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Bareilly Violence: ऑस्ट्रेलिया में पढ़ता है तौकीर रजा का बेटा, दूसरे बच्चों को झौंकता है दंगों में

Bareilly Violence: मौलाना तौकीर रजा, जो अक्सर अपने विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं, हाल ही में बरेली में हुई हिंसा को भड़काने की कोशिश करते हुए उनका एक वीडियो वायरल हो गया। नतीजतन बड़ी तादाद में समुदाय विशेष के लोगों ने जुमे की नमाज के बाद हिंसा फैलाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने पहले उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन जब बात नहीं संभली तो पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा। जो तौकीर रजा दूसरों के बच्चों को हिंसा और दंगों में धकेलते हैं उनका अपना बेटा ऑस्ट्रेलिया में पढ़ता है। उन पर विदेशी फंडिंग के भी आरोप हैं।

दंगों में बूस्टर का काम करता है तौकीर रजा

मौलाना तौकीर रजा पर संभल में हुई हिंसा को हवा देने का भी आरोप लगता है। इस हिंसा में मारे गए 4 लोगों को तौकीर ने "शहीद" करार देकर मामले को और उकसाने की कोशिश भी की थी। तौकीर ने उस वक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि संभल की हिंसा प्रायोजित थी। उन्होंने दावा किया कि वहां दंगा नहीं हुआ बल्कि पुलिस, प्रशासन और अदालत ने साजिश कर इसे अंजाम दिया। जिससे माहौल लंबे समय तक तनावपूर्ण बना रहा।

Bareilly Violence

आला हजरत खानदान से संबंध

मौलाना तौकीर रजा इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख हैं और सुन्नी मुसलमानों से ताल्लुक रखते हैं। वे आला हजरत खानदान से आते हैं, जिसने इस्लाम के सुन्नी बरेलवी मसलक की नींव रखी थी। तौकीर रजा इस परिवार के पहले सदस्य हैं जिन्होंने साम्प्रदायिक सीढ़ियों के जरिए राजनीति में कदम रखा।

राजनीतिक सफर

साल 2001 में उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी "इत्तेहाद-ए-मिल्लत परिषद" की स्थापना की। पहले ही चुनाव में उनकी पार्टी ने नगरपालिका की 10 सीटें जीतीं। साल 2009 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए और वहीं से उनकी सक्रिय राजनीति की नई शुरुआत हुई।

पहले भी बरेली में करा चुके हैं दंगे

बरेली में हुए हिंदू-मुस्लिम दंगों के दौरान तौकीर रजा का नाम आरोपियों में शामिल हुआ और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया और उनकी पार्टी ने भोजीपुरा सीट पर जीत हासिल की।

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ता है तौकीर का बेटा

साल 2013 में अखिलेश यादव की सरकार ने उन्हें हथकरघा निगम का उपाध्यक्ष बनाया, लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और सपा से नाता तोड़ लिया। समय-समय पर उनकी असीमित संपत्ति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। दूसरों के बच्चों को दंगों में पहुंचाने वाले और दंगों की आग में झौंकने वाले तौकीर रजा का बेटा ऑस्ट्रेलिया की एक अच्छी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा है। उसका खर्च कैसे और कौन उठा रहा है ये बात भी समाज के दूसरे लोगों को हैरान करती रही है।

महिला लेखक का सिर कलम करने पर रखा था इनाम

तौकीर रजा ने साल 2007 में बांग्लादेशी मूल की पत्रकार और लेखक तस्लीमा नसरीन का सिर कलम कर लाने लिए 5 लाख रुपए के इनाम की घोषणा भी की थी। तब मौलाना ने यह भी कहा था कि अगर भारत ने तस्लीमा की एंट्री पर बैन नहींं लगाया तो उन पर लाखों का इनाम रखा जाएगा।

तमाम पार्टियों का समर्थन

साल 2014 में उन्होंने मायावती की बहुजन समाज पार्टी को समर्थन दिया। साल 2015 में उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (जेडेड) का गठन किया। इसके बाद भी वे लगातार राजनीतिक बयानों और गतिविधियों के कारण चर्चा में बने रहे।

विवादित बयान और आरोप

साल 2017 में द्रौपदी को लेकर मौलाना का एक बयान विवादों में घिर गया था। वहीं, 2022 में बरेली में मुसलमानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कथित तौर पर हिंदुओं को धमकी दी थी। ज्ञानवापी में कथित शिवलिंग मामले पर उन्होंने टिप्पणी की थी कि "फव्वारे को शिवलिंग बताकर धर्म और कानून का मजाक बनाया जा रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर मस्जिद को मंदिर में बदलना चाहती है।

तौकीर रजा पर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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