जीते हुए विधायकों को पार्टी में शामिल कर इतिहास बदलने की कोशिश में बीजेपी, जानिए पूरा गेमप्लान
लखनऊ, 26 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी जीते हुए विधायकों को पार्टी में शामिल कर उन सीटों का इतिहास बदलने की कवायद में जुटी हुई है। बीजेपी अपनी इस रणनीति पर चलते हुए कई विधायकों को पार्टी में शामिल कर चुकी है। बीजेपी की कोशिश है कि जिन सीटों पर बीजेपी कभी नहीं जीती उनका इतिहास बदला जाए और बीजेपी का परचम लहराया जाए। इसके लिए बीजेपी अब उन विधायकों को अपने पाले में लाने में जुटी है। इसके तहत बीजेपी अब तक चार अहम विधायकों को पार्टी में ला चुकी है और कई और चेहरे हैं जो आने की कतार में लगे हुए हैं।

रायबरेली सदर सीट से विधायक कांग्रेस एमएलए अदिति सिंह
रायबरेली सदर से कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गईं। यूपी बीजेपी प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और सिंह कार्यक्रम स्थल पर पार्टी में शामिल हो गए। इस कदम को कांग्रेस पार्टी के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है, जो 2022 के यूपी चुनावों से पहले राज्य में अपने खोए हुए राजनीतिक आधार को फिर से हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही है। रायबरेली सीट वह जगह है जहां करीब तीन दशक से अदिति सिंह के परिवार का दबदबा है. उनके पिता, स्वर्गीय अखिलेश सिंह, कांग्रेस के लिए 1993 से 2007 तक कांग्रेस के विधायक थे, 2007 में निर्दलीय के रूप में जीतने से पहले कांग्रेस ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। अदिति ने 2017 में यह सीट जीतकर पदभार संभाला था।

गाजीपुर सैदपुर सीट से सपा विधायक सुभास पासी
बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के विधायक सुभाष पासी के पार्टी में शामिल कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। गाजीपुर की सैदपुर विधानसभा सीट से विधायक पासी बीजेपी में शामिल हो गए। इससे कुछ ही दिन पहले समाजवादी पार्टी ने पासी की पत्नी को एसपी महिला सभा का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त था लेकिन उनका बीजेपी में आना सपा के लिए सैदपुर सीट पर बड़ा झटका माना जा रहा है। गाजीपुर की सैदपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी 1996 के बाद से नहीं जीती है. पिछले चार चुनावों में सपा-बसपा प्रत्याशी ने दो बार जीत हासिल की है. महेंद्र नाथ 1996 में बीजेपी के टिकट पर बीजेपी के टिकट पर जीते थे. इसके बाद 2002 और 2007 में बसपा के कैलाश नाथ सिंह और दीनानाथ पांडे की जीत हुई थी।

आजमगढ़ की सगड़ी सीट से विधायक वंदना सिंह
विधायक वंदना सिंह ने भाजपा ज्वाइन कर लिया है। उनके पति सर्वेश सिंह सीपू वर्ष 2007 में सगड़ी विधानसभा से ही सपा के विधायक चुने गए थे। उनकी हत्या वर्ष 2013 में 19 जुलाई को गोली मारकर कर दी गई थी। उसके बाद वंदना सिंह बसपा से चुनाव लड़ीं तो विधायक चुनी गईं। वर्ष 2012 में वंदना के पति सर्वेश सिंह सीपू सदर विधानसभा तो उनके भाई संतोष सिंह टीपू सगड़ी विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़े लेकिन हार गए थे। इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनैतिक रही है। वंदना के श्वसुर रामप्यारे सिंह पहले अजमतगढ़ के ब्लाक प्रमुख थे। उसके बाद वर्ष 2002 में सपा के टिकट पर सगड़ी से ही चुनाव लड़े तो बसपा प्रत्याशी को जीत मिली थी। उसके बाद सपा ने एमएलसी बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यावरण मंत्री बनाया था। 31 मई 2005 को रामप्यारे सिंह का निधन हुआ तो सर्वेश सिंह सीपू पहली बार विधायक बने। सीपू की हत्या हुई तो वंदना पति की विरासत संभाल उसे आगे बढ़ाने में जुट गईं।

हरदोई सदर से विधायक नितिन अग्रवाल
38 साल के नितिन अग्रवाल ने साल 2017 में उत्तर प्रदेश के हरदोई से चुनाव लड़ा और जीत गए। आजकल वह समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, उन्हें क्रमशः वर्ष 2008 में उपचुनाव और 2012 के माध्यम से हरदोई निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य के रूप में चुना गया था। नितिन अग्रवाल यूपी विधानसभा के उपाध्यक्ष चुने गए हैं। वो समाजवादी पार्टी के विधायक हैं लेकिन सपा ने इन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया था। सपा ने उम्मीदवार बनाया था नरेंद्र वर्मा को जिन्हें 60 वोट मिले थे जबकि जीतने वाले नितिन अग्रवाल को 304 वोट मिले। नितिन अग्रवाल को अपने पाले में लाकर बीजेपी हरदोई सदर सीट का समीकरण साधने में सफल रही।

कई और अहम नेताओं पर पर है बीजेपी की नजर
बीजेपी के सूत्रों का दावा है कि बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश के बाद बीजेपी में ज्वाइनिंग कमेटी का गठन हुआ था। इसके तहत बीजेपी में कई अहम लोगों की ज्वाइनिंग करायी गई। इसमें कई एमएलसी भी शामिल हैं। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिना में अभी कई और नेता बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। जिन विरोधी नेताओं पर बीजेपी डोरे डाल रही है उसमें सपा नेता और पूर्व मंत्री नारद राय, पूर्व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश सिंह, पूर्व मंत्री मनोज पांडेय और पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा और कांग्रेस के विधायक राकेश प्रताप सिंह जैसे कद्दावर नेताओं का नाम शामिल है। ये सभी नेता सपा से जुड़े हैं और यदि वाकई इन नेताओं को बीजेपी अपने पाले में लाने में कामया हुई तो सपा को काफी नुकसान होगा।












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