चंदौली: बीजेपी प्रत्याशी को डीएम ने किया 'पैदल', कोर्ट पहुंचा मामला
कोर्ट में अब मोटर यान अधिनियम की धारा 66 सपठित धारा 182-ए व 2 (26) के तहत डीएम को चुनावी ड्यूटी में किसी प्राइवेट वाहन को चालक समेत कब्जे में लेने के अधिकार पर नई जंग छिड़ गई है।
Uttar Pradesh
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By Arvind Kumar
इलाहाबाद। चुनाव ड्यूटी के नाम पर चार पहिया वाहनों को अधिग्रहण कर लेने का मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है। जिसमें न्यायालय ने डीएम को जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 160 के तहत ऐसा कर सकने का आदेश बरकरार रखा है। हालांकि कोर्ट में अब मोटर यान अधिनियम की धारा 66 सपठित धारा 182-ए और 2 (26) के तहत डीएम को चुनावी ड्यूटी में किसी प्राइवेट वाहन को चालक समेत कब्जे में लेने के अधिकार पर नई जंग छिड़ गई है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की सकलडीहा विधानसभा सीट से बीजेपी ने सूर्यमुनी तिवारी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। सूर्यसूर्यमुनि जिस चार पहिया वाहन से अपना प्रचार प्रसार कर रहे हैं उसे डीएम ने चुनाव ड्यूटी के लिये अधिग्रहित कर लिया है। आरटीओ द्वारा नोटिस भी प्रत्याशी को दे दी गया है। न्यायालय में इस बावत दाखिल दो याचिका में एक को कोर्ट ने खारिज कर दिया है और डीएम की इस पावर को बरकरार रखा है। जबकि दूसरी याचिका में मोटर वाहन साक्ष्य से मामला पलट सकता है।
प्रत्याशी ने बताई इसे सपा की चाल
भाजपा प्रत्याशी सूर्यमुनी तिवारी ने कहा कि समाजवादी पार्टी की यह चाल है। जिससे उनकी गाड़ी का अधिग्रहण चुनाव के लिये किया गया है। जबकि चुनाव प्रचार प्रसार में उनकी सफारी गाड़ी पहले से ही इस्तेमाल हो रही है। एआरटीओ दफ्तर से अधिग्रहण के बावत सूर्यमुनी तिवारी कोर फरमान वाली नोटिस दी गई है। समस्या यह है कि प्रत्याशी का वाहन चला जाने पर वह प्रचार प्रसार कैसे करेगा। इस मामले में पहली याचिका मेरठ के अरविन्द कुमार ने एसयूवी गाड़ी अधिग्रहण करने पर दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने जन प्रतिनिधित्व कानून के अधिकार के तहत अधिग्रहण सही माना और याचिका खारिज कर दी।
चालक समेत अधिग्रहण हुआ वाहन
हाईकोर्ट में दूसरी याचिका भी मेरठ से आई। जिसमे प्राइवेट वाहन को उसके चालक सहित कब्जे में लेने के डीएम की अधिकारिता को चुनौती दी गयी । इसमें याची के वकील ने मोटर यान अधिनियम की धारा 66 सपठित धारा 182-ए व 2 (26) के के प्राविधानों पर विचार करने की दलील दी। इस दौरान चंदौली जिले की सकलडीहा विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी सूर्यमुनी तिवारी की गाड़ी के अधिग्रहण का भी उदाहरण दिया गया। यह मामला अब हाईकोर्ट में गूंजने से जनहित में बड़ा फैसला आने की उम्मीद है ।
सरकार से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने चुनावी दौर में याचिका को गंभीर विषय मानते हुये सरकार से जवाब मांगा है। जवाब मिलने के बाद जिलाधिकारी द्वारा चुनाव के दौरान वाहन को कब्जे में लेने के अधिकारिता पर कोर्ट अपना निर्णय देगी। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहली याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति वी.के.शुक्ला व न्यायमूर्ति संगीता चन्द्रा की खण्डपीठ ने की तो वहीं दूसरी याचिका पर न्यायमूर्ति तरूण अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अभय कुमार की खण्डपीठ ने सुनवाई की।ये भी पढ़ें: BJP के मौजूदा और बागी नेता के बीच जमकर हुआ बवाल, समर्थकों ने एक दूसरे के खिलाफ किया पथराव