UP Nikay Chunav: 2022 में आजमगढ़-कौशांबी में सभी सीटें हारी थी BJP, अमित शाह यहीं से करेंगे चुनावी शंखनाद

बीजेपी यूपी के निकाय चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है। बीजेपी के नेताओं का दावा है कि पार्टी इस चुनाव को 2024 आम चुनाव का सेमीफाइनल मानकर चल रही है। इसलिए बीजेपी अभी से अपनी रणनीति के अनुसार आगे बढ़ रही है।

अमित शाह

UP Nikay Chunav: भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) राज्य में होने वाले निकाय चुनाव की तैयारियों में जुट गई है क्योंकि पार्टी इसे 2024 के चुनावी संग्राम का सेमीफानल मानकर चल रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीजेपी ने केंद्रीय गृह मंत्री और पार्टी के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह आजमगढ़ और कौशांबी में बैक टु बैक दो रैलियां कर यहां चुनावी तैयारियों की हकीकत को परखने का प्रयास करेंगे। इस दौरे को आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

विधानसभा चुनाव के बाद अमित शाह का यूपी का पहला दौरा

दरअसल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद शाह का यूपी का यह पहला दौरा होगा। हालांकि इसी साल फरवरी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी प्रमुख के रूप में एक वर्ष का विस्तार मिलने के बाद वाराणसी और गाजीपुर का दौरा किया था। अमित शाह आजमगढ़ में सीएम योगी आदित्यनाथ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ आजमगढ़ के हरिहरपुर में एक संगीत महाविद्यालय की आधारशिला रखेंगे और कौशाम्बी महोत्सव का उद्घाटन करेंगे।

आजमगढ़ और कौशांबी में शाह की रैलियों की तैयारियां पूरी

शाह के यात्रा कार्यक्रम की पुष्टि करते हुए भाजपा जिलाध्यक्षों आजमगढ़ के ध्रुव सिंह और कौशांबी की अनीता त्रिपाठी ने कहा कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और शाह की रैलियों में भाजपा समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद रहेगी। दरअसल ये रैलियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भाजपा ने पिछले साल हुए लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के गढ़ आजमगढ़ में सेंध लगाई थी, जब अखिलेश यादव ने मैनपुरी के करहल से यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सीट खाली कर दी थी।

2022 में आजमगढ़ की सभी विधानसभा सीटें हारी थी बीजेपी

भाजपा के दिनेश लाल निरहुआ ने त्रिकोणीय मुकाबले में अखिलेश के चचेरे भाई और पार्टी के उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव को हराकर उपचुनाव जीता था क्योंकि बसपा ने एक स्थानीय मुस्लिम उम्मीदवार और पूर्व विधायक शाह आलम गुड्डू जमाली को मैदान में उतारकर यहां के समीकरण को पलट दिया था। बीजेपी के लिहाज से यह जीत बड़ी थी क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी आजमगढ़ में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत सकी थी। दरअसल, मुस्लिम बहुल जिले की सभी 10 सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी।

कौशांबी में भी बीजेपी का नहीं खुला था खाता

कुछ ऐसा ही हाल कौशांबी का भी है, जहां भाजपा तीनों विधानसभा सीटों- सिराथू, मंझनपुर और चायल को सपा से हार गई थी। दरअसल डिप्टी सीएम केशव मौर्य अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र सिराथू में अपना दल (एस) प्रमुख अनुप्रिया पटेल की बहन सपा की पल्लवी पटेल से हार गए थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता शाह के इन दोनों जिलों के दौरे को आगामी नगर निकाय चुनावों के मद्देनजर अहम मान रहे हैं क्योंकि पार्टी निकाय चुनाव को लोकसभा चुनाव से पहले ''सेमीफाइनल'' के रूप में देख रही है।

2017 के निकाय चुनाव में बीजेपी की हालत रही खस्ता

2017 के निकाय चुनाव में बीजेपी दो नगर पालिका परिषद मुबारकपुर और आजमगढ़ में से एक भी नहीं जीत सकी थी। मुबारकपुर से सपा प्रत्याशी कैरुनिशा बेगम और आजमगढ़ से निर्दलीय शीला ने जीत दर्ज की थी। आजमगढ़ की 11 नगर पंचायतों में भाजपा और सपा ने दो-दो सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि बाकी सात सीटों पर निर्दलीय जीते थे। वहीं, कौशांबी में छह नगर पंचायतों में से भाजपा, सपा और बसपा ने एक-एक पर जीत दर्ज की थी।

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