जानें 'बैलेट पेपर' से मतदान के फायदे और नुकसान, निकाय चुनाव में विपक्षी नेताओं ने उठाई फिर से मांग
Ballot Paper Election: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही विपक्षी नेताओं ने बैलेट पेपर से चुनाव की मांग उठा दी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

Ballot Paper Voting: देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की तारीखें सामने आ गई हैं। चार मई को पहले और 11 मई को दूसरे चरण की वोटिंगहोगी, जबकि 13 मई को नतीजे आएंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक मेयर और पार्षद के चुनाव ईवीएम तो नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव बैलट पेपर (Ballot Paper) के जरिए कराए जाएंगे। लेकिन विपक्षी नेताओं ने सभी चुनावों को बैलेट पेपर से कराने की मांग की है। आइए आज हमलोग जानते हैं बैलेट पेपर से चुनाव कराने के फायदे और नुकसान।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने के फायदे
- पेपर बैलेट (Ballot Paper) में वोट डालने वाले स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि उसने किस निशान पर मुहर लगाई
- मुहर लगाने के बाद वह बैलेट पेपर को मोड़कर सभी उम्मीदवारों के प्रतिनिधि के सामने उसे बैलेट बॉक्स में डालता है
- कई देशों में EVM पर बैन लगने के बाद बैलेट पेपर से चुनाव को सुरक्षित माना गया
- जिन देशों से evm टेक्नोलॉजी आई, वह देश भी बैलेट पेपर से चुनाव कराते हैं
- बैलेट पेपर किसी भी तरह से तकनीक से नहीं जुड़ा है इसलिए अनपढ़ लोगों के मन में इसके प्रति संदेह नहीं रहता
- बैलेट पेपर को हैक करने का कोई सवाल नहीं पैदा होता हालांकि, ईवीएम को भी अभी तक हैक करने की बात सामने नहीं आई है
- किसी की जगह किसी पार्टी को वोट जाने का संदेह नहीं रहता
बैलेट पेपर से चुनाव कराने के नुकसान
- बैलेट बॉक्स का लूट होना सबसे बड़ा डर है। पहले के समय में अक्सर लूट हो जाती थी।
- बैलेट बॉक्स में पानी डाल देना या आग लगा देना। कागज की पत्री जलकर राख हो जाती थी।
- काउंटिंग में काफी समय लगता है
- कागज की सर्वाधिक बर्बादी, पर्यावरण को नुकसान
- बैलेट से चुनाव कराने पर पैसे की बर्बादी
- बूथ कैप्चर करने की कोशिश
- पिछड़े और कमजोर तबके के लोगों को वोट नहीं देने के लिए धमकाना
- किसी की जगह कोई और डालता था वोट
- कई वोट हो जाते थे अनवैलिड
ईवीएम पर सवाल क्यों?
दरअसल, अमेरिका से लेकर ब्रिटेन , फ्रांस,ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे बड़े देश में राष्ट्रीय स्तर का मतदान ईवीएम से नहीं होता। कुछ देशों ने प्रयोग करने के बाद ईवीएम का इस्तेमाल बंद कर दिया है। मिसाल के तौर पर, जर्मनी ने ईवीएम से चुनाव कराने की पहल की लेकिन बाद में उसने भी स्थगित कर दिया। हाल में बांग्लादेश भी उदाहरण है जिसने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने का फैसला लिया है।
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