PICs: जहरीले सांप पकड़ना है इस बनारस के बच्चे का खेल!
'अब हम दोनों को काफी लोग जानने लगे हैं यही नहीं अब तो जब भी दूर-दूर के गांवों में सांपों के निकलने की बात आती है तो लोग हम बाप-बेटे को बुलाया जाता है।'
वाराणसी। बनारस के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में एक 9 साल का बच्चा जो अपने खौफनाक कारनामों के लिए जाना जाता है तो इसे पूरा गांव खतरों के खिलाड़ी के नाम से बुलाता है। ये महज 9 साल का बालक अपने अनोखे अंदाज से जहरीले सांपों को ना सिर्फ पकड़ लेता है बल्कि उन्हें अपने शरीर पर लपेटकर खेलता भी है। इस बच्चे की माने तो ये बालक 2 सालों से सांपों को पकड़ने का काम करता है। यही नहीं जब भी ये बच्चा सांपों को पकड़ लेता है तो उसे देखने वालों का मजमा लग जाता है और हर कोई इसके इस खौफनाक करतब को देखकर अपने दांतों तले उंगलियां दबा लेता है।


पिता ने सिखाई ये कलाबाजी
दरअसल इस बच्चे का नाम जय है जिसकी आयु इस वक्त 9 साल है। इसके पिता का नाम रत्न है जो मिर्जामुराद के ही रहने वाले हैं। रतन ने हमें बताया कि जहां लोग सांपों से परेशान हैं वहां मैंने कोई उपाए किए लेकिन सांपों का सिलसिला नहीं बंद हुआ। जिसके बाद मैंने सांपों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित ले जाकर छोड़ने की कला सीखी और उसके बाद से जब भी हमारे घर में सांप निकलते हम उन्हें पकड़कर उसे दूर दराज ले जाकर छोड़ देते थे। इसके बाद जब मेरा बेटा जय समझने लायक हो गया तो मैंने उसे भी ये कला सीखा दी और अब हम दोनों को काफी लोग जानने लगे हैं यही नहीं अब तो जब भी दूर-दूर के गांवों में सांपों के निकलने की बात आती है तो लोग हम बाप-बेटे को बुलाते हैं और हम जाकर उस सांप को सुरक्षित पकड़कर उसे रिहायसी इलाकों से दूर ले जाकर छोड़ देते हैं।


हजारों सांपों की बचा चुके हैं अब तक जिंदगी
रतन ने OneIndia से बात करते हुए कहा कि इंसानी जीवन में सांपों का महत्व कहीं ज्यादा है और उस पर भी ग्रामीण इलाकों में क्योकि यहीं सांप के होने से चूहे खेतों में नहीं रहते। सांप और मेरी दोस्ती भगवान् की कृपा से हुई है और अब मैंने हजारों की संख्या में सांपों को पकड़कर उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ उनकी जिंदगी बचाई है। रतन बताते हैं कि उन्होंने अब तक कोबरा, अजगर, गेहुंवन, धामिन, जैसे कई प्रजातियों के सांपों को पकड़ा है। यही नहीं कई जहरीले प्रजाति के सांप भी शामिल हैं।

ये बच्चा अकेले ही पकड़ लेता है सांप
9 साल के जय ने बताया कि मैं सांप को तो अकेले भी पकड़ लेता हूं। फिर वो नॉर्मल हो या जहरीला इसमें मुझे जरा भी डर नहीं लगता। ये काम पिछले दो साल से अपने पिता के साथ करता आ रहा हूं। अब तो सांप ही मेरे दोस्त हैं। रतन की पत्नी साधना का कहना है कि पहले डर लगता था। बाप-बेटे में सांपों को बचाने का जुनून है। सुन लेते हैं तो कहीं भी चले जाते हैं। पहली बार जब डब्बे में सांप लेकर घर आए तो मैं डर गई थी और दो दिनों तक खाना तक नहीं खाया था।












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