आगरा ग्रामीण सीट: बेबीरानी मौर्य को साधनी पड़ेगी वोटों की गणित, जानिए ग्राउंड रिपोर्ट

लखनऊ, 29 जनवरी: उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में सारे दल अपनी अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। इस बार आगरा की दलित बहुल ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र को आगरा के गले का हार भी खा जाता है। इस विधानसभा सीट में शहरी सीमा से से गांव शामिल हैं। 2012 में अस्तित्व में आई इस सीट पर 2017 में बीजेपी की हेमलता दिवाकर ने मोदी लहर में बीएसपी के कालीचरण सुमन को 65 हजार से अधिक अंतर से हराया था। मौजूदा विधायक के प्रति जनता की नाराजगी का फीडबैक मिलने के बाद बीजेपी ने उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबीरानी मौर्य पर दाव लगाया है।

आगरा

बीजेपी के मुकाबले के लिए बीएसपी ने यहां से किरण प्रभा केसरी को उतारा है। वहीं सपा और आरएलडी गठबंधन ने महेश जाटव को जबकि कांग्रेस ने उपेंद्र सिंह को टिकट दिया है। वो यहां से पहले भी दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। बेबिरानी मौर्य बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं और बड़ा चेहरा भी हैं। लेकिन उनके सामने अपने ही विधायक के प्रति उपजी नाराजगी को दूर करने की चुनौती दी है। इस सीट पर सबसे ज्यादा सवा लाख दलित मतदाता हैं। एक लाख से अधिक मुस्लिम, यादव और कुशवाहा मतदाता भी हैं। जैसे में दलित मतदाताओं की भूमिका काफी अहम हो जाती है। जीत उसी की होगी जो दलित मतदाताओं के साथ अन्य जातियों को भी साधने में कामयाब होगा।

इन मुद्दों को लेकर मुखर हैं मतदाताइस विधानसभा सीट पर मतदाताओं का रुख काफी रोचक है। अजीजपुर निवासी प्रेम सिंह कहते हैं की वर्तमान विधायक ने कोई काम नही कराया है। काम तो छोड़िए पांच साल तक छेत्र में दिखाई नहीं दिए। वहीं इस इलाके के प्रदीप चाहर कहते हैं की आगरा ग्रामीण इलाका दो पाटों में फसा हुआ है। एक तर्ज गांव हैं तो दूसरी तरफ शहर हैं। यहां विकास कार्य बमुश्किल ही हो पाते हैं। नीलगाय और छुट्टा पशुओं की समस्या से लोग परेशान हैं। नहरों में पानी नहीं आता। नेताजी तो कभी कभी आते हैं लेकिन जनता को इन समस्याओं से हर रोज जूझना पड़ता है।

बीजेपी ने बदला प्रत्याशी, फिर भी मुश्किल बरकरार
बीजेपी ने इस सीट से प्रत्याशी तो बदल दिया है लेकिन चुनौतियां अभी भी पीछा कर रहीं हैं। सबसे ज्यादा सवाल विधायक के पांच साल दिखाई न देने को लेकर है। नाराजगी का आलम ये है की सिरौली और अजीजपुर में विधायक के लापता होने के पोस्टर भी लग गए थे। दरअसल ग्रामीण इलाका की सीमाएं छावनी और खेरागढ़ विधानसभा से सटा हुआ है। इस असर भी इस सीट पर दिखाई पड़ता है।

क्या कहते है 2017 के पुराने परिणामपिछले चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो बीजेपी की हेमलता दिवाकर को 129887 वोट मिले थे। जबकि दूसरे स्थान पर बीएसपी के कालीचरण सुमन 64,591 वोट मिले थे। काग्रेस के उपेंद्र सिंह 31312 वोट मिले थे जबकि आरएलडी के नारायण सिंह सुमन 17, 446 वोट मिला था। वहीं दूसरी तरफ इस सीट पर जातीय गणित की बात करें तो इस सीट पर कुल 423456 वोट हैं। इसमें 35 हजार जाट वोट, 30 हजार ब्राह्मण वोट, 1.25 लाख दलित वोट शामिल हैं। यहां 40 हजार मुस्लिम वोटर भी हैं जबकि यादव मतदाआत्वों की संख्या भी 40 हजार हैं।

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