बूचड़खानों का ये है सच! कितने फायदे-नुकसान में है यूपी सरकार

पूरे प्रदेश में चुनाव के दौरान भाजपा और उसके नेताओं ने बूचड़खानों को बंद करने की बात कही थी लेकिन क्या है उसका नफा-नुकसान आइए आपको बताते हैं।

लखनऊ। आदित्यनाथ योगी के सत्ता संभालने के तुरंत बाद से बूचड़खानों पर खतरों के बादल मंडराने लगे। 19 मार्च को शपथ ग्रहण के बाद से ही मेरठ, इलाहाबाद, वाराणसी समेत कई बड़े शहरों में मौजूद बूचड़खानों को बंद कराया जाने लगा या फिर उनके आस-पास पुलिस की आमदरफ्त बढ़ गई। अंग्रेजी अखबार इकॉनमिक टाइम्स के मुताबित प्रदेश में 356 बूचड़खाने हैं, जिसमें से सिर्फ 40 ही वैध हैं।

NGT पहले ही लगा चुका है बैन

NGT पहले ही लगा चुका है बैन

अखबार के अनुसार यूपी में अवैध बूचड़खानों के बंद होने से राज्य का हर साल करीब 11 हजार 350 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से साल 2016 में दिए गए आदेश के अनुसार इलाहाबाद के 2 अवैध बूचड़खानों को सील किया जा चुका है। बता दें कि राज्य सरकार ने इस बात का आश्वासन दिया है कि सिर्फ अवैध बूचड़खानों को ही बंद कराया जाएगा। बता दें कि NGT दो साल पहले भी अवैध बूचड़खानों पर बंदी लगा चुका है।

क्या रजिस्टर्ड बूचड़खाने भी होंगे बंद

क्या रजिस्टर्ड बूचड़खाने भी होंगे बंद

अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार मेरठ में अल फहीम मीटेक्स के मोहम्मद इमरान याकूब का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास की बातें कही घईं। लेकिन फिर भाजपा ने कहा कि वो सभी बूचड़खानों को बंद करेगी। क्या रजिस्टर्ड बूचड़खानों को भी बंद किया जा सकता है। बता दें कि याकूब के यहां भैसों के मीट का काम होता है और उनके यहां 1500 लोग काम करते हैं। ये भी पढ़ें: विश्व जल दिवस: ना हमें शर्म आती है और ना हमारे रहनुमाओं को

भाजपा के घोषणा पत्र में थी यह बात

भाजपा के घोषणा पत्र में थी यह बात

यह बात दीगर है है कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र जिसे पार्टी नेता संकल्प पत्र कहते हैं उसमें स्पष्ट कहा गया है कि जिस दिन यूपी में भाजपा की सरकार बनेगी, उसी रात से राज्य के सभी वैध और अवैध बूचड़खानों को अध्यादेश जारी कर बंद कर दिया जाएगा।

यूपी है सबसे बड़ा निर्यातक

यूपी है सबसे बड़ा निर्यातक

अखबार के अनुसार एक बूचड़खाने के मालिक नाम ना प्रकाशित किए जाने की शर्त पर बताया कि भाजपा जो यह कह रही है कि बूचड़खानों के चलते पशुओं की संख्या कम हुई और तस्करी हो रही है, इस दावे में कोई दम नहीं है। कहा कि पुशओं से संबंधित एक गणना के मुताबिक 2007 के मुकाबले 2012 में भैंसों की संख्या में 28 और गायों की संख्या में 10 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई। 2017 की गणना फिलहाल जारी है। भैंसों के मामले में देश का सबसे बड़ा निर्यातक है।

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