Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Barabanki Wedding Viral: कौन है दुल्हन Rulan Verma? 7 साल चले इश्क के बाद ब्याह रचाने जर्मनी से आया वैज्ञानिक

Barabanki Wedding Viral: सात समंदर पार से प्यार की एक दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है, जहां जर्मनी का युवक मार्कस अपनी बारात लेकर बाराबंकी पहुंचा और स्थानीय लड़की रुलन वर्मा से हिंदू रीति-रिवाजों से शादी रचाई। यह शादी न सिर्फ दो दिलों का मिलन है, बल्कि दो देशों की संस्कृतियों का खूबसूरत संगम भी बन गई।

शादी 20 फरवरी 2026 को बाराबंकी के होटल रिलाइट में धूमधाम से हुई। जर्मनी से दूल्हे के परिवार के 16 सदस्य बारात में शामिल हुए। पूरी शादी पारंपरिक हिंदू रस्मों - हल्दी, मेहंदी, जयमाला, सात फेरे - के साथ संपन्न हुई। आइए विस्तार से जानते हैं कौन है वैज्ञानिक दूल्हा और इस कपल की प्रेम कहानी...

barabanki-wedding-viral

Barabanki Wedding Viral: 7 साल पुरानी प्रेम कहानी, शादी के मंडप पर पहुंची

बाराबंकी के रेलवे असिस्टेंट इंजीनियर राज कुमार वर्मा की बेटी रुलन वर्मा (Rulan Verma) उच्च शिक्षा के लिए विदेश गईं, जर्मनी से पीएचडी की। वर्तमान में ऑस्ट्रिया के वियना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। जर्मनी के रहने वाले मार्कस (पूर्ण नाम मार्कस ईदर) पेशे से वैज्ञानिक हैं। दोनों की मुलाकात वियना यूनिवर्सिटी में पीएचडी के दौरान हुई। सात साल पुरानी यह प्रेम कहानी अब शादी के पवित्र बंधन में बंध गई। शादी 20 फरवरी 2026 को बाराबंकी के होटल रिलाइट में धूमधाम से हुई।

Barabanki Wedding Viral

देसी गानों पर जमकर थिरका फिरंगी दूल्हा

जर्मनी से दूल्हे के परिवार के 16 सदस्य बारात लेकर आए। पूरी शादी हिंदू रीति-रिवाजों से संपन्न हुई। इसमें हल्दी, मेहंदी, जयमाला, सात फेरे - सब कुछ पारंपरिक तरीके से हुआ। विदेशी दूल्हा भारतीय शेरवानी पहनकर कार के सनरूफ से निकला और देसी गानों पर जमकर थिरका। जर्मन मेहमानों ने भारतीय साड़ियां, खान-पान को खूब पसंद किया। हिंदी न आने के बावजूद खुशी से बोले - 'आई लव माई इंडिया!' शादी में सैकड़ों लोग शामिल हुए, विदेशी मेहमानों ने भारतीय परंपराओं का जमकर आनंद लिया। शादी के बाद रुलन अपने पति के साथ जर्मनी के लिए रवाना हो गईं।

Barabanki Wedding Viral

Who Is Bride Rulan Verma: कौन है दुल्हन रुलन वर्मा?

Linkedin प्रोफाइल के मुताबिक, दुल्हन रुलन वर्मा एक एनवायरनमेंटल साइंटिस्ट हैं, जो इस समय ऑस्ट्रिया की टेक्नीश यूनिवर्सिटेट विएन में पोस्टडॉक्टोरल साइंटिस्ट और लेक्चरर के रूप में काम कर रही हैं। जनवरी 2025 से वह वियना में रहकर वोलाटाइल केमिकल प्रोडक्ट (VCP) एमिशन पर रिसर्च लीड कर रही हैं। उनका काम सिर्फ लैब तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक्सपेरिमेंट डिजाइन करने, प्रोजेक्ट लिखने और हाई-रिजॉल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री डेटा का विश्लेषण करने जैसे अहम जिम्मेदारियां भी संभालती हैं। साथ ही वह एनवायर्नमेंटल केमिस्ट्री और केमिस्ट्री के इकोलॉजिकल और सोशल एस्पेक्ट्स जैसे यूनिवर्सिटी कोर्स के हिस्से भी पढ़ाती हैं, यानी साइंस और एजुकेशन को साथ लेकर चलती हैं।

