UP की राजनीति में दोराहे पर खड़ी है आजम की सियासत, जानिए शिवपाल के ऑफर के बाद क्या बचे हैं विकल्प

लखनऊ, 24 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद आए नतीजों के बाद यूपी के सियासी समीकरण लगातार बनते और बिगड़ते दिखायी दे रहे हैं। यूपी चुनाव में जो नतीजे समाने आए उसके बाद सबसे बड़ी फजीहत अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी पार्टी की हो रही है। एक तरफ जहां उनके अपने चाचा शिवपाल अब उनके खिलाफ बिगुल फूंक चुके हैं वहीं सपा के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम चेहरा आजम खां की राजनीति भी दोराहे पर खड़ी है। शिवपाल ने शुक्रवार को आजम से जेल में मुलाकात कर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (PSP) में शामिल होने का ऑफर देकर गेंद आजम के पाले में डाल दी है अब फैसला आजम को लेना है कि वो उसी सपा के साथ खड़े रहेंगे या अपने लिए नई राह चुनेंगे। लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि आजम के सामने कौन कौन से विकल्प बचे हैं जिनपर वह विचार कर सकते हैं।

Recommended Video

    Akhilesh Yadav का BJP Government पर आरोप, Azam khan पर कही बड़ी बात | वनइंडिया हिंदी
    क्या आरएलडी का दामन थामेंगे आजम

    क्या आरएलडी का दामन थामेंगे आजम

    चुनाव से पहले ही समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय लोकदल के चीफ जयंत चौधरी के साथ गठबंधन किया था। हालांकि पश्चिमी यूपी में अखिलेश को इस गठबंधन का ज्यादा फायदा हुआ नहीं जिसके बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रहीं थीं कि अब जयंत भी अगले आम चुनाव के हिसाब से अपनी गोटियां सेट करने का काम शुरू कर चुके हैं। बहरहाल क्या जयंत की पार्टी आजम के लिए एक विकल्प हो सकती है। राजनीतिक पंडितों की माने तो आजम के सामने विकल्प है कि वह आरएलडी में शामिल हो सकते हैं लेकिन वह ऐसा करेंगे इसकी संभावना काफी कम ही है क्योंकि आरएलडी में उनका कद हमेशा जयंत चौधरी के नीचे ही रहेगा जिसे वह बर्दाश्त नहीं करेंगे।

    नई पार्टी का गठन कर सकते हैं आजम

    नई पार्टी का गठन कर सकते हैं आजम

    आम के सामने दूसरा विकल्प यह है कि जेल से रिहा होने के बाद वह सपा के नेता रहे शिवपाल की तरह अलग पार्टी का गठन कर मुस्लिम सियासत की ओर बढ़ सकते हैं। लेकिन आजम को पता है कि यूपी में सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति कर ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रहा जा सकता है। इसको देखते हुए इस बात की संभावना भी कम है कि वह अपनी पार्टी बनाएंगे। इसके पीछे एक वजह और है कि यूपी में यदि किसी पार्टी को सियासत करनी है तो वो हिन्दू वोट बैँक को इगनोर नहीं कर सकती। ऐसे में आजम के लिए यह कदम सही नहीं होगा ऐसा राजनीतिक पंडितों का मानना है।

    शिवपाल की पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं आजम

    शिवपाल की पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं आजम

    आजम के सामने तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण विकल्प है कि वह शिवपाल की पार्टी ज्वाइन करें और उसमें वह सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे के तौर पर काम करें। इससे वह सपा के लिए चुनौती भी बन सकते हैं और अपनी और बेटे की सियासत को भी आगे बढ़ा सकते हैं। शिवपाल ने उनको पार्टी ज्वाइन करने का ऑफर भी दिया है ऐसा पीएसपी के सूत्रों का कहना है। आजम इसमें शामिल होकर मुस्लिम वोट बैंक को साध सकते हैं क्योंकि इस पार्टी से एकतरह से ओबीसी वोटरों का भी जुड़ाव शिवपाल के नाते रहेगा। शिवपाल को संगठन का आदमी माना जाता है इसलिए उनके पास इसका अनुभव भी है और वह सपा में भी बड़ी सेंध लगा सकते हैं। इससे दोनों मिलकर अखिलेश के लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं।

    AIMIM में शामिल होने एक विकल्प लेकिन ओवैसी के आगे उनकी कितनी चलेगी

    AIMIM में शामिल होने एक विकल्प लेकिन ओवैसी के आगे उनकी कितनी चलेगी

    आजम के सामने एक विकल्प असदुद्दीन ओवैसी पार्टी AIMIM में शामल होने की भी है लेकिन यह फैसला भी आजम लेंगे इसकी संभावना कम ही है। कहते हैं कि एक मयान में दो तलवारें नहीं रह सकती। इसलिए आजम यदि इस तरह का कोई फैसला लेते हैं तो ठीक इसी तर्ज पर होगा। चूंकि ओवैसी भी मुस्लिम वोट बैंक की सियासत कर रहे हैं ओर आजम भी उसी लाइन पर चलने वाले नेता माने जाते हैँ ऐसे में ओवैसी के आगे उनकी कितनी चलेगी ये सोचने वाला सवाल है। ओवैसी की पार्टी खुद पिछले दो विधानसभा चुनावों से कई सीटों पर चुनाव लड़ती आ रही है लेकिन यूपी का मुस्लिम मतदाता ओवैसी की पार्टी को हमेशा ही नकारता रहा है।

    सपा में रहकर ही रिवोल्ट कर सकते हैं आजम खान

    सपा में रहकर ही रिवोल्ट कर सकते हैं आजम खान

    सबसे अंतिम और पांचवा विकल्प आजम के पास यह है कि वह फिलहाल सपा में ही रह सकते हैं और सपा में रहकर ही वह अपने तेवरों से अखिलेश और मुलायम के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। आजम से मिलने के बाद शिवपाल ने यह बयान देकर इस बात का संकेत भी दिया था। शिवपाल ने कहा था कि यदि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव चाहते तो आजम जेल से बाहर आ सकते थे। मुलायम सिंह का मोदी बड़ा सम्मान करते हैं और इस रिश्ते का इस्तेमाल वह आजम को जेल से बाहर निकालने में कर सकते थे। हालांकि योगी भी इस बात को पहले भी कह चुके हैं कि अखिलेश और उनका परिवार ही नहीं चाहता कि आजम खां बाहर आएं।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+