नोटबंदी के दौरान सबसे अधिक पैसा जमा करने वाली पार्टी बनी बसपा

नोटबंदी के दौरान सबसे अधिक पैसा जमा करने वाली पार्टी बनी मायावती की बहुजन समाज पार्टी, कई अन्य दलों ने भी कराए बड़ी संख्या में कैश

लखनऊ। नोटबंदी के फैसले के बाद तमाम राजनीतिक दलों ने बड़ी मात्रा में अपना पैसा बैंकों में जमा कराया, लेकिन मायावती की बसपा तमाम पार्टियों से इस मामले में काफी आगे निकल गई। नोटबंदी के 50 दिन के कार्यकाल में मायावती की बसपा ने सबसे अधिक पैसे बैंकों में जमा कराया है। आयकर विभाग और फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट के आंकड़ों में यह बात निकलकर सामने आई है कि बसपा ने नोटबंदी के कार्यकाल में सबसे अधिक पैसा जमा कराया है।

15 दलों के आंकड़े आए सामने

15 दलों के आंकड़े आए सामने

देश की 15 सबसे बड़ी राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पार्टियों ने नोटबंदी के दौरान कुल 167 करोड़ रुपए जमा कराया जिसमें से अकेले बसपा ने 104 करोड़ रुपए बैंक में जमा कराया है, जबकि अन्य 14 दलों ने मिलकर 63 करोड़ रुपए जमा कराए हैं। यह वह नोट थे जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को बैन करने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद देशभर में लोगों ने पुरानी 500 और 1000 रुपए के नोट को बैंक में जमा कराना शुरू किया था।

कुल 15.44 लाख करोड़ जमा हुए नोटबंदी के दौरान

कुल 15.44 लाख करोड़ जमा हुए नोटबंदी के दौरान

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक नोटबंदी के दौरान तकरीबन 15.44 लाख करोड़ रुपए के पुराने नोट बैंक चेस्ट में पहुंचे हैं। सूत्र के अनुसार भारत में तकरीबन 250 राजनीतिक दल रजिस्टर्ड हैं जिसमें अधिकतर सिर्फ कागजों पर दर्ज हैं, इनके द्वारा जमा कराए गए पैसों की जांच बाद में कराई जाएगी। हमारा शुरुआती विश्लेषण उन 6 राष्ट्रीय पार्टियों व 9 क्षेत्रीय दलों द्वारा जमा कराए गए पैसों का है जो अपने क्षेत्र में काफी मजबूत पार्टियां हैं।

भाजपा और कांग्रेस दूसरे नंबर पर

भाजपा और कांग्रेस दूसरे नंबर पर

नाम नहीं बताए जाने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि भाजपा की ओर से कुल 4.75 करोड़ रुपए जबकि कांग्रेस की ओर से कुल 3.2 करोड़ रुपए देश के तमाम हिस्सों से जमा कराए गए हैं। वहीं अन्य दलों पर नजर डालें तो तमाम पार्टियों ने 80 लाख रुपए से तीन करोड़ रुपए तक जमा कराए हैं। जिन दलों को इस लिस्ट में शामिल किया गया है उसमें भाजपा, कांग्रेस आप, एआईएडीएमके, सपा, टीएमसी अहम हैं। वहीं इस लिस्ट से डीएमके, शिवसेना और आरजेडी नहीं शामिल हैं।

इन आंकड़ों से हकीकत सामने नहीं आएगी

इन आंकड़ों से हकीकत सामने नहीं आएगी

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह जानकारी इस बात की पुष्टि नहीं करती है कि राजनीतिक दलों के पास कितना कैश है। उन्होंने हाल ही में केंद्रीय बजट में चुनावी बॉड की भी आलोचना करते हुए कहा कि इससे राजनीति दलों में हो रही फंडिंग में पारदर्शिता नहीं आएगी। मैंने सुना है कि यूपी में एक दल अपने तमाम उम्मीदवारों को पैसा बदलने के लिए भेजा था, ऐसे में इससे यह साफ नहीं हो सकता है कि राजनीतिक दलों के पास इतना ही कैश था।

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