Barabanki Wedding Viral
  • इससे पहले वह फ्रांस के ल्योन शहर में इंस्टीट्यूट डे रिसर्चेस सुर ला कैटालिस एट ल'एनवायरनमेंट डे ल्योन (IRCELYON) में एसोसिएट रिसर्चर रहीं। अक्टूबर 2020 से मार्च 2024 तक उन्होंने शहरी एयर पॉल्यूशन के सोर्स की पहचान पर काम किया। एडवांस्ड मास स्पेक्ट्रोमीटर, VOCS PTR-Tof, फास्ट पोलैरिटी स्विचिंग ToF और ऑर्बिट्रैप जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से उन्होंने एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग और मॉडलिंग में योगदान दिया। उनका फोकस रहा कि पॉल्यूटेंट्स की सही पहचान हो और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के लिए वैज्ञानिक समाधान निकाले जा सकें।
  • भारत में भी उनका अनुभव काफी मजबूत रहा है। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली में सीनियर रिसर्चर के तौर पर जुलाई 2018 से सितंबर 2020 तक काम किया। यहां उन्होंने दिल्ली-NCR के सात अलग-अलग स्थानों पर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित और मैनेज किए। उन्होंने न सिर्फ डेटा कलेक्शन और एनालिसिस किया, बल्कि एनवायरनमेंटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने और नेशनल-इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के पालन पर भी काम किया। इस दौरान उन्होंने 50 से अधिक लोगों को मेंटर किया और उन्हें रिसर्च व प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में गाइड किया।
  • अपने करियर की शुरुआत में वह सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में रिसर्चर भी रह चुकी हैं, जहां उन्होंने ताजमहल ज़ोन के लिए हवा और पानी के पॉल्यूशन से जुड़े डेटा को मैनेज किया। उन्होंने सस्टेनेबिलिटी और कंजर्वेशन को बढ़ावा देने के लिए कई एनवायरनमेंटल अवेयरनेस कैंपेन भी आयोजित किए।
  • दिलचस्प बात यह है कि उनका अनुभव सिर्फ रिसर्च तक सीमित नहीं है। वह लखनऊ में सत्यम कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ रेजिडेंशियल कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में भी काम कर चुकी हैं। यहां उन्होंने इको-फ्रेंडली घरों और कम्युनिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को एंड-टू-एंड मैनेज किया। उन्होंने एनवायर्नमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) किए, वेंडर मैनेजमेंट संभाला और यह सुनिश्चित किया कि प्रोजेक्ट्स समय पर और बजट के भीतर पूरे हों।
  • शिक्षा की बात करें तो उन्होंने यूनिवर्सिटी डे ल्यों से एनवायर्नमेंटल केमिस्ट्री में पीएचडी की है, जहां उनका रिसर्च फोकस उभरते शहरी एयर पॉल्यूटेंट्स पर रहा। इससे पहले उन्होंने मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर से सिविल इंजीनियरिंग में M.Tech किया और बेहतरीन ग्रेड हासिल किए।
  • कुल मिलाकर, रुलन वर्मा की प्रोफाइल एक ऐसी वैज्ञानिक की तस्वीर पेश करती है जो क्लीन एयर, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और अगली पीढ़ी के साइंटिस्ट तैयार करने के मिशन पर काम कर रही हैं। रिसर्च, टीचिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और लीडरशिप-चारों क्षेत्रों में उनका अनुभव उन्हें एक मजबूत और प्रेरक प्रोफेशनल बनाता है।

Who Is Markus Eder: कौन हैं दूल्हा मार्कस एडर?

Linkedin प्रोफाइल के मुताबिक, दूल्हा मार्कस एडर एक सस्टेनेबिलिटी और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र से जुड़े शोधकर्ता हैं, जिनका अकादमिक और रिसर्च सफर रिन्यूएबल रिसोर्सेज़ और एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग के इर्द-गिर्द घूमता है। उन्होंने OTH Amberg-Weiden से एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की, जिसमें उनका खास फोकस बायोटेक्नोलॉजी और एनवायर्नमेंटल प्रोसेस इंजीनियरिंग पर रहा। पढ़ाई के दौरान उन्होंने प्रोसेस प्लांट डिजाइन और कमीशनिंग की गहरी समझ विकसित की। उनकी बैचलर थीसिस 'लेबोरेटरी फ्लूइडाइज्ड बेड का डिजाइन, कंस्ट्रक्शन और कमीशनिंग' पर आधारित थी, जिससे उन्हें इंडस्ट्रियल प्रोसेस की प्रैक्टिकल जानकारी मिली।

