UP की बदलती सियासत में अखिलेश को सता रहा मुसलमानों की नाराजगी का डर, जानिए क्यों नहीं कर रहे "इफ्तार पार्टी"
लखनऊ, 30 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में इस समय समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव इस समय दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। एक तरफ वो अपने चाचा शिवपाल के बगावती तेवर को संभालने में जुटे हैं वहीं सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां का रवैया उनके लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। सरकार में रहते हुए अखिलेश पांच कॉलीदास मार्ग पर रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन करते रहे हैं और इसमें आजम खां विशेषतौर से शरीक होते थे। सत्ता से हटने के बाद भी अखिलेश हर साल इस तरह की पार्टियों का आयोजन करते थे लेकिन अबकी बार वो खामोशी का चादर ओढ़े हुए हैं और इसके पीछे की वजह आजम खां का सियासी रुख है। क्या अखिलेश को अब इस बात का डर सता रहा है कि "इफ्तार पार्टी" हुई तो फिर मुस्लिम समाज का एक तबका उनके खिलाफ मुखर हो सकता है।

अखिलेश ने आखिरी होटल ताज में रखी थी पार्टी
पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार किसी न किसी इफ्तार पार्टी में जा रहे हैं। वह कभी बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हैं तो कभी अपने चाचा शिवपाल यादव पर. लोगों को उम्मीद थी कि इस बार अखिलेश यादव खुद इफ्तार करेंगे। लेकिन पार्टी के मुस्लिम नेता इंतजार करते रहे। पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम नेता आजम खान पिछले दो साल से जेल में हैं। आजम और उनके समर्थक अखिलेश यादव से नाराज बताए जा रहे हैं. उनके समर्थन में कुछ मुस्लिम नेताओं ने भी पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया है। यह सिलसिला लगातार चलता रहता है। अखिलेश ने आखिरी बार 2018 में लखनऊ के होटल ताज में इफ्तार पार्टी रखी थी।

क्या अखिलेश इफ्तारी की मेजबानी से कतरा रहे हैं
उत्तर प्रदेश में रमजान के दौरान काफी सियासी इफ्तार होता है। लगभग सभी राजनीतिक दल इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते रहे हैं। इसके अलावा सभी दलों के नेता अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रोजा इफ्तार का आयोजन करते हैं। यूपी से सटे बिहार में भी राजनीतिक इफ्तार का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन इस बार यूपी में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव इफ्तार आयोजित करने से कतरा रहे हैं। ऐसे आरोपों के चलते अब यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि क्या अखिलेश यादव पार्टी में सालों से चली आ रही इफ्तार की प्रथा को रोकने के बारे में सोच रहे हैं।

अखिलेश को सता रहा मुस्लिम नेताओं की नाराजगी का डर
विधानसभा चुनाव में सपा की करारी हार के बाद पार्टी में मुस्लिम नेताओं की नाराजगी को कारण बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि इफ्तार के आयोजन से नाराज मुस्लिम नेताओं को एक साथ बैठने का मौका मिलेगा तो अखिलेश यादव के खिलाफ नाराज नेताओं की संख्या बढ़ सकती है. इसलिए इस तरह की घटना से अभी बचना चाहिए। इसके चलते सपा प्रमुख ने अभी तक इफ्तार के आयोजन का दिन तय नहीं किया है। पार्टी की स्थापना के बाद से पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव पार्टी मुख्यालय में इफ्तार का आयोजन करते रहे हैं। कई पार्टियों के मुस्लिम नेताओं के अलावा लखनऊ के जाने माने मुस्लिम मौलाना भी इस तरह के आयोजनों में हिस्सा लेते थे।

अखिलेश पर मुस्लिम समाज की अनदेखी का आरोप
इसे लेकर तरह-तरह के राजनीतिक कयास लगाए जाने लगे हैं। सवाल पूछा जा रहा है कि क्या अखिलेश समाजवादी पार्टी पर मुस्लिम-यादव पार्टी होने का टैग खत्म करना चाहते हैं। इसलिए वह ढाई साल से जेल में बंद आजम खान से मिलने नहीं जा रहे हैं और न ही पार्टी के मुस्लिम नेताओं द्वारा आजम खान के पक्ष में बोलने वाले सवालों का जवाब दे रहे हैं। जबकि पार्टी सांसद शफीकुर रहमान बर्क और आजम खान के करीबी फसाहत अली खान ने आरोप लगाया है कि सपा में मुस्लिम नेताओं और मुस्लिम समाज की अनदेखी की जा रही है।

यूपी में इफ्तार पार्टियां अल्पसंख्यकों को साधने का जरिया
अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस तरह के आयोजनों का आयोजन पार्टी मुख्यालय से बदलकर ताज होटल कर दिया गया। सपा की तरह अन्य विपक्षी दलों ने भी इफ्तार का आयोजन शुरू कर दिया। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने सत्ता में रहते हुए ताज होटल में इफ्तार पार्टी का भी आयोजन किया था, जिसे उन्होंने अब बंद कर दिया है। वर्तमान में यूपी में इफ्तार एक सांकेतिक इशारा था और अल्पसंख्यक समुदाय की पहुंच बढ़ाने का एक साधन भी था, लेकिन अब सपा में इफ्तार पार्टियों के आयोजन को लेकर जो सोच हो रही है, उससे पता चलता है कि समय और राजनीतिक परिस्थितियां बदल गई हैं।












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