Ram Mandir: कभी 100 रुपए मिलती थी राम मंदिर के पुजारी को सैलरी, अब कितनी, कब शुरु हुई ये प्रथा? जानिए सबकुछ

अयोध्या की आत्मा अगर किसी बसती है, तो रामलला का मंदिर (Ram Mandir) है, जो पांच शताब्दियों के संघर्ष के बाद फिर श्री रामजन्मभूमि पर बनकर तैयार है। ऐसे में मंदिर के जुड़ी हर नई और पुरानी जानकारी का अध्ययन किया जा रहा है। हाल में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास और उनके सहायक पुजारियों को वेतन में वृद्धि की है। ऐसे में चर्चा इस बात की है कि रामलला की सेवा के लिए सैलरी क्यों ली जाती है और यह प्रथा कब चल रही है?

श्री रामजन्म भूमि पर प्राचीन राम मंदिर से लेकर मंदिर के नवनिर्माण तक रामलला के इतिहास को लेकर अनेक गाथाएं हैं। अयोध्या में मुगलों के कदम से रखने के बाद से मंदिर पर कब्जे और मनमाने परिवर्तन के चलते उपजा विवाद लंब जरूर चला लेकिन यहां के इतिहास, सरयू नदी के तटे बसे शहर की खूबसूरती के छीनने में नाकाम रहा। बात जब रामलला के मंदिर में सेवा करने वाले पुजारियों को वेतन होगी तो मंदिर के इतिहास में इस प्रथा को कब से शुरू किया गया, चर्चा इस पर भी होनी जरूरी है।

Ayodhya Ram Mandir

रामलला के मंदिर में पुजारियों को सैलरी कब से?
श्री रामजन्मभूमि पर प्राचीन मंदिर में पुजारियों को सैलरी देने का कोई भी रिकॉर्ड नहीं है। ये बात अलग है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे से ही वहां के पुजारियों, महंत का जीवन यापन होता रहा है। वर्ष 1992 में तत्कालीन विवादित ढांचा ढहाए जाने के बाद परिसर में एक बार फिर से रामलला की पूजा अर्चना शुरू की गई। हालांकि ये अस्थाई मंदिर था। लेकिन अयोध्या के मठ मंदिरों के ट्रस्ट और प्रशासन ने मिलकर यहां एक पुजारी की नियुक्ति को मान्यता दी। तब रामलाला के मंदिर में आचार्य सत्येंद्र दास पूजा करते रहे हैं। वर्तमान में उनकी उम्र करीब 83 वर्ष हो चुकी है। आचार्य सत्येंद्र दास के साथ उनकी सहायता के लिए सहायक पुजारी भी ट्रस्ट ने नियुक्त किए हैं।

1992 में पुजारी को मिलती थी 100 रुपए सैलरी
1992 में ढांचा विध्वंस के बाद मुख्य पुजारी का वेतन 100 रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट गठित हुआ तो मुख्य पुजारी की सैलरी 12 हजार रुपये प्रति माह की गई। वर्ष 2020 में मुख्य पुजारी की सैलरी में फिर से बदलाव किया गया। पहले 15 हजार और बाद में 20 हजार रुपये कर दी गई। बाद में

अब कितनी है पुजारी और सहायकों की सैलरी
ट्रस्ट बनने के बाद मुख्य पुजारियों के साथ-साथ सहायक पुजारियों और सेवादारों की सैलरी में बढ़ोतरी की गई। आखिरी बढ़ी हुई सैलरी 35 हजार थी जिसे 10 प्रतिशत बढ़ाकर 38 हजार 500 रुपये कर दिया गया है। जबकि मुख्य पुजारी का वेतन 35,000 रुपये था, जिसे अब 10 फ़ीसदी बढ़ा दिया गया है। जबकि सहायक पुजारियों का वेतन 36,300 रुपये है।

कौन हैं रामलला के मुख्य पुजारी?
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने 975 में संस्कृत विद्यालय से आचार्य की डिग्री भी हासिल की थी। 1976 में उन्हें अयोध्या के संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरण विभाग में सहायक अध्यापक की नौकरी मिली। लेकिन भगवाम राम के प्रति उनके ने अगाध लगाव के चलते वे और की नहीं बल्कि स्वयं रामलला की सेवा में अधिक रूचि लेने लगे और परिणाम ये हुआ कि 1992 में बाबरी विध्वंस से करीब नौ माह पहले से ही उन्होंने रामलला के मंदिर में नियमित पूजन अर्चन का कार्य संभाला।

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