इलाहाबाद हाईकोर्ट सरकार पर नाराज, कहा- 70 सालों से गुमराह कर रही है ब्यूरोक्रेसी

यही कारण है कि देश में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। नाराज हाईकोर्ट ने साफ लहजे में सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ही ऐसे नियम बना रही है।

इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित गारंटी अधिनियम 2011 को लागू करने में बैकफुट पर रही व्यवस्था पर कड़े शब्दों में प्रहार किया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि बीते 70 वर्षों से देश की ब्यूरोक्रेसी जनता को गुमराह कर रही है। जनहित गारंटी कानून लागू होने के 6 वर्ष बाद भी सभी विभागों में अपीलीय अधिकरण तक नहीं बनाए जा सके हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये गंभीर टिप्पणी रामदुलारी देवी की याचिका पर दी है। दरअसल इस याचिका पर सुनवाई के दौरान पिछले ही आदेश में कोर्ट ने साफ कह दिया था कि सरकार 14 दिसंबर तक जनहित गारंटी कानून लागू करें लेकिन हाईकोर्ट की निर्धारित तिथि का समय भी बीत गया पर सरकार जनहित गारंटी अधिनियम नहीं लागू कर सकी। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखने वाले कानूनों को इतना उलझा दिया गया है, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही तय ही ना हो। यही कारण है कि देश में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
नाराज हाईकोर्ट ने साफ लहजे में सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ऐसे नियम बना रही है, जिससे जनता तो नियमों में बंधे उलझे और परेशान हो, लेकिन अफसरों की जवाबदेही ही तय नही है। यानि मंशा ये है कि जनता तो कानूनी प्रक्रिया में उलझना नहीं चाहेगी। ऐसे में वो सुविधा शुल्क देकर अपना काम बनाएंगे। इस स्थिति में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना संभव नहीं होगा।

RTI एक्ट की तरह हो जनहित गारंटी अधिनियम

RTI एक्ट की तरह हो जनहित गारंटी अधिनियम

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित गारंटी अधिनियम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जनहित गारंटी अधिनियम का प्रावधान पूरी तरीके से स्पष्ट होना चाहिए, तभी वो प्रभावी हो सकेगा। जिस तरह से आरटीआई एक्ट यानी सूचना का अधिकार अधिनियम का प्रावधान पूरी तरह से स्पष्ट है और अपील पर कार्रवाई ना होने पर पेनाल्टी का प्रावधान है। उसी तरह जनहित गारंटी अधिनियम के तहत भी अपील पर समय सीमा तय हो और अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो। जिसके बाद लापरवाह और भ्रष्टाचार लोगों पर कार्रवाई की जा सके।

कोर्ट ने समझाया नियम

कोर्ट ने समझाया नियम

राम दुलारी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने जनहित गारंटी अधिनियम के तहत नियम को भी समझाया और कहा कि यदि आय प्रमाण पत्र लेना हो तो अर्जी 2 दिन में तय करने का नियम है। यदि अर्जी तय नहीं होती है तो वो स्वयं निरस्त समझी जाएगी। इसके खिलाफ प्रथम अपील होगी और इससे संतुष्ट ना होने पर द्वितीय अपील की जाएगी, इसके बाद लापरवाह अधिकारी पर पेनल्टी लगाई जाएगी। वहीं सबसे आवश्यक है इसके लिए सभी विभागों में अपीलीय अधिकरण घटित हो, लेकिन आज तक अधिकरण गठित ही नहीं की जा सकी है।

कोर्ट ने पूछा कैसे होगा भ्रष्टाचार कम?

कोर्ट ने पूछा कैसे होगा भ्रष्टाचार कम?

कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा की जनहित गारंटी कानून लागू हुए 6 वर्ष हो गया है, लेकिन सभी विभागों में अपीलीय अधिकरण ही नहीं बन पाए। बिना अपीलीय अधिकरण के कार्यवाही कैसे संभव होगी? आखिर क्या ऐसे में भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा?

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