Barsana जाने वालों के लिए गुड न्यूज! राधारानी के दर्शन के लिए नहीं लगानी पड़ेगी लंबी लाइन, क्या है नया नियम?
Barsana Radharani Temple: बरसाना के राधारानी मंदिर में दर्शन करने आने वाले लाखों भक्तों के लिए अच्छी खबर है। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने भीड़ कंट्रोल करने के लिए एक नई और प्रभावी प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया है। होली के बाद, सुचारू और सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रवेश मार्गों पर नि:शुल्क टोकन-आधारित व्यवस्था लागू की जाएगी।
अब भक्तों को एक व्यवस्थित टोकन सिस्टम के माध्यम से ही लाडली जू के दर्शन प्राप्त हो सकेंगे। इस नई व्यवस्था के तहत, मंदिर परिसर के भीतर स्पेशल काउंटर तैयार किए जाएंगे जहां भक्तों को नि:शुल्क टोकन दिए जाएंगे। आइए जानते हैं क्या है एंट्री का नया नियम...

कैसे मिलेगी दर्शन की अनुमति?
दर्शन की अनुमति इन टोकन नंबरों के अनुसार ही दी जाएगी। यह सिस्टम उन सभी श्रद्धालुओं पर लागू होगा जो सीढ़ियों, रोपवे या परिक्रमा मार्ग के जरिए मंदिर पहुंचेंगे। मंदिर कमेटी के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य दर्शन के दौरान होने वाली भारी भीड़ और अफरा-तफरी को रोकना है, साथ ही इससे आने वाले भक्तों की संख्या का सटीक आकलन भी किया जा सकेगा।
कहां से मिलेंगे टोकन?
मंदिर कमेटी के रिसीवर आशीष कृष्ण शर्मा ने UNI से बातचीत में जानकारी दी कि बड़ी सिंहपौर पर एक पुलिस चौकी का निर्माण किया जा रहा है, जहां काउंटर लगाकर टोकन बांटे जाएंगे। इसके साथ ही सभी भक्तों को नि:शुल्क प्रसाद भी वितरित किया जाएगा।
सफल रहा ट्रायल
इस सिस्टम का कुछ दिनों पहले आधे घंटे का ट्रायल किया गया था, जो पूरी तरह सफल रहा। होली के बाद एक अंतिम ट्रायल किया जाएगा और फिर इसे स्थायी रूप से लागू कर दिया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में एक जूता-चप्पल स्टैंड (Shoe Storage) का निर्माण भी किया जा रहा है। आगामी 25 फरवरी को होने वाली विश्व प्रसिद्ध लठमार होली के मद्देनजर, पूरे परिसर में नई इलेक्ट्रिकल फिटिंग की जा रही है ताकि शॉर्ट सर्किट जैसी किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इसके अलावा, मंदिर के पीछे की सड़क को चौड़ा करने और निकास द्वार के 'L' आकार के रास्ते को सीधा करने का प्रस्ताव भी प्रशासन को सौंपा गया है, जिससे भक्तों की आवाजाही आसान होगी। मंदिर परिसर में स्थित पुराने मंदिर का भी नवीनीकरण (Renewal) किया जा रहा है, जिसका उपयोग छप्पन भोग तैयार करने और भक्तों को भोजन कराने के लिए किया जाएगा। पुराने मंदिर से नए मंदिर तक प्रसाद और भोग की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक लोहे के पुल का निर्माण भी किया जाएगा।












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