Atiq Ahmed: अतीक अहमद के साम्राज्य का खात्मा इस एक गलती से हुआ शुरू, नहीं करते तो...
Atiq Ahmed: 2005 में हुई राजू पाल की हत्याकांड का एक मात्र गवाह उमेश पाल की हत्या के 51 दिनों बाद अतीक अहमद के पूरे साम्राज्य का खात्मा हो गया।

कभी पूरे उत्तर प्रदेश में माफिया से नेता बने अतीक अहमद की आंखें देखकर आम आदमी से लेकर पुलिस वाले तक खौफ खाते थे...उसका अंत ऐसा होगा...किसी ने शायद ही सोचा होगा। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद को उनके ही शहर प्रयागराज में 15 अप्रैल की रात लाइव कैमरे पर गोली मारकर हत्या कर दी गई।
उमेश पाल हत्याकांड में 27 मार्च को गुजरात के साबरमति जेल से अतीक को प्रयागराज लाया गया, उसके बाद से 15 अप्रैल के बीच, अतीक का साम्राज्य मानों किसी जर्जर पुल की तरह ढह गया।
करोड़ों की संपत्ति कुर्की जब्ती हुई, बेटा एनकाउंटर में मारा गया, पत्नी को पुलिस तलाश रही है और अब खुद अतीक और भाई दोनों सुपुर्द-ए-खाक हो गए। पूर्व बसपा विधायक राजू पाल की हत्या से शुरू हुआ ये पूरा खेल उमेश पाल की हत्या पर आकर कुछ पल के लिए थमा। लेकिन उमेश पाल की हत्या करवाना ही अतीक की सबसे बड़ी गलती होगी... ये तो शायद उसने भी नहीं सोचा होगा।

राजू पाल और उनके पुलिस सुरक्षा गार्ड राघवेंद्र सिंह और संदीप निषाद को 25 जनवरी 2005 को अतीक अहमद से मरवाया था। इसी केस में 28 मार्च को अतीक अहमद को आजीवन कारावास की सजा हुई। जिसके बाद साबरमति जेल में बंद अतीक अहमद ने राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य उमेश पाल की हत्या की प्लानिंग की।
24 फरवरी 2023 को उमेश पाल की दहाड़े प्रयागराज में हत्या कर दी गई। उमेश पाल के साथ-साथ इसमें दो पुलिसकर्मी की भी मौत हो गई। इसे आप अतीक की दूसरी सबसे बड़ी गलती कह सकते हैं कि उसने पुलिस वालों को भी अपना निशाना बनाया।

सीसीटीवी से पता चला कि उमेश पाल की हत्या में अतीक के बेटे असद और उसके 7 से 8 गुर्गों का हाथ है। जांच में पता चला कि अतीक ने जेल के अंदर बैठकर सारी प्लानिंग के साथ उमेशपाल की हत्या करवाई थी। फिर क्या था...अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति रखने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस केस के जांच के आदेश दिए।
इस मुद्दे पर यूपी विधानसभा सत्र में भी खूब जोरदार हंगामा हुआ। जिसपर सीएम योगी ने कहा था, ''हम माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे...''। विधानसभा सत्र के दौरान उमेश पाल की हत्या करवाना, अतीक की तीसरी गलती कही जा सकती है।
51 दिनों में पलट गया अतीक का पूरा खेल!
24 फरवरी 2023 को उमेश पाल की हत्या हुई और ठीक उसके 51 दिनों बाद 15 अप्रैल की रात अतीक अहमद और अशरफ अहमद की हत्या हुई। 24 फरवरी के बाद से ही यूपी पुलिस एक्शन में थी। 25 फरवरी को उमेश पाल की पत्नी ने एफआईआर दर्ज कराई थी। 27 फरवरी को साजिशकर्ता सदाकत गिरफ्तार हुआ और इनामी अरबाज एनकाउंटर में मारा गया। 5 मार्च को अतीक के बेटे असद समेत 5 शूटरों पर ढाई-ढाई लाख का इनाम घोषित किया गया।

21 मार्च को अतीक के दफ्तर से 72 लाख व असलहों को बरामद किया गया। 27 मार्च को अतीक और अशरफ को जेल से पेशी के लिए प्रयागराज लाया गया। 28 मार्च को अतीक और अशरफ को उम्रकैद की सजा हुई।
1 अप्रैल को मेरठ से अतीक का बहनोई डॉ. अखलाक पकड़ा गया। 2 अप्रैल को अतीक का नौकर शाहरुख गिरफ्तार हुआ। 5 अप्रैल को राजू पाल हत्याकांड में शामिल अब्दुल कवि ने सरेंडर किया।
7 अप्रैल को अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन पर पुलिस ने 50 हजार का इनाम रखा। 8 अप्रैल को अतीक की बहन आयशा नूरी और उनकी बेटियों को पुलिस ने वांटेड घोषित किया। 9 अप्रैल को अतीक के तीन करीब सहयोगी गिरफ्तार हुआ।
13 अप्रैल को झांसी एनकाउंटर में यूपी पुलिस ने अतीक के छोटे बेटे असद अहमद और अतीक के सहयोगी गुलाम को मार गिराया। 15 अप्रैल को अतीक और अशरफ की प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल परिसर में हत्या हुई।

ये वही प्रयागराज का कॉल्विन अस्पताल है, जहां अतीक ने 25 जनवरी 2005 को राजू पाल की हत्या करवाई थी। यानी जहां से अतीक की उल्टी गिनती शुरू हुई थी, वहीं पर सबकुछ खत्म हुआ। अगर अतीक ने शायद उमेश पाल की हत्या ना करवाई होती तो उसके पूरे साम्राज्य का खात्मा इस तरह एक पल में ना हुआ होता।
देखें कैसे लाइव कैमरे पर हुई अतीक की हत्या...
अब देखने वाली बात ये होगी कि अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन माफिया के जनाजे में शामिल होती हैं या नहीं। उमेश पाल की हत्या की साजिश रचने के आरोप में शाइस्ता परवीन का भी नाम है। यूपी पुलिस उसकी तलाश में है। बेटे असद के जनाजे में भी शाइस्ता परवीन शामिल नहीं हुईं।












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