लखीमपुर खीरी हिंसा: BJP के भीतर क्यों मचा घमासान, जानिए बूथ अध्यक्षों ने पार्टी की मंशा पर क्यों उठाए सवाल ?

लखनऊ, 13 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में तीन अक्टूबर को हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई थी। इस हिंसा में मारे गए चार लोग स्थानीय किसान थे। एक पत्रकार की मौत हुई थी जबकि तीन अन्य लोग भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता थे जिनकी पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी। हालांकि बीजेपी कार्यकर्ताओं की मौत को भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने एक्शन का रिएक्शन बताया था। लेकिन बीजेपी की लखीमपुर ईकाई ही अपने संगठन पर सवाल खड़ा कर यह पूछ रही है कि आखिर जिन कार्यकर्ताओं की हत्या की गई उनके बारे में बीजेपी कब सोचेगी। उनके गुनहगारों की सजा कब मिलेगी और इस घटना के दौरान मौजूद अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी। तमाम ऐसे सवाल है जो बीजेपी के कार्यकर्ताओं की तरफ से उठाए जा रहे हैं। कई बूथ अध्यक्षों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया है।

स्वतंत्रदेव सिंह

दरअसल लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर के बाद से हुए बवाल के बाद से ही बीजेपी पूरी तरह से बैकफुट पर है। बीजेपी की सरकार में यह पहली बार हो रहा है कि सरकार रहते ही कार्यकर्ताओं की हत्या हो जाए और फिर आरोपी अभी तक खुले घूम रहे हों, ये कैसे संभव है। बीजेपी के नेताओं को भी इसका जवाब देते नहीं बन रहा है। उल्टे प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह की यह नसीहत दी नेता इसलिए नहीं बने हैं कि लोगों को फार्च्यूनर से कुचलते रहें। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान उनके ही कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रहा है। लोग अब मुखर होकर अपनी आवाज उठाने लगे हैं।

सही समय का इंतजार करें, आरोपियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि,

'' कार्यकर्ताओं का गुस्सा वाजिब भी है। अपनी ही सरकार में जब वो पीट पीटकर मारे जाएंगे और दोषी खुलेआम घूमते रहेंगे तो फिर इसका जवाब कौन देगा। संगठन के पास हालांकि ज्यादा विकल्प नहीं है। इस घटना के बाद से ही संगठन पूरी तरह से बैकफुट पर है और फिलहाल वहां किसी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने से बीजेपी के खिलाफ और माहौल खराब हो सकता है। कार्यकर्ताओं को धीरज रखना चाहिए। समय का इंतजार करें। पुलिस अपने हिसाब से अपना काम करेगी।''

अजय मिश्रा का इस्तीफा ले सकती है पार्टी
बीजेपी अध्यक्ष के बयान पर बीजेपी के इस वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि कि उन्हें इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए था। पता नहीं ऐसा बयान उन्होंने किस संदर्भ में दिया और क्यों दिया यह समझ में नहीं आ रहा है। इससे तो लगता है कि अजय मिश्रा का इस्तीफा पार्टी ले सकती है लेकिन इससे पहले इस तरह के बयानों से वह माहौल को टटोलना चाहती है कि इसका क्या रिएक्शन होता है। हालांकि संगठन भी इस बात को मान रहा है कि बीजेपी अध्यक्ष से चूक हुई है।

बीजेपी

बीजेपी के कार्यकर्ताओं में दिख रहा आक्रोश

भारतीय जनता पार्टी के भीतर लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद से ही आवाज उठ रही है कि भाजपा कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या करने वालों की गिरफ्तारी कब होगी? नाराजगी इतनी है कि वह पार्टी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर भी लिखना शुरू कर दिया है और संगठन के खिलाफ अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। बताया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी का कारण स्वतंत्रदेव सिंह का एक बयान भी है जिसमें वो नेतागिरी का मतलब समझा रहे हैं। वह कार्यकर्ताओं को यह नसीहत दे रहे हैं कि नेतागिरी का मतलब लूट, भ्रष्टाचार और फार्च्यूनर से कुचलना नहीं होता है। कार्यकर्ताओं को संयमित रहना चाहिए।

बीजेपी

क्या है लखीमपुर खीरी कांड

तीन अक्टूबर को लखीमुपर खीरी में आंदोलन कर रहे किसानों पर कथित तौर पर केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र ने अपनी गाड़ी चढ़ा दी थी जिसकी वजह से चार किसानों की मृत्यु हो गयी थी। साथ में आशीष मिश्र के ड्राइवर और भाजपा कार्यकर्ताओं समेत चार अन्य की भी मौत हुई थी। आरोप है कि गुस्साई भीड़ ने तीन बीजेपी के कार्यकर्ताओं की पीट पीटकर हत्या कर दी। इस घटना में आठ लोगों की जान गयी। सरकार ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए मंत्री के बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। बाद में विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच आशीष ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था। पुलिस आशीष को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

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लाठी डंडों से पीटकर हत्या करने वालों की गिरफ्तारी क्यों नहीं

प्रदर्शनकारी किसानों की मौत के आरोप में अशीष मिश्र समेत अन्य की गिरफ्तारी हुई है। भाजपा कार्यकर्ताओं की लाठी डंडों से पीट-पीट कर हत्या करने वालों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, उनकी गिरफ्तारी कब होगी? भाजपा कार्यकर्ताओं को मारने वालों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वह इस्तीफा दे देंगे। कई कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे भी दिया है। इस बीच कार्यकर्ताओं के बीच पनपे आक्रोश से पार्टी भी चिंतित है। हालांकि पार्टी इस पूरे मुद्दे पर बोलने से कतरा रही है।

वहीं, लखीमपुर खीरी कांड को लेकर कांग्रेस के प्रवक्ता और मीडिया सेल के संयोजक अंशु अवस्थी कहते हैं कि,

''किसानों के हत्यारे केंद्रीय मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी के बाद भारतीय जनता पार्टी का किसानों से नफरत का का चेहरा पुनः बेनकाब हुआ है। वीडियो सामने आने के बाद से पूरा देश यह बात जान रहा था कि किसानों की हत्या में भाजपा का केंद्रीय मंत्री और उसका बेटा शामिल है लेकिन भाजपा सरकार , केंद्रीय मंत्री और उनके बेटे को बचा रही है। प्रियंका गांधी जी की आवाज के आगे भाजपा सरकार को झुकना पड़ा और बेटा गिरफ्तार हुआ। सभी जान चुके हैं कि किसानों के हत्यारे कौन हैं जब तक केंद्रीय मंत्री बर्खास्त नहीं होता किसानों को न्याय नहीं मिल सकता। इस घटना की उच्चतम न्यायालय के सिटिंग जज से जांच कराई जाए।''

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