VIDEO:यूपी का 'भुतहा' सरकारी अस्पताल, बेहोश मरीज पर छिड़कने तक को पानी नहीं!
मैनपुरी। उत्तर प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा करती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। मैनपुरी के ब्लॉक के ग्राम सठिगवां में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खुद ही बीमार हालत में है। तहसील किशनी से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर तेरह वर्ष पूर्व ग्राम सठिगवां में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण इस आशय से किया था कि पीएचसी किशनी तक न पहुंच पाने वाले बीमार लोग यहीं आकर स्वास्थ्य लाभ ले सकें।

खंडहर में तब्दील हुआ अस्पताल
सठिगवां में स्वास्थ्य विभाग ने एक साथ चार इमारतों का निर्माण कराया था लेकिन ये इमारतें अब किसी भुतहा जगह से कम नहीं लगती। सब कमरे खंडहर में तब्दील हो गए हैं। अस्पताल के अंदर जंगल उग गया है। गंदगी का अंबार है। यहां मरीजों के बैठने से लेकर लेट्रिन, बाथरूम, पीने के लिए पानी, स्ट्रेचर, बेड इत्यादि मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का यहां नामोनिशान नहीं है। शौचालय देख कर ऐसा लगता है, कई वर्षो से बंद पड़ा है। अस्पताल के कमरों में महीनों से सफाई नहीं हुई है। अस्पताल के आधे से ज्यादा कमरों में दरवाजे नहीं हैं। पूरे अस्पताल में केवल एक ही बेड है वो भी बेहद गंदी। यहां स्ट्रेचर ना होने के कारण लोग मरीजों को गोदी में उठा कर अस्पताल पहुंचाते हैं।

खोल रही सरकारी दावों की पोल
यह अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल रहा रहा। डॉक्टर की कुर्सी पर बैठे मिले विनोद वर्मा फार्मासिस्ट ने बताया कि रोगियों के लिए वो ही दवाई लिखते व देते हैं। सुबह आकर सफाईकर्मी का काम करते हैं। 12 महीने हो गए विनोद वर्मा को अस्पताल में आये हुए, उन 12 महीनो में उनका कोई उच्च अधिकारी अस्पताल की कोई सुधि लेने नहीं आया। उनके अनुसार अस्पताल में चार लोगों का स्टाफ होना चाहिए लेकिन वे अकेले ही मरीजो को देख रहे हैं। विनोद वर्मा बताते हैं कि उनको पानी पीने के लिए 500 मीटर से पानी लाना पड़ता है। मरीज अगर दवाई खाये या बेहोशी की हालत में अस्पताल आये, उसके ऊपर छिड़कने तक को पानी अस्पताल में नहीं है। वहां आ रहे मरीजो को अस्पताल अपने से ज्यादा बीमार लगता है। इन्ही अनियमितताओं के चलते मरीजों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

क्या कहा सीएमओ ने?
इसी मामले पर प्रभारी CMO गुरुदयाल सिंह ने बताया कि ये सामुदायिक स्वास्थ्य किशनी के अंतर्गत सठिगवां पीएचसी में डॉक्टर शशी कौशल प्रभा, विनोद वर्मा फार्मसिस्ट तैनात हैं, जहां तक है, हम इनके अधीक्षकों के खातों में सुविधाओं, मेंटेनेंस के लिए इनके खातो में पैसा भेजते हैं, फिर भी लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। हमने प्रभारी के खातों में जो मेंटेनेन्स पैसा भेजा है, वह पैसा क्यों नहीं लगा। इस प्रकरण में हम उनकी जांच करेंगे। जो दोषी होगा उस पर कार्रवाई करेंगे।
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