!
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में चौथे चरण का मतदान 23 फरवरी को है। इस दौरान हर दल, ये चुनाव जीतना चाहता है। इस चुनाव में कानून व्यवस्था बड़ा मुद्दा है। भारतीय जनता पार्टी सत्ता प्रतिष्ठान समाजवादी पार्टी और इसके मुखिया अखिलेश यादव पर जम कर निशाना साधा रही है। खुद भाजपा के स्टार प्रचारक और पीएम नरेंद्र मोदी एक रैली में कहा था कि शाम होने के बाद बच्चियां, यूपी की सड़कों पर नहीं निकलती। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि यूपी में काम नहीं कारनामा बोलता है।
बसपा सुप्रीमो मायावती भी कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर अखिलेश के घेर रही है। ऐसा नहीं है कि अखिलेश के राज में महिलाओं पर अत्याचार कम नहीं हुए। बुलंदशहर, बदायूं, गैंगरेप के मामले में फंसे गायत्री प्रजापति, ऐसे उदाहरण हैं जो ये साबित करते हैं कि विपक्ष के दावों में दम है लेकिन यहां यह सवाल उठना लाजिम है कि बाकी राज्यों की हालत क्या है?

ये है यूपी का हाल
आंकड़ों की मानें तो अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार कम हुआ है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक 16 फीसदी अत्याचार महिलाओं के कम हुआ। आंकड़ों के अनुसार 2001 में हर 100 बलात्कार के मामलों में से 12.27 यूपी में दर्ज होते थे लेकिन 2015 में यह कम होकर प्रति 100 मामलों 8.73 रह गया है।
इतना ही यूपी में लिंगानुपात प्रति 1,000 898 से बढ़कर 912 हो गया है। अगर हम महिलाओं के खिलाफ सभी अपराधों की बात करें तो पूरे देश के मुकाबले यूपी में 2001- 2015 के बीच 17 फीसदी से कम होकर 14 फीसदी हो गया है। अखिलेश, महिला सुरक्षा पर हो रहे हमले को वुमेन पावर लाइन 1090 को ढाल बनाकर संभाल रहे हैं।

लेकिन यहां है हालत खराब
महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं जो 2001 में 18 लाख थीं वो 2015 में 15.5 लाख हो गया है। हालांकि पूरे देश के मामले में यूपी में 17.5 लाख से 19 लाख के बीच मामले दर्ज किए जाते हैं।
बात अगर भाजपा शासित, मध्य प्रदेश की करें तो यहां 15 साल में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं।

शिवराज के राज में ये हाल!
3 बार से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासन काल के दौरान 2001 में जहां मध्य प्रदेश में 23.14 लाख मामले दर्ज हुए थे वो 2015 में बढ़कर 26.73 लाख हो गए। इतना ही नहीं बलात्कार की संख्या में भी इजाफा हुआ है। साल 2001 में जहां 9.86 लाख महिलाओं के खिलाफ रेप के मामले दर्ज किए गए थे, 2015 में बढ़कर वो 12 लाख हो गए।

यहां तो खुद महिला है सीएम
हालात राजस्थान में भी नहीं सुधरे हैं। यहां 2001 में जहां 33.67 लाख मामले दर्ज थे वो 2015 में घटकर 25.34 लाख तक पहुंच गए। साथ ही 2001 में जहां 3.87 लाख बलात्कार के मामले दर्ज हुए थे वो 2015 में बढ़कर 10.60 लाख मामले हो गए।
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