BJP ने आठवां कैंडिडेट उतार बढ़ाईं अखिलेश की मुश्किलें, किसकी होगी जीत? समझें पूरा गणित
UP rajya sabha election, भारतीय जनता पार्टी ने यूपी के राज्यसभा चुनाव को बेहद ही दिलचस्प कर दिया है। बीजेपी ने राज्य की 10 राज्यसभा सीटों पर पहले ही सात उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया था। लेकिन अब एक आठवां कैंडिडेट भी मैदान में उतार दिया है।
बीजेपी ने गुरुवार को मौजूदा राज्यसभा सांसद संजय सेठ को आठवें प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारकर समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सपा ने तीन उम्मीदवार जया बच्चन, अलोक रंजन और रामजी लाल सुमन को कैंडिडेट बनाया है। बता दें कि यहां से सिर्फ 10 सांसद चुने जाने हैं। जबकि उम्मीदवार 11 हो गए हैं।

संजय सेठ को बीजेपी ने यूपी से राज्य सभा चुनाव के लिए आठवां उम्मीदवार बनाकर सपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिसके बाद यूपी में विधायकों के इधर से उधर जाने का खेल शुरू होगा। माना जा रहा है कि, यूपी में जबरदस्त क्रॉस वोटिंग होने की आशंका है। अपने इस प्रत्याशी को जिताने के लिए बीजेपी को दस अतिरिक्त वोट चाहिए। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 वोट की जरूरत होती है।
बीजेपी को 8 प्रत्याशी जिताने के लिए 296 विधायक चाहिए। उसके पास सभी सहयोगी दल तथा आरएलडी के 9 विधायक, राजा भैया के 2 विधायक मिलाकर 282 होते हैं। यानी उसे 14 एमएलए की जरूरत है। संजय सेठ को जीतने के लिए प्रथम वरीयता 12 से 15 विधायक चाहिए होंगे। इसके लिए विपक्ष में क्रॉस वोटिंग होनी जरूरू है, तभी संजय सेठ जीत पाएंगे। इसमें राजभर और आरएलडी की भूमिका वैसे महत्वपूर्ण है।
वहीं दूसरी ओर सपा के 3 प्रत्याशियों के लिए 111 एमएलए चाहिए। उसके पास अपने 108 और कांग्रेस के 2 एमएलए यानी 110 हैं। अगर पल्लवी पटेल खिसकेंगी तो 2 एमएलए और चाहिए होंगे। इसके लिए सपा को जोड़तोड़ या दूसरी वरीयता के वोट पर निर्भर होना होगा।
हालांकि आरएलडी के कुछ विधायक समाजवादी पार्टी के नेता हैं। जो आरएलडी के टिकट पर जीते थे। सपा उन सभी विधायकों को भी अपनी तरफ करने की कोशिश करेगी। वहीं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 विधायकों में से 2 लोग क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं, जिनमें दुधराम और जगदीश नारायण राय शामिल है।
2022 के विधानसभा चुनाव के समय समाजवादी पार्टी ने दुधराम और जगदीश नारायण राय को सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़वाया था। ये दोनों भी सपा के ही नेता हैं। इस स्थिति को देखा जाए तो सपा की तीनों कैंडिडेट आराम से चुनाव जीतते नजर आ रहे हैं, लेकिन अगर इसमें से कोई पाला बदल लेता है और पलट जाता है। तो समाजवादी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।












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