पूर्व बीजेपी विधायक उदयभान करवरिया की रिहाई पर अखिलेश यादव ने योगी सरकार की आलोचना
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पूर्व भाजपा विधायक उदयभान करवरिया को रिहा करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार जमकर आलोचना की है। सपा मुखिया अखिलेश यादव यह कार्रवाई सरकार की अपराध के खिलाफ घोषित शून्य-सहिष्णुता की नीति के विपरीत है।

बता दें समाजवादी पार्टी के विधायक जवाहर यादव की 1996 में हत्या के लिए 2019 में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले करवरिया को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा क्षमादान दिए जाने के बाद 25 जुलाई को रिहा कर दिया गया।
यूपी के पूर्व मख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी की भाजपा सरकार को अपराध के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को कायम रखने की चुनौती दी। उन्होंने कहा भाजपा की अंदरूनी राजनीति के कारण किसी तीसरे पक्ष को क्यों नुकसान उठाना पड़े। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा का एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें समाजवादी पार्टी की विधायक विजमा यादव ने अपने पति के हत्यारों के छूट जाने पर चिंता जताई।
वहीं प्रयागराज की प्रतापपुर सीट से सपा विधायक विजमा यादव ने रिहाई पर दुख जताते हुए कहा, "मेरे पति की 1996 में हत्या कर दी गई थी। 18 साल के संघर्ष के बाद मुझे कोर्ट से न्याय मिला और आरोपी जेल गए। प्रयागराज में पहली बार एके-47 राइफल चलाने वालों को भाजपा सरकार ने रिहा कर दिया है।"
क्या है राज्यपाल की क्षमा और कानूनी प्रावधान
राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए करवरिया को क्षमादान दिया। यह अनुच्छेद राज्य के राज्यपालों को राज्य अधिकारियों की संस्तुति के आधार पर क्षमादान देने या सजा कम करने का अधिकार देता है। अधिकारियों ने बताया कि प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट ने जेल में करवरिया के अच्छे आचरण के कारण उनकी रिहाई की संस्तुति की थी।












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