Barabanki wedding viral news
  • अपने बैचलर प्रोग्राम के दौरान उन्होंने भारत के मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में प्रैक्टिकल सेमेस्टर पूरा किया, जहां उन्होंने 'वर्म कम्पोस्टिंग से बायोगैस स्लैग ट्रीटमेंट की क्वालिटी' पर रिसर्च प्रोजेक्ट किया। इस अनुभव ने उन्हें इंटरनेशनल एक्सपोजर के साथ-साथ सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट की समझ भी दी।
  • सस्टेनेबल केमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी और एग्रीकल्चर में दिलचस्पी के चलते उन्होंने वियना की यूनिवर्सिटी ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज एंड लाइफ साइंसेज (BOKU) में रिन्यूएबल रिसोर्सेज में मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग किया। यहां उन्होंने बायोमास से केमिकल्स, बायोरिफाइनरी प्रोसेस, बायोबेस्ड और बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक, पॉलीमर केमिस्ट्री, नेचुरल फाइबर कंपोजिट और लाइफ साइकिल असेसमेंट जैसे विषयों पर गहराई से अध्ययन किया। उनकी मास्टर थीसिस 'बायोटेक्नोलॉजिकल प्रोडक्शन, एक्सट्रैक्शन और कर्डलान का कैरेक्टराइजेशन' पर आधारित थी, जिसे उन्होंने यूनिवर्सिटी क्लॉड बर्नार्ड ल्योन 1, फ्रांस में रिसर्च इंटर्नशिप के दौरान पूरा किया। इस प्रोजेक्ट में उन्होंने प्लाज्मिड मॉडिफाइड बैक्टीरिया के जरिए कर्डलान का ओवरप्रोडक्शन, उसका एक्सट्रैक्शन और फिजिकोकेमिकल व मैकेनिकल कैरेक्टराइजेशन किया।
  • फरवरी 2023 से वह यूनिवर्सिटी ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज एंड लाइफ साइंसेज, वियना (BOKU) में पीएचडी स्टूडेंट के तौर पर कार्यरत हैं। उनका वर्तमान रिसर्च फोकस रीजेनरेटेड सेल्यूलोज फाइबर की प्रॉपर्टीज पर असर डालने वाले फैक्टर्स की खोज पर है। वह सस्टेनेबल मटीरियल्स के लिए सेल्यूलोज सोर्सेज की कैरेक्टराइजेशन और ऑप्टिमाइजेशन पर काम कर रहे हैं, जिसमें ड्राई जेट वेट स्पिनिंग और आयनिक लिक्विड जैसी तकनीकों का उपयोग शामिल है।
  • अकादमिक उपलब्धियों के साथ-साथ मार्कस एडर ने अलग-अलग देशों में रहकर और काम करके बहुसांस्कृतिक अनुभव हासिल किया है। इससे उनकी कम्युनिकेशन स्किल्स, एडैप्टेबिलिटी और टीमवर्क की क्षमता मजबूत हुई है। स्काउट ग्रुप और क्लब लीडर के रूप में कई वर्षों तक सक्रिय रहने के कारण उन्हें टीम लीडरशिप, प्रोजेक्ट प्लानिंग और ग्राउंड लेवल पर काम को लागू करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिला है।
  • कुल मिलाकर, मार्कस एडर एक ऐसे युवा शोधकर्ता हैं जो फॉसिल बेस्ड सिस्टम से रिन्यूएबल रॉ मटेरियल की ओर बदलाव को संभव और जरूरी मानते हैं। उनका करियर सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी, बायोपॉलिमर और ग्रीन प्रोसेस इंजीनियरिंग की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

चाचा ने क्या कहा?

दुल्हन के चाचा और कुर्मी नेता आरसी पटेल ने कहा कि बाराबंकी की प्रतिभाएं पूरी दुनिया में जिले का नाम रोशन कर रही हैं। यह दो संस्कृतियों का मिलन गर्व का क्षण है। शादी समारोह बाराबंकी में चर्चा का विषय बना रहा। लोग इसे सांस्कृतिक मेलजोल और प्यार की जीत की मिसाल बता रहे हैं।

यह कहानी साबित करती है कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती - न भाषा की, न देश की। उच्च शिक्षा और करियर के सफर में मिला प्यार अब जीवन भर का साथ बन गया। बाराबंकी की बेटी अब जर्मनी में नई जिंदगी शुरू करेगी, लेकिन भारतीय संस्कृति का रंग हमेशा साथ रहेगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+