अब बरेली नगर निगम में 'वंदेमातरम्' पर भाजपा-सपा में ठनी
बरेली नगर निगम में भाजपा विधायकों ने फैसला किया है कि वो बोर्ड की हर मीटिंग के पहले वंदेमातरम् गाएंगे।
बरेली। बरेली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में भाजपा के पार्षदों ने फैसला किया है कि वो बोर्ड की हर मीटिंग के पहले राष्ट्र गीत वंदेमातरम् गाएंगे। पार्षदों ने दावा किया कि इस आशय का प्रस्ताव बोर्ड की मीटिंग में ही पहले पास कर दिया गया था लेकिन उस वक्त सत्ता में समाजवादी पार्टी थी, जिसके कारण उस पर रोक लग गई।
बात फिलहाल की करें तो सपा के पार्षद अभी बहुमत में हैं, ऐसे में बोर्ड की अगली बैठक काफी धमाकेदार हो सकती है।

गाया जाता था वंदेमातरम्
विकास शर्मा ने कहा कि मैंने बतौर पार्षद, BMC में 20 साल गुजारे हैं और जब तक सपा के डॉक्टर आईएस तोमर मेयर नहीं बने थे, तब तक हर बोर्ड मीटिंग के पहले वंदेमातरम् होता था। विकास ने कहा कि उन सभी ने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि अब हर बोर्ड मीटिंग से पहले वंदेमातरम् गाया जाएगा।

बरेली के मेयर ने कहा...
वहीं इस मसले पर सपा पार्षद राजेश अग्रवाल ने मेरठ की घटना की ओर इशारा करते हुए कहाकि भाजपा पार्षद मेरठ की तरह बरेली में भी बवाल करना चाहते हैं। BMC में भाजपा पार्षदों ने यह गाना लंबे समय तक गाया गया है लकिन जो लोग इसमें शामिल नहीं होना चाहते उन पर गाने के लिए कोई दबाव ना हो। इसी मामले पर बरेली के मेयर डॉक्टर आईएस तोमर ने कहा कि फिलहाल मुझे इस बारे में ऐसी कोई जानकारी नहीं है। BMC की बोर्ड मीटिंगों में इससे पहले कभी वंदेमातरम् नहीं गाया गया है। (तस्वीर में आईएस तोमर)

मेरठ में हुआ था ये बवाल
इससे पहले 29 मार्च को मेरठ म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में नगर निगम बोर्ड की बैठक में वंदेमातरम् गायन शुरू होने से पहले ही विपक्षी पार्षदों द्वारा सदन छोड़ने पर विवाद हो गया था। विपक्षी पार्षद जब वंदे मातरम खत्म होने के बाद लौटे तो ये प्रस्ताव पास कर दिया गया कि जो पार्षद वंदे मातरम के दौरान सदन में मौजूद नहीं रहेगा उसे बोर्ड बैठक में स्थान नहीं दिया जाएगा। ऐसे पार्षदों की सदस्यता भी समाप्त की जा सकती है। इसको लेकर हुए हंगामे के बीच भाजपा पार्षदों ने 'हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा' के नारे लगाए थे।

'अल्लाह हू अकबर कहेंगे'
इस विवाद पर विपक्षी पार्षद ने बोला था कि 'हिंदुस्तान में रहेंगे और अल्लाह हू अकबर कहेंगे'। बोर्ड बैठक वंदे मातरम के गायन से प्रारंभ होने की परंपरा रही है। इससे पहले भी कई बोर्ड बैठकों में इस बात को लेकर विवाद हो चुका है कि जैसे ही वंदे मातरम शुरू होता है तो विपक्षी पार्षद सदन छोड़कर बाहर चले जाते हैं और जैसे ही वंदे मातरम समाप्त होता है तो सभी विपक्षी पार्षद सदन में वापस आकर कुर्सी पर बैठ जाते हैं।












Click it and Unblock the Notifications