शिवपाल के बाद अब अखिलेश पर भारी पड़ी एक और गलती, जानिए इसके सियासी मायने
लखनऊ, 11 अप्रैल: समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं में से एक आजम खान को मुलायम सिंह यादव का खास माना जाता है। पिछली सपा सरकार का मुस्लिम चेहरा रहे आजम की गिनती शीर्ष नेताओं में होती थी। लेकिन आजम के समर्थकों के एक बयान से अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। राजनीतिक पंडितों की माने तो शिवपाल यादव के बाद आजम को नजरअंदाज करने की गलती अखिलेश पर भारी पड़ सकती है। आजम के एक करीबी नेता ने कहा कि जिस तरह का व्यवहार आजम खान के साथ हुआ है उससे समर्थक खासे नाराज हैं। आने वाले दिनों में आजम खान कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

आजम को नजरंदाज कर बड़ी गलती कर रहे हैं अखिलेश !
आजम खान तो जेल में बंद हैं लेकिन जिस तरह से उनके समर्थ अखिलेश यादव को खरी खोटी सुना रहे हैं उससे लगता है कि पानी सिर के ऊपर जा चुका है। अखिलेश पर आरोप लगता रहा है की वो आजम के साथ उस तरह खड़े नजर नहीं आए जैसा उन्हें होना चाहिए था। आजम ने हर समय अखिलेश का साथ दिया लेकिन अखिलेश ने आजम से दूरी बनाए रखी इस वजह से अब उन्हें आजम खान के समर्थकों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।

आजम ने हर कदम पर सपा का साथ दिया
फसाहत अली शानू ने कहा कि हम किसे बताएं, हमारे पास एक समाजवादी पार्टी भी नहीं है, जिसके लिए हमने अपने खून की एक-एक बूंद बहाई है। अखिलेश यादव जी, हमारा रवैया आपके साथ था कि 1989 में जब उनके वाजिद साहब को सीएम बनाने के लिए कोई तैयार नहीं था, तब आजम खान ने कहा था कि मुलायम सिंह यादव को मुख्यमंत्री बना दो। हमारी गलती थी कि आपके पिता मुलायम सिंह को रफीकुल मुल्क की उपाधि दी गई। जब आप कन्नौज में चुनाव लड़े थे तो आजम खान ने कहा था कि टीपू को सुल्तान बनाओ और जनता ने तुम्हें सुल्तान बनाया।

अब्दुल वोट भी करेगा और अब्दुल जेल भी जाएगा
इससे पहले सानू ने कहा कि हमें बीजेपी से क्या शिकायत है? वे हमसे प्यार करते हैं, हम उनसे प्यार करते हैं। हम उनके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा वे हमसे करते हैं। हमारी शिकायत समाजवादी पार्टी से है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जी को हमारे कपड़ों से बदबू आती है। मंच पर हमारा नाम नहीं लेना चाहते। सारा दोष अब्दुल ने ले लिया है। अब्दुल वोट भी करेगा और अब्दुल जेल भी जाएगा। हमने आपको और आपके पिता को मुख्यमंत्री बनाया है। आपके पास इतना बड़ा दिल नहीं हो सकता था कि आप आजम खान को नेता प्रतिपक्ष बना देते। हमारे वोट से 111 सीटें आई हैं।

आजम के नए कदम को लेकर चल रही कयासबाजी
आजम खान 1980 से रामपुर से चुनाव जीत रहे हैं। 1996 के मध्य में उन्हें केवल एक बार कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 2009 में उन्हें समाजवादी पार्टी से 6 साल के लिए निकाल दिया गया था। हालांकि, एक साल बाद निलंबन रद्द कर दिया गया और वापस ले लिया गया। इस बीच संभल के सांसद शफीकुर रहमान बुर्के ने भी सपा पर मुसलमानों के हित में काम नहीं करने का आरोप लगाया है। ऐसे में आजम के नए राजनीतिक कदम को लेकर कयास लगने शुरू हो गए हैं।

आजम को नेता प्रतिपक्ष न बनाए जाने से भी नाराजगी
दरअसल जनता की समस्याओं को लेकर रविवार को रामपुर जिले में समाजवादी पार्टी कार्यालय में बैठक चल रही थी। इस बीच आजम खान के करीबी और मीडिया प्रभारी फसाहत अली सानू ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर तीखे शब्दों में निशाना साधना शुरू कर दिया। सानू ने कहा कि जब आपने कहा था कि मुझे कोरोना की वैक्सीन नहीं मिलेगी तो आजम खान को जेल में कोरोना की वैक्सीन नहीं मिली। इसके साथ ही आजम को नेता प्रतिपक्ष न बनाए जाने पर भी नाराजगी है।












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