यूपी विधान परिषद चुनाव: भाजपा उम्मीदवारों की लिस्ट पर 'दादा' ने कहा, अमित शाह ने नहीं निभाया वादा
वाराणसी। आगामी 5 मई को नए विधान परिषद में नए नेताओं का प्रवेश होगा और इन्हीं नेताओं को चुनने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए लिस्ट जारी की। इस लिस्ट के आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की रार सामने आई है। पार्टी ने जब वरिष्ठ नेता और लोकसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले अशोक धवन को अपना उम्मीदवार बनाया तो शहर दक्षिणी से 7 बार विधायक रहे श्याम देव राय चौधरी 'दादा' ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आलाकमान ने एक बार फिर मेरे साथ वादाखिलाफी की। पूर्व विधायक ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के वक्त पैनल की मीटिंग में मुझसे वादा किया था कि उन्हें विधान परिषद भेजा जायेगा लेकिन उन्होंने उस वादे की मर्यादा नहीं रखी।

विधानसभा चुनाव में भी हुआ था धोखा
पार्टी को लगातार 7 बार बनारस के शहर दक्षिणी से कमल खिलाकर देने वाले श्याम देव राय चौधरी 'दादा' विधानसभा चुनाव के वक्त भी तब नाराज हो गए थे जब बिना उन्हें सूचित किये उनका टिकट काटकर पार्टी ने वर्तमान में राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। इस घोषणा के बाद दादा ने शीर्ष कमान की जमकर आलोचना की थी। हालात तब ऐसे हो गए थे कि एक बार लगा कि बीजेपी के हाथ से ये सुरक्षित सीट निकल जाएगी।
लखनऊ में दादा को बुलाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने वादा किया था कि आप अभी इस चुनाव में प्रत्याशी के पक्ष में हो जाइए, 5 मई 2018 को होने वाले नए विधान परिषद के गठन ने आपको विधान परिषद भेजा जायेगा। लिस्ट जारी होने के बाद दादा ने कहा कि मुझे तो विधानसभा चुनाव के वक्त लखनऊ में बुलाकर विधान परिषद भेजने का वादा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी ने किया था। यदि लिस्ट में मेरा नाम नहीं है तो मेरे साथ वादा खिलाफी की गयी है।

पीएम के मनाने से माने थे श्यामदेव
बीते विधानसभा चुनाव के वक्त दादा का जब टिकट काट कर युवा नेता को टिकट दिया गया था तब श्यामदेव की नाराजगी सातवें आसमान पर थी। लगातार विधायक बनने के साथ ही श्याम देव राय की छवि बनारस में एक जमीनी नेता के रूप में जनता के बनी हुई है। उनकी नाराजगी विधानसभा चुनाव के वक्त पार्टी का बड़ा नुकसान कर सकती थी। ऐसे में खुद प्रधानमंत्री ने इस नेता को मनाया था। पीएम मोदी विधानसभा चुनाव के वक्त श्री कशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे थे तब उन्होंने गेट पर खड़े श्याम देव का हाथ उनके पास जाकर पकड़ा और अपने साथ मंदिर लेकर गए थे। तभी ये कयास लगाए गए थे की पीएम मोदी के कहने पर दादा ने विरोध छोड़कर पार्टी का साथ दिया था।












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