यूपी: ऐसा क्या हुआ था 2 हजार साल पहले जिससे कोरिया और अयोध्या का रिश्ता हो गया था पक्का
अयोध्या। यूपी का अयोध्या जिला एक बार फिर भव्य दिपोत्सव पर्व के लिए सज-धज कर तैयार हो चुका है। इस दौरान दक्षिण कोरिया की फर्स्ट लेडी किंगजोंग सुक इस पर्व की खास मेहमान होंगी। इस पर्व में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ और बिहार के राज्यपाल भी मौजूद रहेंगे। इन सब के बीच सोचने वाली बात ये हैं कि आखिर दक्षिण कोरिया की फर्स्ट लेडी को ही मुख्त अतिथि क्यों बनाया गया है? इस सवाल के जवाब के लिए हमें 2000 साल पीछे जाना होगा।

आपको बता दें कि दक्षिण कोरिया की रानी सूरीरत्न(हिव ह्वांग ओक) आयोध्या से ताल्लुक रखती थीं। उनकी याद में कोरियाई सरकार अयोध्या में एक स्मारक बनवाना चाहती है। इसी सिलसिले में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की पत्नी सूक रानी सूरीरत्न(हिव ह्वांग ओक) की भूमि पूजन कार्यक्रम में भाग लेंगी। आपको बता दें कि कोरिया की रानी सूरीरत्न अयोध्या की रहने वाली थीं। आज से करीब 2000 साल पहले उन्होंने कोरिया की यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान सूरीरत्न ने कोरिया के राजा किम सूरो से विवाह किया था। विवाह के बाद सूरीरत्न ने अपना नाम बदलकर हिव ह्वांग ओक रख लिया था। इतिहासकारों के अनुसार राजकुमारी सूरीरत्न 48ईस्वी में कोरिया की यात्रा पर गई थीं। वहां रानी ने एक स्थानीय राजा से विवाह कर कराक राजवंश की स्थापना की।

इस कहानी व रानी की यात्रा का उल्लेख चीनी भाषा की कुछ प्राचीन किताबों में जानने को मिलता है। इतिहास के अनुसार अयोध्या के राजा को सपने में भगवान ने आदेश दिया कि वह अपनी बेटी को दक्षिण कोरिया के शहर गिमहोई भेजें ताकि उनकी शादी वहां के राजा किम सूरो से करा दें। दक्षिण कोरिया में चर्चित कथाओं और मिथकों के अनुसार राजकुमारी सूरीरत्न अयुता की रहने वाली थीं। इतिहासकारों के अनुसार अयुता और अयोध्या दोनों एक ही नाम हैं। विवाह के बाद राजा-रानी को दस बेटे हुए। कोरिया में किम बेहद चर्चित और आम नाम है व गिमहेई शहर में राजा किम सूरो को ही यहां रहने वाले लोगों का पूर्वज माना जाता है। आपको बता दें कि किम वंश के लोगों की आबादी दक्षिण कोरिया में तकरीबन 60 लाख के आस-पास है जो कि कोरिया शहर की कुल आबादी का 10 प्रतिशत है।

दक्षिण कोरियाई सरकार अपनी पूर्वज और कोरिया की रानी की याद में ही अयोध्या में एक स्मारक का निर्माण करवा रही है। कोरियाई सरकार ने साल 2000 में अयोध्या और गिमहेई हर को सिस्टर सिटीज के रूप में विकसित करने का समझौता किया था। साल 2001 में कोरिया के करीब 100 इतिहासकारों और सराकरी कर्मचारियों ने अयोध्या में सरयू नदीं के पश्चिमी तट पर महारीन सुरीरत्न के स्मारक का शिलान्यास किया था। साल 2016 में एक मीटिंग में कोरिया सरकार ने यूपी सरकार को इस स्मारक को और ज्यादा विकसित करन के प्रस्ताव दिया था। इसी प्रजोक्ट के भूमि पूजन के लिए अयोध्या दीपोत्सव कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया की फर्स्ट लेड़ी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
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