पश्चिमी यूपी में पलायन के मुद्दे से ध्रुवीकरण को धार देगी बीजेपी, अयोध्या और काशी भी एजेंडे में
लखनऊ, 24 जनवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रचार की कमान बीजेपी के चाणक्य अमित शाह के कंधों पर है। अमित शाह ने अपने प्रचार के दौरान इस बात के संकेत भी दे दिए थे। अमित शाह ने कहा था कि कैराना को कश्मीर नहीं बनने देंगे। यानी पश्चिम में बीजेपी का पूरा प्रचार पलायन के मुद्दे के इर्द गिर्द घूमेगा। रही सही कसर काशी और अयोध्या के एजेंडे से पूरी की जाएगी। बीजेपी के सामने इस बात का दबाव हमेशा रहेगा कि वह पिछली बार की तरह ही पश्चिम में अपना प्रदर्शन दोहराए ताकि मिशन 300 प्लस का अभियान सफल हो सके।

दरअसल कैरान के पलायन के मुद्दे से बीजेपी के बार फिर मुजफ्फरनगर के दंगे की आग को हवा देना चाहती है। बीजेपी के रणनीतिकारों के मुताबिक बीजेपी का चुनाव प्रचार का रंग हर चरण के साथ बदलता चला जायेगा। पहले चरण में पलायन के मुद्दा तो अंतिम चरण में पूर्वांचल में माफियाराज पर वार और काशी विश्वनाथ कारीडोर को भुनाने का प्रयास किया जाएगा।
बीजेपी उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार सरकार बनने का 33 सालों का रिकार्ड तोड़ना चाहती है। वहीं 2024 में लोकसभा की बिसात बिछाने के लिए बीजेपी अपने वोट प्रतिशत को अधिकतम स्तर 50 से 60 प्रतिशत पर ले जाना चाहती है। वैसे तो बीजेपी योगी और मोदी सरकार के काम के बूते मिशन 2022 की रह आसान मानकर चल रही थी लेकिन बीते दिनों पिछड़े वर्ग के नेताओं के साथ छोड़ने की वजह से लड़ाई में ट्विस्ट आ गया है।
इस बीच बीजेपी की निगाह सपा और आरएलडी की सूची पर भी है जिसमे कई दागी चेहरों को मौका देने से बीजेपी के पास मौका मिल गया है। इस मुद्दे कों लेकर वह लगातार गठबंधन पर हल्ला बोल रही है। पहले और दूसरे चरण में बीजेपी पलायन और कृष्ण जन्मभूमि पर फोकस करेगी। इसके बाद तीसरे से पांचवे चरण में बीजेपी के चुनाव प्रचार के केंद्र में राष्ट्रवाद और एक्सप्रेस वे रहेंगे जबकि अंतिम दो दौर में माफिया पर वार और काशी विश्वनाथ कारीडोर को भुनाने का प्रयास करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जिसने केंद्र की ओर से निरस्त किए गए कृषि कानूनों पर व्यापक विरोध देखा है। भाजपा के लिए कुल 403 में से 300 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य हासिल करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा की पहले फेज में उसे सफलता मिले। पहले चरण में शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मथुरा, आगरा और अलीगढ़ जिले की 58 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। इन 58 सीटों पर 2017 में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने दो-दो सीटें जीती थीं और राष्ट्रीय लोक दल को एक सीट मिली थी।
किसान आंदोलन के अलावा, कैराना से एक समुदाय के 'पलायन', गन्ने की कीमत और भुगतान, और मथुरा में भगवान कृष्ण के मंदिर के मुद्दों को विभिन्न दलों द्वारा अभियान में प्रमुखता से शामिल किए जाने की संभावना है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी समेत सभी विपक्षी दलों ने किसानों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी है, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा का दावा है कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।












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