SDM Jyoti Maurya : गिरफ्तार हो सकते हैं आलोक मौर्य, ज्योति मौर्य के चक्रव्यूह में बुरी तरह फंसने की संभावना
Alok Maurya: एसडीएम ज्योति मौर्य (SDM Jyoti Maurya) का विवाद गहराता ही जा रहा है। सोशल मीडिया पर तो लोगों ने एसडीएम ज्योति मौर्य के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया है। कई लोग उनकी जांच की मांग कर रहे हैं तो कुछ लोग पद से हटाने की बात कर रहे हैं। लेकिन इन सब के बीच ज्योति मौर्य भी अब बेहद सख्त हो गई हैं। उन्होंने थाने में अपने पति आलोक मौर्य (Alok Maurya) के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया है। अब कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि शादी के 13 साल हो गए तो क्या ऐसे में ज्योति मौर्य द्वारा लगाए गए दहेज केस में वह फंस सकते हैं।
एसडीएम ज्योति मौर्य के गंभीर आरोप
एसडीएम ज्योति मौर्य ने आलोक मौर्य (Alok Maurya) के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया है। ज्योति मौर्य ने 50 लाख रुपए के लिए दहेज उत्पीड़न करने का भी आरोप लगाया है। दहेह का केस पूरे परिवार पर लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दिन में आलोक मौर्य को पूछताछ के लिए बुला सकती है। इस दौरान अगर उनके खिलाफ कोई भी सबूत पाए जाते हैं तो आलोक मौर्य गिरफ्तार हो सकते हैं। यानी कहें तो आलोक मौर्य एसडीएम ज्योति मौर्य (SDM Jyoti Maurya) के चक्रव्यूह में फंस सकते हैं।

आलोक मौर्य के खिलाफ आईटी एक्ट में भी FIR दर्ज
एसडीएम ज्योति मौर्य (SDM Jyoti Maurya) ने कहा कि मैं पहले से ही अपने पति आलोक मौर्य (Alok Maurya) के खिलाफ IT एक्ट में FIR दर्ज करा चुकी हूं। ये चैट मई महीने का ही है। उसमें पुलिस जो भी तथ्य इकट्ठा करना चाहेगी करेगी। आलोक मौर्य (Alok Maurya) आईटी एक्ट के तहत भी फंस सकते हैं।
क्या कहता है दहेज का कानून
दहेज उत्पीड़ का केस धारा 498-ए के तहत होता और इसके तहत अगर लड़का या उसका परिवार दहेज मांगने का दोषी पाया जाता है तो उसके अंतर्गत 3 साल की कैद और जुर्माना लग सकता है।
दहेज केस शादी के कितने साल तक लगता है ?
कई लोग सोचते हैं कि शादी के सात साल बाद कोई दहेज केस नहीं लगता है। तो जान लें यह गलतफहमी है। दहेज केस किसी भी समय लग सकता है। इसके लिए कोई निर्धारित सीमा नहीं है। हां मृत्यु के मामले में सात साल वाला सिस्टम अप्लाई होता है। यानी कि महिला की मृत्यु शादी के 7 साल बाद होती है तो दहेज हत्या का केस नहीं चलेगा।
दहेज हत्या क्या है?
यदि किसी महिला की मृत्यु शादी के 7 साल के भीतर हो जाती है और अगर लड़की वालों की तरफ से दहेज या उत्पीड़न केस लगाया जाता है तो इसे दहेज हत्या माना जाता है। इसमें आईपीसी की धारा 304B भारतीय दंड संहिता की, 1860 के तहत सजा होती है। दहेज हत्या के लिए सजा सात साल के कारावास की न्यूनतम सजा या आजीवन कारावास की अधिकतम सजा है।












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