अखिलेश और राजभर के बीच 'तलाक' तक आ गई बात, सिर्फ इस बात का है इंतजार
बलिया (उत्तर प्रदेश), 8 जुलाई: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के गठबंधन में एकबार फिर से टूट की नौबत आ गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के सुप्रीमो ओम प्रकाश राजभर विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के साथ लखनऊ में हुई बैठक में नहीं बुलाए जाने से भड़के हुए हैं। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति चुनाव में उनकी पार्टी के 6 विधायक किसका समर्थन करेंगे, इसका ऐलान 12 जुलाई को किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि वह अखिलेश यादव की ओर से 'तलाक' मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

अखिलेश और राजभर के बीच 'तलाक' तक आ गई बात
उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन के बीच का असंतोष कभी भी फटकर ज्वालामुखी का रूप धारण कर सकता है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के चीफ तो साफ-साफ ऐसा ही कह रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि वे सिर्फ अखिलेश यादव की ओर से 'तलाक' का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया है कि सपा के साथ गठबंधन तोड़ने के लिए वह कोई कदम नहीं बढ़ाएंगे। बलिया के पास के जिले मऊ में पार्टी की एक बैठक में जाने से पहले राजभर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'सपा के साथ गठबंधन खत्म करने के लिए मैं कोई कदम नहीं उठाऊंगा। मैं अखिलेश यादव की ओर से तलाक दिए जाने का इंतजार करूंगा।'

हो सकता है कि अखिलेश मुझे भूल गए हों- राजभर
सुभासपा नेता का कहना है कि वह 'अभी भी समाजवादी पार्टी के साथ हैं, लेकिन अखिलेश यादव ऐसा नहीं चाहते हैं तो वह जबर्दस्ती साथ भी नहीं रहेंगे।' सपा सुप्रीमो के खिलाफ राजभर का गुस्सा राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी कैंप की ओर से साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को लेकर लखनऊ में गुरुवार को हुई बैठक की वजह से है। उन्हें समर्थन देने के लिए जो बैठक बुलाई गई थी, उसमें ओपी राजभर को नहीं बुलाया गया था। उन्होंने चुटकी ली कि 'हो सकता है कि अखिलेश यादव मेरे बारे में भूल गए हों, इसलिए मुझे नहीं बुलाया।'

12 जुलाई को राष्ट्रपति उम्मीदवार को समर्थन पर ऐलान
फरवरी-मार्च में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में राजभर की पार्टी सपा, रालोद के साथ गठबंधन में 19 सीटों पर लड़कर 6 सीटें जीती थी। अब ओपी राजभर ने कहा है कि वह 12 जुलाई को राष्ट्रपति उम्मीदवार को समर्थन देने को लेकर अपने फैसले की घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा कि 'फैसले से पहले बैठक (मऊ) में इसपर चर्चा की जाएगी।' इससे पहले वे कई बार अखिलेश यादव से कह चुके हैं कि एसी कमरे से बाहर आकर जनता के बीच जाएं।

सपा-बसपा को साथ आने की कह चुके हैं बात
पिछले महीने जबसे रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के दोनों उम्मीदवार हारे हैं, दोनों नेताओं के बीच मतभेद जगजाहिर हो चुके हैं। हाल ही में पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में राजभर ने 2024 के आम चुनाव में भाजपा के खिलाफ मोर्चा लेने के लिए सपा और बसपा के हाथ मिलाने पर भी जोर दिया था। अलबत्ता, 2019 में किया गया यह प्रयोग भी फेल हो चुका है। राजभर पूर्वांचल में प्रभावशाली ओबीसी नेता माने जाते हैं।

भाजपा के साथ भी कर चुके हैं गठबंधन
बसपा के साथ हाथ मिलाने के राजभर के सुझाव के बारे में जब अखिलेश यादव से पूछा गया था तो उन्होंने कहा, 'समाजवादी पार्टी को किसी की सलाह की आवश्यकता नहीं है।' 2017 के विधानसभा चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का बीजेपी के साथ गठबंध हुआ था। तब पार्टी 8 सीटों पर लड़कर 4 जीती थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार में राजभर कैबिनेट मंत्री भी बने थे। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन तोड़ लिया था।












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