पूर्वांचल का दबदबा, समर्थकों ने छेड़ी मोदी के करीबी को सीएम बनाने की मुहिम
उत्तर प्रदेश में चुनाव परिणाम आने से पहले ही में बीजेपी समर्थक पार्टी की जीत तय मान रहे हैं। उनके बीच मुख्यमंत्री के चेहरे की चर्चा शुरू हो गयी है।
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश चुनाव के आखिरी चरण का मतदान होने के बाद अब नतीजों को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। सियासत के गलियारों में नतीजों के पहले ही जीत और सीएम के चेहरे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। यूं तो हर शहर के चौराहों पर हर पार्टी के समर्थक अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी समर्थक सबसे ज्यादा उत्साहित हैं। बीजेपी समर्थकों के बीच सीएम के नाम को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर बीजेपी की तरफ से गाजीपुर के मनोज सिन्हा को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

मनोज सिन्हा को लेकर चर्चा तेज
चुनाव में मतदान के बढ़े प्रतिशत से सबसे ज्यादा खुश बीजेपी है। पार्टी समर्थकों ने तो अभी से जश्न मनाना शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी में सीएम की खोज शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर पार्टी के वरिष्ठ नेता के एक बयान के बाद तो बीजेपी समर्थक फूले नहीं समा रहे हैं। दरअसल इस बयान में वरिष्ठ नेता की ओर से कहा गया है कि विश्वसनीय और राजनीतिक रूप से सही मुख्यमंत्री ढूंढने की पहल शुरू हो चुकी है। पार्टी हर संभव स्थिति के बारे में सोच रही है और किसी भी हालात के लिए तैयार है। इस खबर के वायरल होते ही मनोज सिन्हा समर्थक सीएम पद के लिये उनकी दावेदारी करने लगे है।

पूर्वांचल में चुनाव की मिली थी कमान
रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा पीएम मोदी के करीबी हैं। अमित शाह ने पूर्वांचल में चुनाव की जिम्मेदारी मनोज सिन्हा को ही सौंपी थी। खासतौर से गाजीपुर, मऊ, बलिया, मिर्जापुर,जौनपुर के अलावा सोनभद्र जिले की पूरी कमाम मनोज सिन्हा के हाथ में थी। टिकट वितरण में भी इन जिलों में मनोज सिन्हा की खूब चली। मोदी अपने मंच से भी कई बार मनोज सिन्हा की तारीफ कर चुके हैं। माना जा रहा है कि अगर इन जिलों में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा तो मनोज सिन्हा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि मनोज सिन्हा सीएम की रेस से खुद को सअलग बता रहे हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय है जुदा
मनोज सिन्हा के अलावा केशव प्रसाद मौर्या, योगी आदित्यनाथ और लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा के नाम को लेकर भी चर्चा तेज है। वहीं कुछ राजनीतिक जानकार ये मान रहे हैं कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो इन नेताओं से अलग किसी दूसरे पिछड़े वर्ग के चेहरे पर पार्टी मुहर लगा सकती है।












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